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Sirmour News: अदालत
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अवैध लकड़ी तस्करी का मामला :
पिकअप वाहन छोड़ने से इन्कार, अदालत ने
अपराध मामले में मालिक की अपील को किया खारिज
-6 अक्तूबर 2022 को अंतरराज्यीय चेक पोस्ट बहराल का मामला
-वाहन से बरामद की थी 104 चीड़ की लकड़ी और 10 क्विंटल जलाऊ लकड़ी
- अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने 5 अप्रैल 2025 को वन विभाग के आदेश को ठहराया सही
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। अवैध वन उत्पाद परिवहन के मामले में करीब तीन साल पहले पकड़े गए पिकअप वाहन को सुपुर्दगी पर छोड़ने से अदालत ने इन्कार कर दिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कपिल शर्मा ने वाहन मालिक इनाम अली की अपील को खारिज करते हुए वन विभाग के 5 अप्रैल 2025 के आदेश को सही ठहराया।
यह मामला 6 अक्तूबर 2022 को अंतरराज्यीय चेक पोस्ट बहराल का है। वन विभाग की टीम ने एक पिकअप वाहन को जांच के दौरान रोका था। जांच के दौरान वाहन में कागजों में दर्शाई गई चौखट गुटका और सिल लकड़ी के बजाय चीड़ की लकड़ी पाई गई। चालक इसके परिवहन के लिए कोई वैध दस्तावेज (परमिट व ट्रांजिट पास) प्रस्तुत नहीं कर सका। इसमें बिना हथौड़ा (संपत्ति चिह्न ) निशान वाली 104 कड़ियां चीड़ की आरीशुदा लकड़ी और 10 क्विंटल जलाऊ लकड़ी बरामद की गई थी।
इसके बाद वन विभाग की टीम ने वाहन और लकड़ी को जब्त कर लिया। वन विभाग ने भारतीय वन अधिनियम के तहत जब्ती (कन्फिस्केशन) की कार्रवाई शुरू की थी। अप्रैल 2025 में वाहन मालिक ने अधिकृत अधिकारी-सह-डीएफओ के समक्ष वाहन रिलीज की अर्जी दाखिल की थी, जिसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद अदालत में अपील दायर की गई। अब अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि जब्ती प्रक्रिया पूरी होने से पहले वाहन छोड़ना उचित नहीं है। इससे कानून का उद्देश्य प्रभावित हो सकता है।
हालांकि, अदालत ने वन विभाग को निर्देश दिए कि जब्ती से संबंधित लंबित कार्यवाही एक माह के भीतर पूरा की जाए, ताकि अनावश्यक देरी से वाहन मालिक को नुकसान न हो।
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फर्जी बिल का आरोप
जांच के दौरान बिल जारी करने वाले आरा मिल के कागजात संदिग्ध पाए गए। वास्तविक सामग्री से मेल नहीं थी। यह भी सामने आया कि पिकअप वाहन से चीड़ की लकड़ी का परिवहन किया जा रहा था, जबकि कागजों में लकड़ी का गलत विवरण दर्ज था। यह लकड़ियां पांवटा क्षेत्र स्थित एक निजी आरा मिल से लोड करवाई गई थी। सप्लाई हरियाणा के यमुनानगर की जानी थी।
संवाद
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पिकअप वाहन छोड़ने से इन्कार, अदालत ने
अपराध मामले में मालिक की अपील को किया खारिज
-6 अक्तूबर 2022 को अंतरराज्यीय चेक पोस्ट बहराल का मामला
-वाहन से बरामद की थी 104 चीड़ की लकड़ी और 10 क्विंटल जलाऊ लकड़ी
- अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने 5 अप्रैल 2025 को वन विभाग के आदेश को ठहराया सही
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। अवैध वन उत्पाद परिवहन के मामले में करीब तीन साल पहले पकड़े गए पिकअप वाहन को सुपुर्दगी पर छोड़ने से अदालत ने इन्कार कर दिया है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कपिल शर्मा ने वाहन मालिक इनाम अली की अपील को खारिज करते हुए वन विभाग के 5 अप्रैल 2025 के आदेश को सही ठहराया।
यह मामला 6 अक्तूबर 2022 को अंतरराज्यीय चेक पोस्ट बहराल का है। वन विभाग की टीम ने एक पिकअप वाहन को जांच के दौरान रोका था। जांच के दौरान वाहन में कागजों में दर्शाई गई चौखट गुटका और सिल लकड़ी के बजाय चीड़ की लकड़ी पाई गई। चालक इसके परिवहन के लिए कोई वैध दस्तावेज (परमिट व ट्रांजिट पास) प्रस्तुत नहीं कर सका। इसमें बिना हथौड़ा (संपत्ति चिह्न ) निशान वाली 104 कड़ियां चीड़ की आरीशुदा लकड़ी और 10 क्विंटल जलाऊ लकड़ी बरामद की गई थी।
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इसके बाद वन विभाग की टीम ने वाहन और लकड़ी को जब्त कर लिया। वन विभाग ने भारतीय वन अधिनियम के तहत जब्ती (कन्फिस्केशन) की कार्रवाई शुरू की थी। अप्रैल 2025 में वाहन मालिक ने अधिकृत अधिकारी-सह-डीएफओ के समक्ष वाहन रिलीज की अर्जी दाखिल की थी, जिसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद अदालत में अपील दायर की गई। अब अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि जब्ती प्रक्रिया पूरी होने से पहले वाहन छोड़ना उचित नहीं है। इससे कानून का उद्देश्य प्रभावित हो सकता है।
हालांकि, अदालत ने वन विभाग को निर्देश दिए कि जब्ती से संबंधित लंबित कार्यवाही एक माह के भीतर पूरा की जाए, ताकि अनावश्यक देरी से वाहन मालिक को नुकसान न हो।
फर्जी बिल का आरोप
जांच के दौरान बिल जारी करने वाले आरा मिल के कागजात संदिग्ध पाए गए। वास्तविक सामग्री से मेल नहीं थी। यह भी सामने आया कि पिकअप वाहन से चीड़ की लकड़ी का परिवहन किया जा रहा था, जबकि कागजों में लकड़ी का गलत विवरण दर्ज था। यह लकड़ियां पांवटा क्षेत्र स्थित एक निजी आरा मिल से लोड करवाई गई थी। सप्लाई हरियाणा के यमुनानगर की जानी थी।
संवाद
