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Sirmour News: चेक बाउंस मामले में दोषी की सजा बरकरार
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अदालत ने कहा - 1.71 लाख रुपये लौटाने का दावा साबित नहीं कर सका आरोपी
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने एनआई अधिनियम के तहत चेक बाउंस से जुड़े मामले में पांवटा साहिब निवासी आरोपी संगत सिंह की अपील खारिज कर दी है। अदालत ने निचली अदालत की ओर से सुनाई गई दोषसिद्धि और सजा के आदेश को बरकरार रखा है।
मामला वर्ष 2017 का है। शिकायतकर्ता अमित गुप्ता ने आरोप लगाया था कि संगत सिंह ने 21 जुलाई को उससे 2.85 लाख रुपये उधार लिए थे। रकम लौटाने के लिए आरोपी की ओर से दिया गया चेक बैंक में प्रस्तुत करने पर पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण बाउंस हो गया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने आरोपी को कानूनी नोटिस भेजकर रकम लौटाने की मांग की, लेकिन भुगतान न होने पर मामला अदालत पहुंचा।
ट्रायल कोर्ट ने 30 दिसंबर 2024 को आरोपी को दोषी ठहराते हुए एक साल के कारावास और पीड़ित पक्ष को 4.85 लाख रुपये मुआवजा देने की सजा सुनाई थी। आरोपी ने इस फैसले के खिलाफ अपील दायर की। बचाव पक्ष ने दलील दी कि चेक सुरक्षा के तौर पर दिया गया था और आरोपी 1.71 लाख रुपये पहले ही चुका चुका था। इसके समर्थन में बैंक खाते का विवरण भी पेश किया गया।
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अदालत ने पाया कि आरोपी अपने इस दावे को विश्वसनीय तरीके से साबित नहीं कर सका कि उसने 1.71 लाख रुपये की रकम वापस कर दी थी। बैंक खाते के विवरण को भी वैधानिक प्रमाणपत्र के अभाव में स्वीकार्य साक्ष्य नहीं माना गया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने एनआई अधिनियम के तहत चेक बाउंस से जुड़े मामले में पांवटा साहिब निवासी आरोपी संगत सिंह की अपील खारिज कर दी है। अदालत ने निचली अदालत की ओर से सुनाई गई दोषसिद्धि और सजा के आदेश को बरकरार रखा है।
मामला वर्ष 2017 का है। शिकायतकर्ता अमित गुप्ता ने आरोप लगाया था कि संगत सिंह ने 21 जुलाई को उससे 2.85 लाख रुपये उधार लिए थे। रकम लौटाने के लिए आरोपी की ओर से दिया गया चेक बैंक में प्रस्तुत करने पर पर्याप्त राशि नहीं होने के कारण बाउंस हो गया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने आरोपी को कानूनी नोटिस भेजकर रकम लौटाने की मांग की, लेकिन भुगतान न होने पर मामला अदालत पहुंचा।
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ट्रायल कोर्ट ने 30 दिसंबर 2024 को आरोपी को दोषी ठहराते हुए एक साल के कारावास और पीड़ित पक्ष को 4.85 लाख रुपये मुआवजा देने की सजा सुनाई थी। आरोपी ने इस फैसले के खिलाफ अपील दायर की। बचाव पक्ष ने दलील दी कि चेक सुरक्षा के तौर पर दिया गया था और आरोपी 1.71 लाख रुपये पहले ही चुका चुका था। इसके समर्थन में बैंक खाते का विवरण भी पेश किया गया।
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अदालत ने पाया कि आरोपी अपने इस दावे को विश्वसनीय तरीके से साबित नहीं कर सका कि उसने 1.71 लाख रुपये की रकम वापस कर दी थी। बैंक खाते के विवरण को भी वैधानिक प्रमाणपत्र के अभाव में स्वीकार्य साक्ष्य नहीं माना गया।