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ननखड़ी कॉलेज बंद करने का निर्णय दुर्भाग्यपूर्ण, जनविरोधी और विद्यार्थी विरोधी : राहुल

Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 07 Jun 2026 11:53 PM IST
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. एसएफआई ने कॉलेज बंद करने के फैसले पर जताया विरोध
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. चेताया, यदि सरकार ने फैसला वापस नहीं लिया तो होगा आंदोलन
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। प्रदेश सरकार की ओर से ननखड़ी कॉलेज को बंद करने का निर्णय अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण, जनविरोधी और विद्यार्थी विरोधी है। यह फैसला उन सैकड़ों छात्र-छात्राओं के साथ अन्याय है, जो अपनी उच्च शिक्षा के लिए इस कॉलेज पर निर्भर हैं। ननखड़ी और आसपास के दूरदराज ग्रामीण क्षेत्रों के अनेक विद्यार्थी आर्थिक एवं पारिवारिक परिस्थितियों के कारण बड़े शहरों में जाकर शिक्षा प्राप्त करने में सक्षम नहीं हैं। उनके लिए यह कॉलेज केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि उनके सपनों और बेहतर भविष्य का आधार है। एसएफआई जिला शिमला उपाध्यक्ष राहुल विद्यार्थी ने जारी बयान में यह बात कही। उन्होंने कहा कि हर माता-पिता का सपना होता है कि उनका बच्चा पढ़-लिख कर जीवन में आगे बढ़े और समाज में सम्मानजनक स्थान प्राप्त करे, लेकिन सरकार के इस फैसले ने उन परिवारों की उम्मीदों को गहरा आघात पहुंचाया है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को यह समझना चाहिए कि ननखड़ी जैसे पहाड़ी और दूरस्थ क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए प्रतिदिन या नियमित रूप से रामपुर या शिमला जाकर पढ़ाई करना आसान नहीं है। लंबी दूरी, परिवहन की समस्याएं, बढ़ता खर्च और अन्य व्यावहारिक कठिनाइयां विद्यार्थियों की शिक्षा में गंभीर बाधा उत्पन्न करेंगी। इसका सबसे अधिक प्रभाव गरीब, किसान, मजदूर और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों पर पड़ेगा।एसएफआई ने कहा कि शिक्षा प्रत्येक नागरिक का मूल अधिकार है। ऐसे में किसी क्षेत्र के विद्यार्थियों से उच्च शिक्षा के अवसर छीनना उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करने के समान है। सरकार को शिक्षा के विस्तार और संस्थानों को मजबूत करने की दिशा में कार्य करना चाहिए, न कि उन्हें बंद करने की नीति अपनानी चाहिए। इकाई ने प्रदेश सरकार से मांग उठाई है कि ननखड़ी कॉलेज को बंद करने के फैसले को तुरंत वापस लिया जाए। कॉलेज में आवश्यक शैक्षणिक और आधारभूत सुविधाओं को सुदृढ़ किया जाए। यदि सरकार ने इस फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया तो एसएफआई विद्यार्थियों, अभिभावकों और स्थानीय जनता को साथ लेकर व्यापक लोकतांत्रिक आंदोलन चलाने के लिए बाध्य होगी।
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