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मामला गंभीर हो तो सरकार को पहले नोटिस देना जरूरी नहीं: अदालत

Tue, 30 Jun 2026 11:58 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 30 Jun 2026 11:58 PM IST
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court news 3
अदालत
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-सिविल जज अंशुल मलिक की अदालत ने सीपीसी की धारा 80(2) के तहत याचिकाकर्ता को दी बड़ी राहत

संपत्ति तोड़ने और बेदखल करने की धमकी के खिलाफ दायर याचिका को माना अति-आवश्यक

संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए याचिकाकर्ता को बिना नोटिस दिए सरकार के खिलाफ सीधा मुकदमा चलाने की अनुमति दी है। यह महत्वपूर्ण व्यवस्था नाहन के सिविल जज अंशुल मलिक की अदालत ने हरीचंद बनाम हिमाचल प्रदेश सरकार और अन्य मामले की सुनवाई के दौरान दी। अदालत ने कहा कि यदि किसी मामले की प्रकृति अति-आवश्यक हो और देरी होने से न्याय का उद्देश्य ही विफल होने का खतरा हो, तो सरकार या उसके अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दायर करने से पहले वैधानिक नोटिस देना अनिवार्य नहीं है।
याचिकाकर्ता हरीचंद ने हिमाचल प्रदेश सरकार और अन्य संबंधित विभागों के खिलाफ स्थायी निषेधाज्ञा का एक मुकदमा दायर करने के लिए नागरिक प्रक्रिया संहिता की धारा 80(2) के तहत अदालत में आवेदन किया था। हरीचंद के वकील ने दलील दी कि प्रतिवादी (सरकारी अधिकारी) याचिकाकर्ता को उसकी मिल्कियत वाली जमीन से अवैध रूप से बेदखल करने और उसकी संपत्ति को ध्वस्त करने की धमकियां दे रहे हैं। मामला बेहद गंभीर और आपातकालीन प्रकृति का है, इसलिए तत्काल कानूनी संरक्षण की आवश्यकता है।
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दूसरी तरफ, सरकार की ओर से पेश सहायक जिला न्यायवादी ने इस आवेदन का कड़ा विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि यह आवेदन सुनवाई योग्य नहीं है और मामले में ऐसी कोई तात्कालिकता नहीं है जिसके लिए निर्धारित प्रक्रिया को टाला जाए। इसलिए इस अर्जी को खारिज किया जाना चाहिए।
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अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड का गहन अध्ययन करने के बाद पाया कि मामला वाकई बेहद गंभीर और त्वरित राहत की श्रेणी का है। सिविल जज अंशुल मलिक ने अपने आदेश में कहा कि चूंकि मामला आपातकालीन प्रकृति का है, इसलिए यदि याचिकाकर्ता को धारा 80(2) के तहत सरकार को औपचारिक नोटिस भेजने के लिए बाध्य किया गया, तो मुकदमा दायर करने का मूल उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा। अदालत ने न्याय के सिद्धांत को सर्वोपरि रखते हुए हरीचंद के आवेदन को स्वीकार कर लिया और बिना सरकारी नोटिस के मुकदमा दर्ज करने की मंजूरी दे दी।----
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