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Rampur Bushahar News: परियोजना को वन भूमि लीज पर देने का ग्रामीणों ने जताया विरोध
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ग्राम सुधार कमेटी शलाटी के प्रभावित एसडीएम रामपुर को अपनी समस्याएं सुनाते हुए। संवाद
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. ग्राम सुधार कमेटी शलाटी ने एसडीएम को सौंपा ज्ञापन
पशुओं को चरागाह नहीं ले जाने दे रही कंपनी, नहरों को भी पहुंची क्षति
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। उपमंडल रामपुर की भड़ावली पंचायत में बनी 9.9 मेगावाट राजपुरा हाइड्रो परियोजना को लेकर ग्रामीणों में खासा रोष है। प्रभावितों ने ग्रामीणों की चरागाह वाली वन भूमि 40 वर्ष के लिए परियोजना को लीज पर देने का विरोध जताया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रभावितों से किए गए वादों में से एक भी परियोजना पूरा नहीं कर पाई है। वन भूमि पर जाने से भी परियोजना प्रबंधन रोक लगा रहा है, जिससे पशु पालकों की परेशानी बढ़ी हुई है। प्रभावितों के क्यार और नहर को भी नुकसान पहुंचाया गया है। भड़ावली पंचायत की ग्राम सुधार कमेटी शलाटी के प्रभावित वीरवार को एसडीएम हर्ष अमरेंद्र सिंह से मिले। समिति अध्यक्ष तिलक राज की अगुवाई में ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष समस्या रखी। ज्ञापन में कहा गया है कि 9.9 मेगावाट राजपुरा हाइड्रो प्रोजेक्ट के तहत जो भूमि राजपुरा मोहाल सभी खसरा नंबर की 40 वर्षों के लिए मैसर्ज कुंदन हाइड्रो राजपुरा प्राइवेट लिमिटेड को लीज पर दी जा रही है। उसका ग्रामीण विरोध जता रहे हैं। सभी ग्रामीणों की इस लीज को लेकर आपत्ति है। उन्होंने कहा कि इस भूमि पर ग्रामीणों की चरागाह है। इस पर ग्रामीणों के भेड़, बकरी और पशु घास चरते हैं। परियोजना प्रबंधन हमें इस भूमि में जाने नहीं दे रहा, जबकि कुछ किसानों के क्यार और नहर को भी नुकसान हुआ है और खेतीबाड़ी मुश्किल हो गई है। ग्रामीणों के खेतों का रास्ता बंद किया गया है और गेट लगाया गया है। गेट खोलने के लिए दिल्ली से मंजूरी ली जा रही है। अध्यक्ष तिलक राज ने कहा कि जब से यह परियोजना अस्तित्व में आई है, तबसे प्रभावितों को लाडा की राशि नहीं मिली और न विद्युत उत्पादन का एक प्रतिशत मिला। फसलों को हुई क्षति और प्रदूषण का मुआवजा भी लंबित पड़ा है। परियोजना निर्माण के लिए जमीन देने के बावजूद प्रभावितों को रोजगार तक नहीं दिया जा रहा। ग्रामीणों के विरोध करने पर झूठे मामले दर्ज किए जा रहे हैं। ग्रामीण बीते कई साल से परियोजना से मिलने वाले लाभ की आस लगाए हुए हैं, लेकिन अब तक कोई अदायगी नहीं हो पाई। उन्होंने प्रशासन से मांग उठाई है कि परियोजना प्रबंधन की बैठक जल्द प्रभावितों के साथ करवाई जाए। साथ ही चेताया कि यदि प्रभावितों की मांगों की जल्द सुनवाई नहीं होती है, तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा। अपने हक की लड़ाई लड़ने के लिए सभी ग्रामीण तैयार हैं। इस मौके पर पूर्व प्रधान देवेंद्र चौहान, पूर्व उपप्रधान दिनेश खमराल, संजय कायथ, राजेश चौहान, रोनू चौहान, बलवीर मेहता, राकेश कुमार, जितेंद्र मेहता, अनु कौशल, पृथ्वी राज, फकीर चंद, मनीष आजाद सहित अन्य मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। उपमंडल रामपुर की भड़ावली पंचायत में बनी 9.9 मेगावाट राजपुरा हाइड्रो परियोजना को लेकर ग्रामीणों में खासा रोष है। प्रभावितों ने ग्रामीणों की चरागाह वाली वन भूमि 40 वर्ष के लिए परियोजना को लीज पर देने का विरोध जताया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रभावितों से किए गए वादों में से एक भी परियोजना पूरा नहीं कर पाई है। वन भूमि पर जाने से भी परियोजना प्रबंधन रोक लगा रहा है, जिससे पशु पालकों की परेशानी बढ़ी हुई है। प्रभावितों के क्यार और नहर को भी नुकसान पहुंचाया गया है। भड़ावली पंचायत की ग्राम सुधार कमेटी शलाटी के प्रभावित वीरवार को एसडीएम हर्ष अमरेंद्र सिंह से मिले। समिति अध्यक्ष तिलक राज की अगुवाई में ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष समस्या रखी। ज्ञापन में कहा गया है कि 9.9 मेगावाट राजपुरा हाइड्रो प्रोजेक्ट के तहत जो भूमि राजपुरा मोहाल सभी खसरा नंबर की 40 वर्षों के लिए मैसर्ज कुंदन हाइड्रो राजपुरा प्राइवेट लिमिटेड को लीज पर दी जा रही है। उसका ग्रामीण विरोध जता रहे हैं। सभी ग्रामीणों की इस लीज को लेकर आपत्ति है। उन्होंने कहा कि इस भूमि पर ग्रामीणों की चरागाह है। इस पर ग्रामीणों के भेड़, बकरी और पशु घास चरते हैं। परियोजना प्रबंधन हमें इस भूमि में जाने नहीं दे रहा, जबकि कुछ किसानों के क्यार और नहर को भी नुकसान हुआ है और खेतीबाड़ी मुश्किल हो गई है। ग्रामीणों के खेतों का रास्ता बंद किया गया है और गेट लगाया गया है। गेट खोलने के लिए दिल्ली से मंजूरी ली जा रही है। अध्यक्ष तिलक राज ने कहा कि जब से यह परियोजना अस्तित्व में आई है, तबसे प्रभावितों को लाडा की राशि नहीं मिली और न विद्युत उत्पादन का एक प्रतिशत मिला। फसलों को हुई क्षति और प्रदूषण का मुआवजा भी लंबित पड़ा है। परियोजना निर्माण के लिए जमीन देने के बावजूद प्रभावितों को रोजगार तक नहीं दिया जा रहा। ग्रामीणों के विरोध करने पर झूठे मामले दर्ज किए जा रहे हैं। ग्रामीण बीते कई साल से परियोजना से मिलने वाले लाभ की आस लगाए हुए हैं, लेकिन अब तक कोई अदायगी नहीं हो पाई। उन्होंने प्रशासन से मांग उठाई है कि परियोजना प्रबंधन की बैठक जल्द प्रभावितों के साथ करवाई जाए। साथ ही चेताया कि यदि प्रभावितों की मांगों की जल्द सुनवाई नहीं होती है, तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा। अपने हक की लड़ाई लड़ने के लिए सभी ग्रामीण तैयार हैं। इस मौके पर पूर्व प्रधान देवेंद्र चौहान, पूर्व उपप्रधान दिनेश खमराल, संजय कायथ, राजेश चौहान, रोनू चौहान, बलवीर मेहता, राकेश कुमार, जितेंद्र मेहता, अनु कौशल, पृथ्वी राज, फकीर चंद, मनीष आजाद सहित अन्य मौजूद रहे।