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Rampur Bushahar News: कर्मचारियों, मजदूरों, महिलाओं और पेंशनरों की मांगों की अनदेखी कर रही है सरकार
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रोहड़ू के समोली में आयोजित भारतीय मजदूर संघ के जिला सम्मेलन में उपस्थित अतिथि। संवाद
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भारतीय मजदूर संघ ने जिला सम्मेलन में उठाई श्रमिकों-कर्मचारियों की लंबित मांगें
संवाद न्यूज़ एजेंसी
रोहड़ू। प्रदेश सरकार कर्मचारियों, मजदूरों, महिलाओं, पेंशनरों और श्रमिकों की मांगों की अनदेखी कर रही है। यह आरोप रोहड़ू के समोली में हुए भामसं के सम्मेलन में भारतीय मजदूर संघ (भामसं) से संबद्ध जिला शिमला की विभिन्न यूनियनों, विभागों, बोर्डों, निगमों के पदाधिकारियों ने लगाए। सम्मेलन में भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश अध्यक्ष मदन राणा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। राष्ट्रीय राज्य कर्मचारी महासंघ के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष विपिन कुमार डोगरा, भामसं प्रदेश उपाध्यक्ष दिनेश शर्मा, राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य सुषमा शर्मा, आशा कार्यकर्ता संघ की प्रदेश प्रधान पुष्पा मांटा विशेष रूप से मौजूद रहे। सम्मेलन में कर्मचारियों, पेंशनरों, असंगठित श्रमिकों, मानदेय प्राप्त कर्मियों, अस्थायी एवं अंशकालिक कर्मचारियों की लंबित मांगों और समस्याओं पर चर्चा की गई। साथ ही विभिन्न वर्गों के स्थायीकरण के लिए नीति बनाए जाने की मांग को प्रमुखता से उठाया गया। संगठनों को और अधिक मजबूत बनाने तथा सरकार की कथित कर्मचारी, श्रमिक और पेंशनर विरोधी नीतियों के खिलाफ संयुक्त संघर्ष की रणनीति भी तैयार की गई। पदाधिकारियों ने कहा कि प्रदेश के कर्मचारियों और पेंशनरों को अभी तक केंद्र के समान महंगाई भत्ता नहीं मिल रहा है और वर्ष 2016 से संशोधित वेतनमानों के एरियर का भुगतान भी लंबित है। वक्ताओं ने कहा कि आठवें वेतन आयोग की चर्चा शुरू हो चुकी है, लेकिन राज्य में अभी तक पुराने लंबित मामलों का समाधान नहीं हुआ है। दो वर्षों से कर्मचारियों और पेंशनरों के मेडिकल बिलों का भुगतान नहीं होने से उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। संशोधित ग्रेच्युटी, लीव इनकैशमेंट और अन्य देयों के भुगतान में भी देरी हो रही है। विद्युत बोर्ड, परिवहन निगम तथा अन्य बोर्डों और निगमों के कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग उठाई गई।
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रोहड़ू। प्रदेश सरकार कर्मचारियों, मजदूरों, महिलाओं, पेंशनरों और श्रमिकों की मांगों की अनदेखी कर रही है। यह आरोप रोहड़ू के समोली में हुए भामसं के सम्मेलन में भारतीय मजदूर संघ (भामसं) से संबद्ध जिला शिमला की विभिन्न यूनियनों, विभागों, बोर्डों, निगमों के पदाधिकारियों ने लगाए। सम्मेलन में भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश अध्यक्ष मदन राणा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। राष्ट्रीय राज्य कर्मचारी महासंघ के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष विपिन कुमार डोगरा, भामसं प्रदेश उपाध्यक्ष दिनेश शर्मा, राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य सुषमा शर्मा, आशा कार्यकर्ता संघ की प्रदेश प्रधान पुष्पा मांटा विशेष रूप से मौजूद रहे। सम्मेलन में कर्मचारियों, पेंशनरों, असंगठित श्रमिकों, मानदेय प्राप्त कर्मियों, अस्थायी एवं अंशकालिक कर्मचारियों की लंबित मांगों और समस्याओं पर चर्चा की गई। साथ ही विभिन्न वर्गों के स्थायीकरण के लिए नीति बनाए जाने की मांग को प्रमुखता से उठाया गया। संगठनों को और अधिक मजबूत बनाने तथा सरकार की कथित कर्मचारी, श्रमिक और पेंशनर विरोधी नीतियों के खिलाफ संयुक्त संघर्ष की रणनीति भी तैयार की गई। पदाधिकारियों ने कहा कि प्रदेश के कर्मचारियों और पेंशनरों को अभी तक केंद्र के समान महंगाई भत्ता नहीं मिल रहा है और वर्ष 2016 से संशोधित वेतनमानों के एरियर का भुगतान भी लंबित है। वक्ताओं ने कहा कि आठवें वेतन आयोग की चर्चा शुरू हो चुकी है, लेकिन राज्य में अभी तक पुराने लंबित मामलों का समाधान नहीं हुआ है। दो वर्षों से कर्मचारियों और पेंशनरों के मेडिकल बिलों का भुगतान नहीं होने से उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। संशोधित ग्रेच्युटी, लीव इनकैशमेंट और अन्य देयों के भुगतान में भी देरी हो रही है। विद्युत बोर्ड, परिवहन निगम तथा अन्य बोर्डों और निगमों के कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना लागू करने की मांग उठाई गई।