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Sirmour News: ससुर के निधन के कारण अदालत न पहुंच पाए प्रतिवादी को कोर्ट ने दी राहत
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अदालत 2
ससुर के निधन के कारण अदालत न पहुंच पाए प्रतिवादी को कोर्ट ने दी राहत
नाहन (सिरमौर)। ससुर के निधन के कारण अदालत न पहुंच पाए प्रतिवादी को राहत दी गई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कोर्ट का काम पार्टियों को उनकी गलतियों के लिए फटकार लगाना या प्रताड़ित करना नहीं है।
न्यायालय में गुमान सिंह बनाम रवि चौहान नाम से एक दीवानी मामला लंबित है। अदालत ने इस मामले में 15 सितंबर 2025 को प्रतिवादी रवि चौहान के खिलाफ अदालत में पेश न होने के कारण एकतरफा कार्रवाई का आदेश जारी कर दिया था। इस आदेश के खिलाफ प्रतिवादी ने अदालत में धारा 151 और आदेश 9 नियम 7 सीपीसी के तहत आवेदन दायर कर एकतरफा आदेश को रद्द करने की गुहार लगाई थी। प्रतिवादी रवि चौहान ने अपने आवेदन में दलील दी थी कि 15 सितंबर 2025 को उनके ससुर का आकस्मिक निधन हो गया था, जिसके कारण वह जवाब दाखिल करने के लिए अदालत में उपस्थित नहीं हो सके थे।
उनका कोर्ट में न आना जानबूझकर नहीं था। इसके बाद उन्होंने जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण नाहन से कानूनी सहायता के लिए आवेदन किया, जिसके बाद एडवोकेट लीगल एड काउंसिल नियुक्त किया गया। दूसरी ओर वादी गुमान सिंह के वकील ने इस आवेदन का विरोध करते हुए तर्क दिया था कि प्रतिवादी जानबूझकर मामले को लटकाने के लिए अदालत में उपस्थित नहीं हुआ था और इस अर्जी को खारिज किया जाना चाहिए।
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अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड का बारीकी से अवलोकन करने के बाद प्रतिवादी के प्रति उदार दृष्टिकोण अपनाया। अदालत ने न्याय के हित में प्रतिवादी के आवेदन को स्वीकार करते हुए 15 सितंबर 2025 के एकतरफा आदेश को रद्द कर दिया और रवि चौहान को प्रतिवादी के रूप में उनकी मूल स्थिति में बहाल कर दिया। अब इस मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई 2026 को होगी, जिसमें प्रतिवादी को अपना लिखित जवाब दाखिल करना होगा।-- -- -- -- -- -- -- -
संवाद
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ससुर के निधन के कारण अदालत न पहुंच पाए प्रतिवादी को कोर्ट ने दी राहत
नाहन (सिरमौर)। ससुर के निधन के कारण अदालत न पहुंच पाए प्रतिवादी को राहत दी गई है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कोर्ट का काम पार्टियों को उनकी गलतियों के लिए फटकार लगाना या प्रताड़ित करना नहीं है।
न्यायालय में गुमान सिंह बनाम रवि चौहान नाम से एक दीवानी मामला लंबित है। अदालत ने इस मामले में 15 सितंबर 2025 को प्रतिवादी रवि चौहान के खिलाफ अदालत में पेश न होने के कारण एकतरफा कार्रवाई का आदेश जारी कर दिया था। इस आदेश के खिलाफ प्रतिवादी ने अदालत में धारा 151 और आदेश 9 नियम 7 सीपीसी के तहत आवेदन दायर कर एकतरफा आदेश को रद्द करने की गुहार लगाई थी। प्रतिवादी रवि चौहान ने अपने आवेदन में दलील दी थी कि 15 सितंबर 2025 को उनके ससुर का आकस्मिक निधन हो गया था, जिसके कारण वह जवाब दाखिल करने के लिए अदालत में उपस्थित नहीं हो सके थे।
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उनका कोर्ट में न आना जानबूझकर नहीं था। इसके बाद उन्होंने जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण नाहन से कानूनी सहायता के लिए आवेदन किया, जिसके बाद एडवोकेट लीगल एड काउंसिल नियुक्त किया गया। दूसरी ओर वादी गुमान सिंह के वकील ने इस आवेदन का विरोध करते हुए तर्क दिया था कि प्रतिवादी जानबूझकर मामले को लटकाने के लिए अदालत में उपस्थित नहीं हुआ था और इस अर्जी को खारिज किया जाना चाहिए।
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अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड का बारीकी से अवलोकन करने के बाद प्रतिवादी के प्रति उदार दृष्टिकोण अपनाया। अदालत ने न्याय के हित में प्रतिवादी के आवेदन को स्वीकार करते हुए 15 सितंबर 2025 के एकतरफा आदेश को रद्द कर दिया और रवि चौहान को प्रतिवादी के रूप में उनकी मूल स्थिति में बहाल कर दिया। अब इस मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई 2026 को होगी, जिसमें प्रतिवादी को अपना लिखित जवाब दाखिल करना होगा।
संवाद