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Sirmour News: कर्मचारियों ने कारण बताओ नोटिस को बताया दुर्भाग्यपूर्ण
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कंपनी प्रबंधन पर मानसिक उत्पीड़न के लगाए गंभीर आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
शिलाई (सिरमौर)। मेडस्वान फाउंडेशन में कार्यरत कर्मचारियों ने कंपनी की ओर से कारण बताओ नोटिस को निराधार बताते हुए प्रबंधन पर मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। 102 और 108 एंबुलेंस कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष सुनील दत्त ने बताया कि उन पर लगाए गए संस्था विरोधी गतिविधियों और कर्मचारियों को उकसाने जैसे आरोप पूरी तरह तथ्यहीन हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रबंधन ओर से यह नोटिस उन्हें व कर्मचारियों को डराने और प्रस्तावित हड़ताल को कमजोर करने की रणनीति के तहत जारी किया गया है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में 108 एवं 102 एंबुलेंस कर्मचारी यूनियन (सीटू संबद्ध) पहले ही 5 अप्रैल से 11 अप्रैल तक हड़ताल का नोटिस दे चुकी है। यूनियन के अनुसार कर्मचारियों का लंबे समय से शोषण हो रहा है। उन्हें न्यूनतम वेतन नहीं दिया जा रहा और 12-12 घंटे की ड्यूटी करवाई जा रही है।
जब कर्मचारी इन मुद्दों को उठाते हैं, तो उन्हें नोटिस देकर या अन्य तरीकों से मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें धर्मपुर स्थित मुख्य कार्यालय में विभागीय जांच के नाम पर बुलाकर दबाव बनाया जाता है। कई मामलों में तबादला या नौकरी से हटाने की कार्रवाई की जाती है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि उत्पीड़न पर तुरंत रोक लगाई जाए और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
शिलाई (सिरमौर)। मेडस्वान फाउंडेशन में कार्यरत कर्मचारियों ने कंपनी की ओर से कारण बताओ नोटिस को निराधार बताते हुए प्रबंधन पर मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। 102 और 108 एंबुलेंस कर्मचारी यूनियन के अध्यक्ष सुनील दत्त ने बताया कि उन पर लगाए गए संस्था विरोधी गतिविधियों और कर्मचारियों को उकसाने जैसे आरोप पूरी तरह तथ्यहीन हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रबंधन ओर से यह नोटिस उन्हें व कर्मचारियों को डराने और प्रस्तावित हड़ताल को कमजोर करने की रणनीति के तहत जारी किया गया है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में 108 एवं 102 एंबुलेंस कर्मचारी यूनियन (सीटू संबद्ध) पहले ही 5 अप्रैल से 11 अप्रैल तक हड़ताल का नोटिस दे चुकी है। यूनियन के अनुसार कर्मचारियों का लंबे समय से शोषण हो रहा है। उन्हें न्यूनतम वेतन नहीं दिया जा रहा और 12-12 घंटे की ड्यूटी करवाई जा रही है।
जब कर्मचारी इन मुद्दों को उठाते हैं, तो उन्हें नोटिस देकर या अन्य तरीकों से मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है। कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें धर्मपुर स्थित मुख्य कार्यालय में विभागीय जांच के नाम पर बुलाकर दबाव बनाया जाता है। कई मामलों में तबादला या नौकरी से हटाने की कार्रवाई की जाती है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि उत्पीड़न पर तुरंत रोक लगाई जाए और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए। संवाद
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