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Rampur Bushahar News: महिला एजेंट को चेक बाउंस के मामले में तीन महीने का कारावास
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. अदालत ने 2.75 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया
. ऋण स्वीकृत करवाने की एवज में लिए थे 2.20 लाख
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रामपुर की अदालत ने बैंक की एक महिला एजेंट को चेक बाउंस के मामले में तीन महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 2.75 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। महिला एजेंट ने एक व्यक्ति से ऋण स्वीकृत कराने की एवज में शुल्क के रूप में 2.20 लाख रुपये लिए थे। जब वह ऋण स्वीकृत नहीं करवा सकी, तो रकम को वापस करने के लिए शिकायतकर्ता को चेक दिए, जो बाउंस हो गए। मामले का शिकायतकर्ता जगदीश कुमार रामपुर में व्यवसाय करता है। आरोपी महिला शिमला जिले के एक बैंक में एजेंट के रूप में व्यवसाय करती है। शिकायतकर्ता साल 2020 में अपने गांव में एक स्टोन क्रशर स्थापित करना चाहता था। वह बैंक से ऋण लेने का प्रयास कर रहा था। शिकायतकर्ता और महिला एजेंट के पति के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध थे। महिला ने शिकायतकर्ता को आश्वासन दिया कि वह एक फाइनेंशियल कंपनी से बैंक ऋण स्वीकृत करवा देगी। इस संबंध में महिला एजेंट ने फाइल और दस्तावेजीकरण शुल्क के रूप में 2.20 लाख रुपये लिए, लेकिन वह ऋण स्वीकृत नहीं करवा सकी। जब शिकायतकर्ता ने उक्त राशि वापस करने का अनुरोध किया, तो आरोपी ने दो चेक सौंपे, लेकिन वह बाउंस हो गए। शिकायतकर्ता ने महिला एजेंट से वह रकम मांगी, लेकिन उसने को टाल दिया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने कानूनी मांग नोटिस भेजा, लेकिन उसने फिर भी भुगतान नहीं किया। परिणामस्वरूप, यह शिकायत की गई। आरोपी ने खुद को निर्दोष बताया और ट्रायल की मांग की। अदालत ने फैसला दिया कि निष्कर्षों के आधार पर आरोपी को एनआई अधिनियम की धारा-138 के तहत किए गए अपराध के लिए दोषी ठहराया जाता है। दोषी को तीन महीने की साधारण कारावास की सजा सुनाई जाती है। इसके अलावा, दोषी को शिकायतकर्ता को 2.75 लाख रुपये की मुआवजा राशि देने का आदेश दिया जाता है।
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रामपुर बुशहर। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रामपुर की अदालत ने बैंक की एक महिला एजेंट को चेक बाउंस के मामले में तीन महीने के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 2.75 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। महिला एजेंट ने एक व्यक्ति से ऋण स्वीकृत कराने की एवज में शुल्क के रूप में 2.20 लाख रुपये लिए थे। जब वह ऋण स्वीकृत नहीं करवा सकी, तो रकम को वापस करने के लिए शिकायतकर्ता को चेक दिए, जो बाउंस हो गए। मामले का शिकायतकर्ता जगदीश कुमार रामपुर में व्यवसाय करता है। आरोपी महिला शिमला जिले के एक बैंक में एजेंट के रूप में व्यवसाय करती है। शिकायतकर्ता साल 2020 में अपने गांव में एक स्टोन क्रशर स्थापित करना चाहता था। वह बैंक से ऋण लेने का प्रयास कर रहा था। शिकायतकर्ता और महिला एजेंट के पति के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध थे। महिला ने शिकायतकर्ता को आश्वासन दिया कि वह एक फाइनेंशियल कंपनी से बैंक ऋण स्वीकृत करवा देगी। इस संबंध में महिला एजेंट ने फाइल और दस्तावेजीकरण शुल्क के रूप में 2.20 लाख रुपये लिए, लेकिन वह ऋण स्वीकृत नहीं करवा सकी। जब शिकायतकर्ता ने उक्त राशि वापस करने का अनुरोध किया, तो आरोपी ने दो चेक सौंपे, लेकिन वह बाउंस हो गए। शिकायतकर्ता ने महिला एजेंट से वह रकम मांगी, लेकिन उसने को टाल दिया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने कानूनी मांग नोटिस भेजा, लेकिन उसने फिर भी भुगतान नहीं किया। परिणामस्वरूप, यह शिकायत की गई। आरोपी ने खुद को निर्दोष बताया और ट्रायल की मांग की। अदालत ने फैसला दिया कि निष्कर्षों के आधार पर आरोपी को एनआई अधिनियम की धारा-138 के तहत किए गए अपराध के लिए दोषी ठहराया जाता है। दोषी को तीन महीने की साधारण कारावास की सजा सुनाई जाती है। इसके अलावा, दोषी को शिकायतकर्ता को 2.75 लाख रुपये की मुआवजा राशि देने का आदेश दिया जाता है।