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Rampur Bushahar News: अर्ली वैरायटी सेब की फीकी एंट्री, 600 रुपये प्रति बॉक्स बिका
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ठियोग की पराला मंडी में पहुंचा अर्ली वैरायटी सेब। संवाद
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पराला मंडी में पहुंचा अर्ली वैरायटी सेब, 600 रुपये प्रति बॉक्स बिका
फल मंडी में सेब की फीकी एंट्री, गुठलीदार फलों की आवक से बाजार में रौनक
100 से 300 रुपये प्रति 2 किलोग्राम बिक रहा प्लम
संवाद न्यूज एजेंसी
ठियोग (रामपुर बुशहर)। ऊपरी हिमाचल की सबसे बड़ी फल मंडी पराला में अर्ली वैरायटी सेब की एंट्री हुई है। हालांकि, स्वाद में यह सेब दूसरे सेब की अपेक्षा कम मिठास और खटाई वाला रहता है। फल मंडी में इन दिनों गुठलीदार फलों की आवक काफी बढ़ गई है, जिस कारण मंडी में अब चहल-पहल और रौनक का माहौल है। सेब सीजन की शुरुआत के बीच पराला फल मंडी में अर्ली वैरायटी के सेब की फीकी एंट्री दर्ज की गई है। मंगलवार को कोटखाई क्षेत्र से 20 किलोग्राम क्षमता के मात्र 10 बॉक्स सेब मंडी में पहुंचे, जिनका भाव 600 रुपये प्रति बॉक्स रहा। सीजन की शुरुआत में आने वाला यह सेब सामान्यत: पूरी तरह परिपक्व नहीं होता और स्वाद में अपेक्षाकृत खट्टा रहता है। हालांकि, मौसम अनुकूल रहने पर आगामी दिनों में बेहतर गुणवत्ता वाले सेब की आपूर्ति शुरू होने की उम्मीद है। बागवानों और कारोबारियों की नजर फिलहाल मौसम की परिस्थितियों पर टिकी हुई हैं। उनका मानना है कि मौसम अनुकूल रहा तो फलों के आकार, रंग और मिठास में सुधार देखने को मिलेगा। साथ ही मंडी में सेब की आवक भी धीरे-धीरे बढ़ेगी और कारोबार रफ्तार पकड़ेगा। इस बीच पराला मंडी में गुठलीदार फलों की आवक लगातार जारी है। प्लम की 2 किलोग्राम पैकिंग वाली 1,416 पेटियां मंडी में पहुंचीं, जिनके भाव 100 से 300 रुपये प्रति पेटी दर्ज किए गए। वहीं खुमानी की 81 पेटियां मंडी में पहुंची, जिनका मूल्य 100 से 200 रुपये प्रति पेटी रहा। इसके अलावा आड़ू की 29 पेटियां मंडी में पहुंचीं, जिनके दाम 50 से 100 रुपये प्रति पेटी तक रहे। फिलहाल, गुठलीदार फलों का कारोबार मंडी में रौनक बनाए हुए है, जबकि क्षेत्र के बागवान और व्यापारी सेब की मुख्य फसल के बाजार में पहुंचने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
इतने कम दाम से बागवान निराश
कराना के बागवान सुरेश शर्मा ने बताया कि इस बार फसल कम होने के बावजूद इतने कम दाम से बागवान निराश हैं। इतने कम दाम में पेटी का खर्चा व अन्य खर्च भी पूरे नहीं किए जा सकते। उम्मीद है कि आने वाले समय में फसल के बेहतर दाम मिलेंगे। चुराग के बागवान तरुण गोयल ने कहा कि बागवानी के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाइयां व अन्य खर्चे आसमान छू रहे हैं। बेशक यह सेब गुणवत्ता में बेहतर नहीं माना जाता है, लेकिन इतने कम दाम मिलने से बागवान के हाथ खाली ही रह जाएंगे, जोकि बहुत गलत है।
फल मंडी में सेब की फीकी एंट्री, गुठलीदार फलों की आवक से बाजार में रौनक
100 से 300 रुपये प्रति 2 किलोग्राम बिक रहा प्लम
संवाद न्यूज एजेंसी
ठियोग (रामपुर बुशहर)। ऊपरी हिमाचल की सबसे बड़ी फल मंडी पराला में अर्ली वैरायटी सेब की एंट्री हुई है। हालांकि, स्वाद में यह सेब दूसरे सेब की अपेक्षा कम मिठास और खटाई वाला रहता है। फल मंडी में इन दिनों गुठलीदार फलों की आवक काफी बढ़ गई है, जिस कारण मंडी में अब चहल-पहल और रौनक का माहौल है। सेब सीजन की शुरुआत के बीच पराला फल मंडी में अर्ली वैरायटी के सेब की फीकी एंट्री दर्ज की गई है। मंगलवार को कोटखाई क्षेत्र से 20 किलोग्राम क्षमता के मात्र 10 बॉक्स सेब मंडी में पहुंचे, जिनका भाव 600 रुपये प्रति बॉक्स रहा। सीजन की शुरुआत में आने वाला यह सेब सामान्यत: पूरी तरह परिपक्व नहीं होता और स्वाद में अपेक्षाकृत खट्टा रहता है। हालांकि, मौसम अनुकूल रहने पर आगामी दिनों में बेहतर गुणवत्ता वाले सेब की आपूर्ति शुरू होने की उम्मीद है। बागवानों और कारोबारियों की नजर फिलहाल मौसम की परिस्थितियों पर टिकी हुई हैं। उनका मानना है कि मौसम अनुकूल रहा तो फलों के आकार, रंग और मिठास में सुधार देखने को मिलेगा। साथ ही मंडी में सेब की आवक भी धीरे-धीरे बढ़ेगी और कारोबार रफ्तार पकड़ेगा। इस बीच पराला मंडी में गुठलीदार फलों की आवक लगातार जारी है। प्लम की 2 किलोग्राम पैकिंग वाली 1,416 पेटियां मंडी में पहुंचीं, जिनके भाव 100 से 300 रुपये प्रति पेटी दर्ज किए गए। वहीं खुमानी की 81 पेटियां मंडी में पहुंची, जिनका मूल्य 100 से 200 रुपये प्रति पेटी रहा। इसके अलावा आड़ू की 29 पेटियां मंडी में पहुंचीं, जिनके दाम 50 से 100 रुपये प्रति पेटी तक रहे। फिलहाल, गुठलीदार फलों का कारोबार मंडी में रौनक बनाए हुए है, जबकि क्षेत्र के बागवान और व्यापारी सेब की मुख्य फसल के बाजार में पहुंचने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
इतने कम दाम से बागवान निराश
कराना के बागवान सुरेश शर्मा ने बताया कि इस बार फसल कम होने के बावजूद इतने कम दाम से बागवान निराश हैं। इतने कम दाम में पेटी का खर्चा व अन्य खर्च भी पूरे नहीं किए जा सकते। उम्मीद है कि आने वाले समय में फसल के बेहतर दाम मिलेंगे। चुराग के बागवान तरुण गोयल ने कहा कि बागवानी के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाइयां व अन्य खर्चे आसमान छू रहे हैं। बेशक यह सेब गुणवत्ता में बेहतर नहीं माना जाता है, लेकिन इतने कम दाम मिलने से बागवान के हाथ खाली ही रह जाएंगे, जोकि बहुत गलत है।
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