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Rampur Bushahar News: चेक बाउंस के दोषी को एक साल का कारावास
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. शिकायतकर्ता काे 8.50 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश
. बीमा कंपनी को भुगतान करने के लिए दिया चेक हुआ था बाउंस
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रामपुर बुशहर की अदालत ने चेक बाउंस के दोषी को एक साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही शिकायतकर्ता काे 8.50 लाख रुपये की राशि का मुआवजा देने का आदेश दिया है। दोषी ने बीमा कंपनी से अपनी गाड़ी को फाइनेंस कराया था, लेकिन वह किस्तें देने में नाकाम रहा। इसके बाद उसने देनदारी चुकाने के लिए चेक दिया, जो बाउंस हो गया। करसोग निवासी लच्छी राम ने रामपुर स्थित श्री राम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस कंपनी की ब्रांच में पिकअप गाड़ी को फाइनेंस करवाने का अनुरोध किया। कंपनी ने इसे स्वीकृत किया और एक समझौता किया गया। आरोपी मूल राशि और ब्याज सहित 6,50,000 का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी था। आरोपी समय-समय पर किस्तें देने में नाकाम रहा। इसके बाद शिकायतकर्ता फर्म के अधिकारी ने बकाया रकम की पेमेंट करने के लिए आरोपी से संपर्क किया। आरोपी ने जून 2017 काे 6.50 लाख रुपये का चेक जारी किया, लेकिन वह बाउंस हो गया। आरोपी को कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन फिर भी भुगतान नहीं हुआ। इसके बाद यह शिकायत दर्ज की गई। इसके बाद एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत नोटिस बनाया गया और आरोपी को दिया गया। आरोपी ने खुद को बेगुनाह बताया और ट्रायल का दावा किया। अदालत ने फैसला दिया कि आरोपी यह साबित करने में विफल रहा है कि शिकायतकर्ता फर्म के प्रति उसकी कोई कानूनी देनदारी नहीं है। यह अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंचती है कि शिकायतकर्ता फर्म ने रिकॉर्ड पर ठोस, विश्वसनीय और भरोसेमंद सुबूत पेश करके अपने मामले को उचित संदेह से परे साबित कर दिया है। आरोपी को दोषी ठहराया जाता है। दोषी को एक साल की साधारण कारावास की सजा दी जाती है। इसके अलावा, दोषी को शिकायतकर्ता को 8.50 लाख रुपये की राशि का मुआवजा देने का आदेश दिया जाता है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रामपुर बुशहर की अदालत ने चेक बाउंस के दोषी को एक साल के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही शिकायतकर्ता काे 8.50 लाख रुपये की राशि का मुआवजा देने का आदेश दिया है। दोषी ने बीमा कंपनी से अपनी गाड़ी को फाइनेंस कराया था, लेकिन वह किस्तें देने में नाकाम रहा। इसके बाद उसने देनदारी चुकाने के लिए चेक दिया, जो बाउंस हो गया। करसोग निवासी लच्छी राम ने रामपुर स्थित श्री राम ट्रांसपोर्ट फाइनेंस कंपनी की ब्रांच में पिकअप गाड़ी को फाइनेंस करवाने का अनुरोध किया। कंपनी ने इसे स्वीकृत किया और एक समझौता किया गया। आरोपी मूल राशि और ब्याज सहित 6,50,000 का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी था। आरोपी समय-समय पर किस्तें देने में नाकाम रहा। इसके बाद शिकायतकर्ता फर्म के अधिकारी ने बकाया रकम की पेमेंट करने के लिए आरोपी से संपर्क किया। आरोपी ने जून 2017 काे 6.50 लाख रुपये का चेक जारी किया, लेकिन वह बाउंस हो गया। आरोपी को कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन फिर भी भुगतान नहीं हुआ। इसके बाद यह शिकायत दर्ज की गई। इसके बाद एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत नोटिस बनाया गया और आरोपी को दिया गया। आरोपी ने खुद को बेगुनाह बताया और ट्रायल का दावा किया। अदालत ने फैसला दिया कि आरोपी यह साबित करने में विफल रहा है कि शिकायतकर्ता फर्म के प्रति उसकी कोई कानूनी देनदारी नहीं है। यह अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंचती है कि शिकायतकर्ता फर्म ने रिकॉर्ड पर ठोस, विश्वसनीय और भरोसेमंद सुबूत पेश करके अपने मामले को उचित संदेह से परे साबित कर दिया है। आरोपी को दोषी ठहराया जाता है। दोषी को एक साल की साधारण कारावास की सजा दी जाती है। इसके अलावा, दोषी को शिकायतकर्ता को 8.50 लाख रुपये की राशि का मुआवजा देने का आदेश दिया जाता है।