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Sirmour News: अदालत 3
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जमीन कब्जा मामले में अपील मंजूर,
निचली अदालत का फैसला किया रद्द
- अदालत ने मामले को वापस ट्रायल कोर्ट भेजा, पक्षकारों को 11 फरवरी को उपस्थित होने के आदेश
- साल 2013 का मामला, जून 2025 को वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश ने प्रतिवादी के हक में सुनाया था फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। जमीन कब्जा विवाद से जुड़े दीवानी मामले में अतिरिक्त जिला न्यायाधीश ने निचली अदालत के पारित पूर्व निर्णय व डिक्री को निरस्त करते हुए मामला दोबारा सुनवाई के लिए ट्रायल कोर्ट भेज दिया है। यह मामला साल 2013 में कैलाश चंद बनाम रामपाल का है।
आवेदक रामपाल ने वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश, पांवटा साहिब के 18 जून 2025 के निर्णय को चुनौती दी गई थी। उक्त निर्णय में कैलाश चंद व अन्य के पक्ष में भूमि कब्जा संबंधी वाद डिक्री किया गया था। अपील में तर्क दिया गया कि ट्रायल कोर्ट ने सीमांकन रिपोर्ट के आधार पर फैसला दिया। साथ ही रिपोर्ट की वैधता व प्रक्रिया पर आपत्तियां थीं। वहीं प्रतिवादी पक्ष ने पूर्व निर्णय को सही ठहराया।
सुनवाई के दौरान अदालत के संज्ञान में आया कि मामले के एक प्रतिवादी की ट्रायल के दौरान ही मृत्यु हो चुकी थी, लेकिन उनके कानूनी वारिसों को पक्षकार बनाए बिना ही निचली अदालत ने फैसला सुना दिया। अदालत ने इसे गंभीर कानूनी त्रुटि मानते हुए कहा कि मृत व्यक्ति के विरुद्ध पारित निर्णय विधि अनुसार शून्य माना जाएगा।
इसी आधार पर पूर्व फैसला व डिक्री रद्द कर दी गई। अदालत ने मामले को ट्रायल कोर्ट को वापस भेजते हुए निर्देश दिए कि मृत प्रतिवादी के कानूनी वारिसों को पक्षकार बनाकर वाद की दोबारा सुनवाई की जाए। साथ ही पक्षकारों को 11 फरवरी 2026 को निचली अदालत में उपस्थित होने के आदेश दिए गए। संवाद
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निचली अदालत का फैसला किया रद्द
- अदालत ने मामले को वापस ट्रायल कोर्ट भेजा, पक्षकारों को 11 फरवरी को उपस्थित होने के आदेश
- साल 2013 का मामला, जून 2025 को वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश ने प्रतिवादी के हक में सुनाया था फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। जमीन कब्जा विवाद से जुड़े दीवानी मामले में अतिरिक्त जिला न्यायाधीश ने निचली अदालत के पारित पूर्व निर्णय व डिक्री को निरस्त करते हुए मामला दोबारा सुनवाई के लिए ट्रायल कोर्ट भेज दिया है। यह मामला साल 2013 में कैलाश चंद बनाम रामपाल का है।
आवेदक रामपाल ने वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश, पांवटा साहिब के 18 जून 2025 के निर्णय को चुनौती दी गई थी। उक्त निर्णय में कैलाश चंद व अन्य के पक्ष में भूमि कब्जा संबंधी वाद डिक्री किया गया था। अपील में तर्क दिया गया कि ट्रायल कोर्ट ने सीमांकन रिपोर्ट के आधार पर फैसला दिया। साथ ही रिपोर्ट की वैधता व प्रक्रिया पर आपत्तियां थीं। वहीं प्रतिवादी पक्ष ने पूर्व निर्णय को सही ठहराया।
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सुनवाई के दौरान अदालत के संज्ञान में आया कि मामले के एक प्रतिवादी की ट्रायल के दौरान ही मृत्यु हो चुकी थी, लेकिन उनके कानूनी वारिसों को पक्षकार बनाए बिना ही निचली अदालत ने फैसला सुना दिया। अदालत ने इसे गंभीर कानूनी त्रुटि मानते हुए कहा कि मृत व्यक्ति के विरुद्ध पारित निर्णय विधि अनुसार शून्य माना जाएगा।
इसी आधार पर पूर्व फैसला व डिक्री रद्द कर दी गई। अदालत ने मामले को ट्रायल कोर्ट को वापस भेजते हुए निर्देश दिए कि मृत प्रतिवादी के कानूनी वारिसों को पक्षकार बनाकर वाद की दोबारा सुनवाई की जाए। साथ ही पक्षकारों को 11 फरवरी 2026 को निचली अदालत में उपस्थित होने के आदेश दिए गए। संवाद