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भक्त की रक्षा को भगवान किसी भी रूप में प्रकट हो सकते हैं : देवी चित्रलेखा
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श्रीमदभागवत कथा के दौरान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर झांकी के दौरान प्रभुल्लित होकर झूमते रहे भक्तगण
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श्रीकृष्ण के ब्रह्मांडीय रूप और कर्म-धर्म के संदेश को भी विस्तार से बताया
श्रीमद्भागवत कथा में कथावाचिका देवी चित्रलेखा को सुनने उमड़े हजारों भक्त
पांवटा साहिब के नगर परिषद खेल मैदान में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
पांवटा साहिब(सिरमौर)। श्रीमद्भागवत कथा में कथावाचिका देवी चित्रलेखा ने रविवार को कथा पाठ में भगवान श्रीराम, हिरण्यकश्यप कथा तथा भगवान श्रीकृष्ण का प्रकटोत्सव कथा पाठ किया। श्रीकृष्ण के ब्रह्मांडीय रूप और कर्म-धर्म के संदेश को भी विस्तार से बताया गया।
प्रकटोत्सव पर भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप, झांकी के साथ भजन से पूरा पंडाल ही भक्तिरस में
डूब गया। रविवार को हजारों की संख्या में उमड़े भक्तों को पंडाल कम पड़ गया। पंडाल से बाहर
बैठ कर भी हजारों भक्तों ने अंत तक श्रीमद्भागवत कथा पाठ को सुना।
गुरु की नगरी पांवटा साहिब के नगर परिषद खेल मैदान में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन चल रहा है।
श्रीधाम वृंदावन से पहुंची प्रसिद्ध कथा व्यास देवी चित्रलेखा ने श्रीमद्भागवत कथा में बृज में कृष्ण जन्मोत्सव, उद्धव के माध्यम से ज्ञान-उपदेशों को दिया। कृष्ण के ब्रह्मांडीय रूप और कर्म-धर्म के संदेश को भी विस्तार से बताया गया है। अपने कर्तव्य-पालन, आत्म-ज्ञान, निस्वार्थ कर्म और भक्ति-योग का ज्ञान दिया।
इससे पहले कथा व्यास देवी चित्रलेखा ने कहा कि श्रीमद्भागवत में हिरण्यकश्यप की कथा एक प्रमुख असुर की कहानी है, जिसने ब्रह्मा से वरदान प्राप्त कर अमर होने का प्रयास किया, लेकिन भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार की ओर से उसका वध हुआ। यह कथा पुत्र प्रह्लाद की भक्ति और अहंकार के विनाश का प्रतीक है। इसमें हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रह्लाद को भगवान विष्णु से द्वेष करने के लिए सताया, जिसके परिणामस्वरूप भगवान ने खंभे से निकलकर उसे गोधूलि वेला में, न घर के अंदर न बाहर, न मनुष्य न पशु रूप में, बल्कि नरसिंह रूप में मारा जिससे भक्ति की विजय हुई।
इस दौरान श्रीमद्भागवत के महत्व के बारे में प्रसिद्ध कथा व्यास देवी चित्रलेखा ने कथा पाठ करते हुए कहा कि यह कथा श्रीमद्भागवत पुराण के स्कंध में आती है और भक्ति, वैराग्य और भगवान की सर्वव्यापकता का एक शक्तिशाली उदाहरण है, जो यह दर्शाती है कि भक्त की रक्षा के लिए भगवान किसी भी रूप में प्रकट हो सकते हैं। सत्संग के दौरान देवी चित्रलेखा ने भजन मैंने सारे शहरी छोड़ दिये, बस तेरा सहरा बाकी है और बोलो राम-राम, बोले कृष्ण-कृष्ण समेत कई भजनों से भक्तिरस में डूबोया।
भीड़ उमड़ी पर व्यवस्था में नहीं आने दी कोई कमी
- श्री श्याम सखा मंडल सदस्यों अरविंद बंसल, मयंक महावर, अतुल गुप्ता, गौरव खापडा, रजनीश
गुप्ता, अंकित गुप्ता, अमित गोयल, अजय संसरवाल, रोहित सिंघल ने कहा कि रविवार को भक्तों की भारी
भीड़ उमड़ी।
संवाद
।।।
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श्रीमद्भागवत कथा में कथावाचिका देवी चित्रलेखा को सुनने उमड़े हजारों भक्त
पांवटा साहिब के नगर परिषद खेल मैदान में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
पांवटा साहिब(सिरमौर)। श्रीमद्भागवत कथा में कथावाचिका देवी चित्रलेखा ने रविवार को कथा पाठ में भगवान श्रीराम, हिरण्यकश्यप कथा तथा भगवान श्रीकृष्ण का प्रकटोत्सव कथा पाठ किया। श्रीकृष्ण के ब्रह्मांडीय रूप और कर्म-धर्म के संदेश को भी विस्तार से बताया गया।
प्रकटोत्सव पर भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप, झांकी के साथ भजन से पूरा पंडाल ही भक्तिरस में
डूब गया। रविवार को हजारों की संख्या में उमड़े भक्तों को पंडाल कम पड़ गया। पंडाल से बाहर
बैठ कर भी हजारों भक्तों ने अंत तक श्रीमद्भागवत कथा पाठ को सुना।
गुरु की नगरी पांवटा साहिब के नगर परिषद खेल मैदान में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन चल रहा है।
श्रीधाम वृंदावन से पहुंची प्रसिद्ध कथा व्यास देवी चित्रलेखा ने श्रीमद्भागवत कथा में बृज में कृष्ण जन्मोत्सव, उद्धव के माध्यम से ज्ञान-उपदेशों को दिया। कृष्ण के ब्रह्मांडीय रूप और कर्म-धर्म के संदेश को भी विस्तार से बताया गया है। अपने कर्तव्य-पालन, आत्म-ज्ञान, निस्वार्थ कर्म और भक्ति-योग का ज्ञान दिया।
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इससे पहले कथा व्यास देवी चित्रलेखा ने कहा कि श्रीमद्भागवत में हिरण्यकश्यप की कथा एक प्रमुख असुर की कहानी है, जिसने ब्रह्मा से वरदान प्राप्त कर अमर होने का प्रयास किया, लेकिन भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार की ओर से उसका वध हुआ। यह कथा पुत्र प्रह्लाद की भक्ति और अहंकार के विनाश का प्रतीक है। इसमें हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रह्लाद को भगवान विष्णु से द्वेष करने के लिए सताया, जिसके परिणामस्वरूप भगवान ने खंभे से निकलकर उसे गोधूलि वेला में, न घर के अंदर न बाहर, न मनुष्य न पशु रूप में, बल्कि नरसिंह रूप में मारा जिससे भक्ति की विजय हुई।
इस दौरान श्रीमद्भागवत के महत्व के बारे में प्रसिद्ध कथा व्यास देवी चित्रलेखा ने कथा पाठ करते हुए कहा कि यह कथा श्रीमद्भागवत पुराण के स्कंध में आती है और भक्ति, वैराग्य और भगवान की सर्वव्यापकता का एक शक्तिशाली उदाहरण है, जो यह दर्शाती है कि भक्त की रक्षा के लिए भगवान किसी भी रूप में प्रकट हो सकते हैं। सत्संग के दौरान देवी चित्रलेखा ने भजन मैंने सारे शहरी छोड़ दिये, बस तेरा सहरा बाकी है और बोलो राम-राम, बोले कृष्ण-कृष्ण समेत कई भजनों से भक्तिरस में डूबोया।
भीड़ उमड़ी पर व्यवस्था में नहीं आने दी कोई कमी
- श्री श्याम सखा मंडल सदस्यों अरविंद बंसल, मयंक महावर, अतुल गुप्ता, गौरव खापडा, रजनीश
गुप्ता, अंकित गुप्ता, अमित गोयल, अजय संसरवाल, रोहित सिंघल ने कहा कि रविवार को भक्तों की भारी
भीड़ उमड़ी।
संवाद
।।।

श्रीमदभागवत कथा के दौरान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर झांकी के दौरान प्रभुल्लित होकर झूमते रहे भक्तगण

श्रीमदभागवत कथा के दौरान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर झांकी के दौरान प्रभुल्लित होकर झूमते रहे भक्तगण