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ईश्वर की भक्ति से मानसिक शांति और पवित्रता करें प्राप्त : आचार्य सारस्वत
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शिव मंदिर बांगरण में आयोजित भंडारे में प्रसाद ग्रहण करते श्रद्धालु। संवाद
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बांगरण में श्रीमद्भागवत कथा समापन पर भंडारे का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
पुरुवाला (सिरमौर)। शिव मंदिर बांगरण में श्री श्री 1008 भोला जी की पुण्य तिथि पर ग्रामवासियों की ओर से आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा शनिवार को संपन्न हो गई।
समापन अवसर पर हवन यज्ञ के बाद भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें राजस्थान, हरियाणा, वृंदावन, मथुरा, हरिद्वार, देव भूमि हिमाचल- उत्तराखंड आदि कई राज्यों से संत महात्मा समेत सैकड़ों लोग शामिल हुए।
आचार्य पंडित प्रदीप सारस्वत ने बताया कि संतों के सानिध्य में गिरि परंपरा के अनुसार हजारों श्रद्धालुओं को कथा सुनने और भंडारा ग्रहण का सौभाग्य प्राप्त हुआ। आचार्य ने समाज में प्रेम, सौहार्द और चरित्र निर्माण का संदेश दिया। युवाओं को व्यसनों से दूर रहकर भारतीय संस्कृति, नैतिकता और आत्म-संयम अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने जीवन में काम, क्रोध और लालच से दूर रहकर ईश्वर की भक्ति के माध्यम से मानसिक शांति और पवित्रता प्राप्त करने को कहा।
सात दिवसीय इस धार्मिक अनुष्ठान में भगवान कृष्ण की रासलीला, कंस वध और सुदामा चरित्र के प्रसंगों का वर्णन कर भक्तों को ज्ञान व भक्ति का अमृत पान कराया गया। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
पुरुवाला (सिरमौर)। शिव मंदिर बांगरण में श्री श्री 1008 भोला जी की पुण्य तिथि पर ग्रामवासियों की ओर से आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा शनिवार को संपन्न हो गई।
समापन अवसर पर हवन यज्ञ के बाद भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें राजस्थान, हरियाणा, वृंदावन, मथुरा, हरिद्वार, देव भूमि हिमाचल- उत्तराखंड आदि कई राज्यों से संत महात्मा समेत सैकड़ों लोग शामिल हुए।
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आचार्य पंडित प्रदीप सारस्वत ने बताया कि संतों के सानिध्य में गिरि परंपरा के अनुसार हजारों श्रद्धालुओं को कथा सुनने और भंडारा ग्रहण का सौभाग्य प्राप्त हुआ। आचार्य ने समाज में प्रेम, सौहार्द और चरित्र निर्माण का संदेश दिया। युवाओं को व्यसनों से दूर रहकर भारतीय संस्कृति, नैतिकता और आत्म-संयम अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने जीवन में काम, क्रोध और लालच से दूर रहकर ईश्वर की भक्ति के माध्यम से मानसिक शांति और पवित्रता प्राप्त करने को कहा।
सात दिवसीय इस धार्मिक अनुष्ठान में भगवान कृष्ण की रासलीला, कंस वध और सुदामा चरित्र के प्रसंगों का वर्णन कर भक्तों को ज्ञान व भक्ति का अमृत पान कराया गया। संवाद
