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Sirmour News: पांवटा के जंगलों में बढ़ी नई चुनौती, बाघ-मानव संघर्ष रोकना वन विभाग के लिए बड़ी परीक्षा
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-खारा के घने जंगलों में सर्दियों में डेरा डालने वाले घुमंतू गुज्जरों और पशुपालकों पर मंडरा रहा खतरा
-तीन साल में हाथियों के हमलों में दो लोगों की जा चुकी है जान, अब बाघों की मौजूदगी ने बढ़ाई चिंता
सुरेश तोमर
पांवटा साहिब (सिरमौर)। पांवटा साहिब वन मंडल के लिए अब बाघ-मानव संघर्ष को रोकना एक नई और बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। कर्नल शेर जंग नेशनल पार्क के बाद अब खारा के जंगलों में भी बाघ की मौजूदगी की पुष्टि होने से वन विभाग की चिंता बढ़ गई है। हर साल सर्दियों के दौरान खारा के घने जंगलों में घुमंतू गुज्जरों और सिरमौर के कुछ पशुपालकों के करीब आधा दर्जन अस्थायी डेरे लगते हैं। ऐसे में बाघों की सक्रियता से मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका बढ़ गई है।
वन विभाग और प्रदेश सरकार अब पांवटा क्षेत्र के जंगलों में टाइगर रिजर्व की संभावनाओं पर भी विचार कर रहे हैं। इसी सिलसिले में उत्तराखंड के राजाजी टाइगर रिजर्व से वन्यजीव विशेषज्ञों की एक टीम जल्द ही हिमाचल का दौरा कर सकती है।
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हाथियों के हमलों में जा चुकी हैं दो जानें
क्षेत्र में पहले से ही जंगली हाथियों का आतंक बना हुआ है। अप्रैल 2023 में कोलर गांव की एक बुजुर्ग महिला की हाथी के हमले में मौत हो गई थी। इसके बाद मार्च 2024 में माजरा रेंज के पानीवाला खाला क्षेत्र में हाथी के हमले में शिलाई निवासी पशुपालक तपेंद्र सिंह (45) की जान चली गई थी। इन घटनाओं के बाद से जंगलों से सटे रिहायशी इलाकों में रहने वाले लोगों में लगातार भय का माहौल बना हुआ है।
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दो अलग-अलग बाघों की मौजूदगी से बढ़ी चिंता
फरवरी 2024 में उत्तराखंड के राजाजी टाइगर रिजर्व से एक बाघ हिमाचल की सीमा में पहुंचा था, जिसकी तस्वीरें ट्रैप कैमरों में कर्नल शेर जंग नेशनल पार्क क्षेत्र में कैद हुई थीं। इसी सप्ताह खारा के जंगल में एक अन्य बाघ की मौजूदगी भी ट्रैप कैमरों के माध्यम से सामने आई है। तस्वीरों से स्पष्ट हुआ है कि दोनों बाघ अलग-अलग हैं। इससे क्षेत्र में बाघों की संख्या और उनकी गतिविधियों को लेकर वन विभाग की सक्रियता बढ़ गई है।
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चार दिन से सक्रिय है वन विभाग की टीम
वन विभाग की टीमें पिछले चार दिनों से लगातार बाघों की मौजूदगी, संख्या और उनके मूवमेंट का पता लगाने में जुटी हुई हैं। साथ ही मानव-वन्यजीव संघर्ष के संभावित प्रभावों का भी अध्ययन किया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार एक बाघ को सामान्यता 60 से 100 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की आवश्यकता होती है। हालांकि, पांवटा क्षेत्र में विकसित हो रहा नया वन्यजीव गलियारा लगभग 30 से 40 हेक्टेयर वन क्षेत्र में फैला हुआ है।
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टाइगर रिजर्व की संभावनाएं भी तलाश रहा विभाग
वन विभाग क्षेत्र में टाइगर रिजर्व विकसित करने की संभावनाओं का भी अध्ययन कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि देश के कुछ छोटे टाइगर रिजर्व, जैसे महाराष्ट्र का बोर टाइगर रिजर्व, सीमित क्षेत्र में भी सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए राजाजी टाइगर रिजर्व, उत्तराखंड के विशेषज्ञ जल्द खारा के जंगलों का निरीक्षण करेंगे।
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सुरक्षित स्थानों पर बसाए जाएंगे पशुपालकों के डेरे
पांवटा साहिब के डीएफओ वेद प्रकाश ने कहा कि बाघ-मानव संघर्ष की स्थिति से बचने के लिए हरसंभव कदम उठाए जाएंगे। सर्दियों में खारा के जंगलों में डेरा डालने वाले घुमंतू गुज्जरों और अन्य पशुपालकों को बाघों के गलियारे से दूर सुरक्षित स्थानों पर बसाने की व्यवस्था की जाएगी।
संवाद
-तीन साल में हाथियों के हमलों में दो लोगों की जा चुकी है जान, अब बाघों की मौजूदगी ने बढ़ाई चिंता
सुरेश तोमर
पांवटा साहिब (सिरमौर)। पांवटा साहिब वन मंडल के लिए अब बाघ-मानव संघर्ष को रोकना एक नई और बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। कर्नल शेर जंग नेशनल पार्क के बाद अब खारा के जंगलों में भी बाघ की मौजूदगी की पुष्टि होने से वन विभाग की चिंता बढ़ गई है। हर साल सर्दियों के दौरान खारा के घने जंगलों में घुमंतू गुज्जरों और सिरमौर के कुछ पशुपालकों के करीब आधा दर्जन अस्थायी डेरे लगते हैं। ऐसे में बाघों की सक्रियता से मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका बढ़ गई है।
वन विभाग और प्रदेश सरकार अब पांवटा क्षेत्र के जंगलों में टाइगर रिजर्व की संभावनाओं पर भी विचार कर रहे हैं। इसी सिलसिले में उत्तराखंड के राजाजी टाइगर रिजर्व से वन्यजीव विशेषज्ञों की एक टीम जल्द ही हिमाचल का दौरा कर सकती है।
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हाथियों के हमलों में जा चुकी हैं दो जानें
क्षेत्र में पहले से ही जंगली हाथियों का आतंक बना हुआ है। अप्रैल 2023 में कोलर गांव की एक बुजुर्ग महिला की हाथी के हमले में मौत हो गई थी। इसके बाद मार्च 2024 में माजरा रेंज के पानीवाला खाला क्षेत्र में हाथी के हमले में शिलाई निवासी पशुपालक तपेंद्र सिंह (45) की जान चली गई थी। इन घटनाओं के बाद से जंगलों से सटे रिहायशी इलाकों में रहने वाले लोगों में लगातार भय का माहौल बना हुआ है।
दो अलग-अलग बाघों की मौजूदगी से बढ़ी चिंता
फरवरी 2024 में उत्तराखंड के राजाजी टाइगर रिजर्व से एक बाघ हिमाचल की सीमा में पहुंचा था, जिसकी तस्वीरें ट्रैप कैमरों में कर्नल शेर जंग नेशनल पार्क क्षेत्र में कैद हुई थीं। इसी सप्ताह खारा के जंगल में एक अन्य बाघ की मौजूदगी भी ट्रैप कैमरों के माध्यम से सामने आई है। तस्वीरों से स्पष्ट हुआ है कि दोनों बाघ अलग-अलग हैं। इससे क्षेत्र में बाघों की संख्या और उनकी गतिविधियों को लेकर वन विभाग की सक्रियता बढ़ गई है।
चार दिन से सक्रिय है वन विभाग की टीम
वन विभाग की टीमें पिछले चार दिनों से लगातार बाघों की मौजूदगी, संख्या और उनके मूवमेंट का पता लगाने में जुटी हुई हैं। साथ ही मानव-वन्यजीव संघर्ष के संभावित प्रभावों का भी अध्ययन किया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार एक बाघ को सामान्यता 60 से 100 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र की आवश्यकता होती है। हालांकि, पांवटा क्षेत्र में विकसित हो रहा नया वन्यजीव गलियारा लगभग 30 से 40 हेक्टेयर वन क्षेत्र में फैला हुआ है।
टाइगर रिजर्व की संभावनाएं भी तलाश रहा विभाग
वन विभाग क्षेत्र में टाइगर रिजर्व विकसित करने की संभावनाओं का भी अध्ययन कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि देश के कुछ छोटे टाइगर रिजर्व, जैसे महाराष्ट्र का बोर टाइगर रिजर्व, सीमित क्षेत्र में भी सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए राजाजी टाइगर रिजर्व, उत्तराखंड के विशेषज्ञ जल्द खारा के जंगलों का निरीक्षण करेंगे।
सुरक्षित स्थानों पर बसाए जाएंगे पशुपालकों के डेरे
पांवटा साहिब के डीएफओ वेद प्रकाश ने कहा कि बाघ-मानव संघर्ष की स्थिति से बचने के लिए हरसंभव कदम उठाए जाएंगे। सर्दियों में खारा के जंगलों में डेरा डालने वाले घुमंतू गुज्जरों और अन्य पशुपालकों को बाघों के गलियारे से दूर सुरक्षित स्थानों पर बसाने की व्यवस्था की जाएगी।
संवाद