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Rampur Bushahar News: अश्लील वीडियो मामले में आरोपी बरी, निचली अदालत का फैसला रद्द

Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 17 Jun 2026 11:20 PM IST
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सत्र न्यायाधीश ने कहा, निचली अदालत ने सबूतों का सही मूल्यांकन नहीं किया

निचली अदालतों को अश्लील वीडियो के मामलों के लिए दिए महत्वपूर्ण निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। रामपुर स्थित सत्र न्यायाधीश किन्नौर की अदालत ने अश्लील वीडियो मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति को बरी कर दिया है। अदालत ने निचली अदालत के फैसले को रद्द करते हुए यह आदेश सुनाया। आरोपी को अश्लील क्लिप बनाने और उन्हें वायरल करने के आरोप में दोषी ठहराया गया था। निचली अदालत ने उसे कुल तीन साल की जेल और एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। इस मामले की शिकायतकर्ता महिला को उसकी अश्लील वीडियो एक सहेली से मिली थी। महिला ने इसकी शिकायत गृह सचिव को भेजी। इस शिकायत को किन्नौर की एक पुलिस चौकी भेजा गया। इसके बाद जांच शुरू हुई। निचली अदालत ने आरोपी को साल मार्च 2022 में दोषी ठहराया था। आरोपी ने निचली अदालत के फैसले को सत्र न्यायाधीश की अदालत में चुनौती दी। सत्र न्यायाधीश की अदालत ने अपने फैसले में कहा कि निचली अदालत ने सबूतों का सही मूल्यांकन नहीं किया। अभियोजन पक्ष आरोपी को कथित पोर्न क्लिप से जोड़ने में पूरी तरह विफल रहा। आरोपी ने अपने बयान में खुद को पीड़ित बताया था। अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि क्लिप शिकायतकर्ता के मोबाइल फोन में किसने डाली थी। आरोपी के मोबाइल फोन में भी कोई क्लिप नहीं पाई गई। आरोपी के सीपीयू से एक हार्ड डिस्क जब्त की गई थी, जिसमें पोर्न क्लिप मिलीं। हालांकि, यह साबित नहीं हुआ कि ये क्लिप पीड़िता के मोबाइल फोन में मिली क्लिप जैसी ही थीं। राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट में क्लिपिंग के स्रोत को ठीक से नहीं जोड़ा गया। सीपीयू से हार्ड डिस्क की बरामदगी कानून के अनुसार साबित नहीं हुई। जांच अधिकारी ने उसे बरामद करते समय इलाके के स्वतंत्र गवाहों को शामिल नहीं किया। सत्र न्यायाधीश की अदालत ने निचली अदालतों को भविष्य के ऐसे मामलों के लिए महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी सबूतों पर ठीक से हस्ताक्षर किए जाने चाहिए। पोर्न क्लिपिंग की प्रकृति साबित करने के लिए उन्हें अदालत की कार्यवाही के दौरान बंद कमरे में देखा जाना चाहिए। मोबाइल फोन और सीडी में पोर्न सामग्री की मौजूदगी के बारे में निचली अदालत को अपनी टिप्पणी भी दर्ज करनी चाहिए।
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