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केंद्र की आर्थिक नीतियों से खेती पर बढ़ रहा संकट : सभा
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आनी में किसान सभा की बैठक में मौजूद सदस्य। स्रोत : सभा
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आनी में किसान सभा ने सम्मेलन कर किसानों के भूमि अधिकारों पर की चर्चा
19 को शिमला में होने वाले घेराव में आनी के 200 कार्यकर्ता लेंगे भाग
संवाद न्यूज एजेंसी
आनी (कुल्लू)। आनी में वीरवार को हिमाचल किसान सभा का सम्मेलन हुआ। सम्मेलन में हिमाचल किसान सभा जिला कुल्लू के सचिव नारायण चौहान विशेष रूप से मौजूद रहे। उन्होंने केंद्र सरकार पर किसान विरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केंद्र की नव उदारवादी आर्थिक नीतियों के कारण खेती लगातार संकट में जा रही है और देशभर में किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं। नारायण चौहान ने कहा कि एक ओर प्राकृतिक आपदाओं ने किसानों की जमीन और घर तबाह कर दिए हैं, वहीं प्रभावित परिवारों के पास दोबारा घर बनाने के लिए भूमि तक उपलब्ध नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानसभा आने वाले समय में भूमि से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2000 में तत्कालीन भाजपा सरकार ने लैंड रेवेन्यू एक्ट में धारा 163-ए जोड़ी थी और वर्ष 2002 में संशोधित नियमों के तहत 20 बीघा भूमि पर कब्जे को नियमित करने का प्रावधान किया गया था। प्रदेश के किसान और बागवान पीढि़यों से आसपास की सरकारी भूमि पर खेती करते आ रहे हैं। इसके लिए लाखों लोगों ने आवेदन किए थे, लेकिन 23 साल बाद 5 अगस्त को आए फैसले में इस प्रावधान को रद्द कर दिया गया, जिससे किसानों में भारी रोष है। किसान सभा इस आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय से होते हुए सुप्रीम कोर्ट भी गई, जहां किसानों को आंशिक राहत मिली। किसान सभा ने देश और प्रदेश सरकार से मांग की है कि गरीब किसानों को कम से कम पांच बीघा भूमि उपलब्ध कराई जाए। सम्मेलन में आगामी 19 जनवरी को शिमला में सचिवालय घेराव का आह्वान किया गया, जिसमें आनी से 200 लोग शामिल होंगे। सम्मेलन में नई कार्यकारिणी का गठन सर्वसम्मति से किया गया। इसमें मिलाप ठाकुर को अध्यक्ष, गीता राम को सचिव, प्रताप ठाकुर, टिकम, दलीप ठाकुर उपाध्यक्ष, विजय, हरविंदर, राजेंद्र और मुकेश को सह-सचिव चुना गया। रोशन, दसमी, गोपाल, परस राम, डोला सिंह, दौलत, तारा चंद, दसमी राम, डालमिया और राम कृष्ण को सदस्य बनाया गया।
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19 को शिमला में होने वाले घेराव में आनी के 200 कार्यकर्ता लेंगे भाग
संवाद न्यूज एजेंसी
आनी (कुल्लू)। आनी में वीरवार को हिमाचल किसान सभा का सम्मेलन हुआ। सम्मेलन में हिमाचल किसान सभा जिला कुल्लू के सचिव नारायण चौहान विशेष रूप से मौजूद रहे। उन्होंने केंद्र सरकार पर किसान विरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केंद्र की नव उदारवादी आर्थिक नीतियों के कारण खेती लगातार संकट में जा रही है और देशभर में किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं। नारायण चौहान ने कहा कि एक ओर प्राकृतिक आपदाओं ने किसानों की जमीन और घर तबाह कर दिए हैं, वहीं प्रभावित परिवारों के पास दोबारा घर बनाने के लिए भूमि तक उपलब्ध नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानसभा आने वाले समय में भूमि से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगी। उन्होंने कहा कि वर्ष 2000 में तत्कालीन भाजपा सरकार ने लैंड रेवेन्यू एक्ट में धारा 163-ए जोड़ी थी और वर्ष 2002 में संशोधित नियमों के तहत 20 बीघा भूमि पर कब्जे को नियमित करने का प्रावधान किया गया था। प्रदेश के किसान और बागवान पीढि़यों से आसपास की सरकारी भूमि पर खेती करते आ रहे हैं। इसके लिए लाखों लोगों ने आवेदन किए थे, लेकिन 23 साल बाद 5 अगस्त को आए फैसले में इस प्रावधान को रद्द कर दिया गया, जिससे किसानों में भारी रोष है। किसान सभा इस आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय से होते हुए सुप्रीम कोर्ट भी गई, जहां किसानों को आंशिक राहत मिली। किसान सभा ने देश और प्रदेश सरकार से मांग की है कि गरीब किसानों को कम से कम पांच बीघा भूमि उपलब्ध कराई जाए। सम्मेलन में आगामी 19 जनवरी को शिमला में सचिवालय घेराव का आह्वान किया गया, जिसमें आनी से 200 लोग शामिल होंगे। सम्मेलन में नई कार्यकारिणी का गठन सर्वसम्मति से किया गया। इसमें मिलाप ठाकुर को अध्यक्ष, गीता राम को सचिव, प्रताप ठाकुर, टिकम, दलीप ठाकुर उपाध्यक्ष, विजय, हरविंदर, राजेंद्र और मुकेश को सह-सचिव चुना गया। रोशन, दसमी, गोपाल, परस राम, डोला सिंह, दौलत, तारा चंद, दसमी राम, डालमिया और राम कृष्ण को सदस्य बनाया गया।