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Rampur Bushahar News: ठारला में पड़ैई मेला, देव आस्था और लोक संस्कृति का दिखा संगम
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ग्रामीणों ने देवता के समक्ष नवाया शीश, सुख-समृद्धि और खुशहाली का लिया आशीर्वाद
संवाद न्यूज एजेंसी
निरमंड (कुल्लू)।
श्री खंड महादेव कैलाश की गोद में बसे चायल के ठारला में पारंपरिक पड़ैई मेला धूमधाम से मनाया गया। क्षेत्र के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने पहुंचकर मेले का लुत्फ उठाया। मेले के दौरान देव आस्था के साथ-साथ स्थानीय लोक संस्कृति और पारंपरिक रीति-रिवाजों की शानदार झलक देखने को मिली। मेले के दौरान देव दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। लोगों ने देवता के समक्ष शीश नवाकर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, खुशहाली और शांति की कामना की। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर धुनों और देव परंपराओं से जुड़े कार्यक्रमों ने मेले के माहौल को भक्तिमय बना दिया। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में मेले को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। पड़ैई मेले में बच्चों, महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। वहीं, मेला कमेटी के प्रधान संजीव ठाकुर का कहना है कि इस तरह के पारंपरिक मेले हमारी समृद्ध संस्कृति और पुरानी परंपराओं को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और रीति-रिवाजों से जोड़ने के लिए ऐसे आयोजनों का होना बेहद जरूरी है। पड़ैई मेला क्षेत्र के लोगों के लिए केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि आपसी मेलजोल और भाईचारे का भी प्रतीक है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
निरमंड (कुल्लू)।
श्री खंड महादेव कैलाश की गोद में बसे चायल के ठारला में पारंपरिक पड़ैई मेला धूमधाम से मनाया गया। क्षेत्र के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने पहुंचकर मेले का लुत्फ उठाया। मेले के दौरान देव आस्था के साथ-साथ स्थानीय लोक संस्कृति और पारंपरिक रीति-रिवाजों की शानदार झलक देखने को मिली। मेले के दौरान देव दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। लोगों ने देवता के समक्ष शीश नवाकर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, खुशहाली और शांति की कामना की। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर धुनों और देव परंपराओं से जुड़े कार्यक्रमों ने मेले के माहौल को भक्तिमय बना दिया। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में मेले को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। पड़ैई मेले में बच्चों, महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। वहीं, मेला कमेटी के प्रधान संजीव ठाकुर का कहना है कि इस तरह के पारंपरिक मेले हमारी समृद्ध संस्कृति और पुरानी परंपराओं को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और रीति-रिवाजों से जोड़ने के लिए ऐसे आयोजनों का होना बेहद जरूरी है। पड़ैई मेला क्षेत्र के लोगों के लिए केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि आपसी मेलजोल और भाईचारे का भी प्रतीक है।