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Sirmour News: अदालत 6
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शिलाई क्षेत्र में कब्जे की जमीन पर
घास-पत्तियां काटने, हस्तक्षेप पर रोक
- भूमि विवाद में अदालत ने वादी को दी राहत, पड़ोसियों को विवादित जमीन पर दखल रोकने के आदेश
- मुख्य मुकदमे के निपटारे तक विवादित भूमि में प्रवेश पर रहेंगी रोक
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। भूमि विवाद के एक मामले में सिविल न्यायालय ने वादी को राहत देते हुए प्रतिवादियों पर विवादित भूमि में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने पर रोक लगा दी है। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आदेश दिया है कि मुख्य मुकदमे के अंतिम निर्णय तक प्रतिवादी न तो भूमि में प्रवेश करेंगे और न ही वहां से घास, पत्तियां अथवा अन्य वनस्पति सामग्री हटाएंगे।
मामला शिलाई क्षेत्र के एक गांव की करीब तीन बीघा भूमि से जुड़ा है। वादी बाली राम ने अदालत में दावा किया था कि वह उक्त भूमि का सह-स्वामी और कब्जाधारी है। आरोप लगाया गया कि पड़ोसी पक्ष बार-बार भूमि में घुसकर घास और पेड़ों की पत्तियां काट रहा है तथा कब्जे में दखल देने की कोशिश कर रहा है। इसके बाद न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। दूसरी ओर, प्रतिवादियों ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वास्तविक विवाद भूमि की सीमाओं को लेकर है। उनका तर्क था कि वादी अपनी भूमि की सही सीमाओं से अनभिज्ञ है और पड़ोसी भूमि को अपना बता रहा है। उन्होंने मामले के समाधान के लिए सीमांकन को आवश्यक बताया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि रिकॉर्ड में वादी का सह-स्वामित्व और कब्जा प्रथम दृष्टया परिलक्षित होता है। अदालत ने माना कि भूमि की वास्तविक सीमाओं और स्वामित्व संबंधी विवाद का अंतिम फैसला मुकदमे की सुनवाई के दौरान होगा, लेकिन फिलहाल कब्जे की सुरक्षा जरूरी है। सिविल जज ने आदेश में कहा कि प्रतिवादी विवादित भूमि में हस्तक्षेप, अतिक्रमण, बेदखली अथवा घास-पत्तियां काटने जैसी गतिविधियां नहीं करेंगे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह केवल अंतरिम राहत है और इससे मुख्य मुकदमे के गुण-दोष पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जाएगा।
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घास-पत्तियां काटने, हस्तक्षेप पर रोक
- भूमि विवाद में अदालत ने वादी को दी राहत, पड़ोसियों को विवादित जमीन पर दखल रोकने के आदेश
- मुख्य मुकदमे के निपटारे तक विवादित भूमि में प्रवेश पर रहेंगी रोक
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। भूमि विवाद के एक मामले में सिविल न्यायालय ने वादी को राहत देते हुए प्रतिवादियों पर विवादित भूमि में किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने पर रोक लगा दी है। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आदेश दिया है कि मुख्य मुकदमे के अंतिम निर्णय तक प्रतिवादी न तो भूमि में प्रवेश करेंगे और न ही वहां से घास, पत्तियां अथवा अन्य वनस्पति सामग्री हटाएंगे।
मामला शिलाई क्षेत्र के एक गांव की करीब तीन बीघा भूमि से जुड़ा है। वादी बाली राम ने अदालत में दावा किया था कि वह उक्त भूमि का सह-स्वामी और कब्जाधारी है। आरोप लगाया गया कि पड़ोसी पक्ष बार-बार भूमि में घुसकर घास और पेड़ों की पत्तियां काट रहा है तथा कब्जे में दखल देने की कोशिश कर रहा है। इसके बाद न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। दूसरी ओर, प्रतिवादियों ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वास्तविक विवाद भूमि की सीमाओं को लेकर है। उनका तर्क था कि वादी अपनी भूमि की सही सीमाओं से अनभिज्ञ है और पड़ोसी भूमि को अपना बता रहा है। उन्होंने मामले के समाधान के लिए सीमांकन को आवश्यक बताया।
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सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि रिकॉर्ड में वादी का सह-स्वामित्व और कब्जा प्रथम दृष्टया परिलक्षित होता है। अदालत ने माना कि भूमि की वास्तविक सीमाओं और स्वामित्व संबंधी विवाद का अंतिम फैसला मुकदमे की सुनवाई के दौरान होगा, लेकिन फिलहाल कब्जे की सुरक्षा जरूरी है। सिविल जज ने आदेश में कहा कि प्रतिवादी विवादित भूमि में हस्तक्षेप, अतिक्रमण, बेदखली अथवा घास-पत्तियां काटने जैसी गतिविधियां नहीं करेंगे। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह केवल अंतरिम राहत है और इससे मुख्य मुकदमे के गुण-दोष पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जाएगा।