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Sirmour News: अदालत 4 ..
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चेक बाउंस में आरोपी को झटका,
फॉरेंसिक जांच की मांग खारिज
- कोर्ट बोली, हस्ताक्षर मान चुके हैं आरोपी, जांच से नहीं पड़ेगा केस पर असर
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)।
चेक बाउंस मामले में आरोपी को अदालत से बड़ा झटका लगा है। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आरोपी की दायर उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें विवादित चेक को फॉरेंसिक लैब भेजकर हस्तलेखन, हस्ताक्षर और स्याही की जांच कराने की मांग की गई थी।
यह मामला साल 2020 में रामलाल बनाम अत्तर सिंह का है। अदालत में आरोपी ने दलील दी थी कि उसने चेक खाली साइन कर एक व्यक्ति को व्यावसायिक लेनदेन के लिए दिया था। इसका बाद में गलत इस्तेमाल किया गया। आरोपी के अनुसार चेक में तारीख, राशि और नाम उसकी जानकारी के बिना भरे गए। इसलिए फॉरेंसिक जांच जरूरी है, वहीं शिकायतकर्ता ने दलील का विरोध करते हुए कहा कि चेक के अन्य विवरण भरने का मुद्दा अप्रासंगिक है।
अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद स्पष्ट किया कि आरोपी ने चेक पर अपने हस्ताक्षर कभी नहीं नकारे हैं। कानून के तहत ऐसी स्थिति में आरोपी के खिलाफ देनदारी की धारणा बनती है। अदालत ने कहा कि यदि चेक के अन्य विवरण बाद में भरे भी गए हों, तब भी इससे कर्ज की वैधता पर कोई असर नहीं पड़ता। कोर्ट ने यह भी माना कि फॉरेंसिक जांच से आरोपी की कोई ठोस कानूनी मदद नहीं होगी और इससे मामले के मूल मुद्दे कर्ज और देनदारी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसी आधार पर अदालत ने आवेदन को खारिज करते हुए मामले को 29 अप्रैल 2026 के लिए सूचीबद्ध किया है। अदालत ने साफ किया कि अगली तारीख पर साक्ष्य न देने पर अवसर समाप्त कर दिया जाएगा।
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फॉरेंसिक जांच की मांग खारिज
- कोर्ट बोली, हस्ताक्षर मान चुके हैं आरोपी, जांच से नहीं पड़ेगा केस पर असर
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)।
चेक बाउंस मामले में आरोपी को अदालत से बड़ा झटका लगा है। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आरोपी की दायर उस अर्जी को खारिज कर दिया, जिसमें विवादित चेक को फॉरेंसिक लैब भेजकर हस्तलेखन, हस्ताक्षर और स्याही की जांच कराने की मांग की गई थी।
यह मामला साल 2020 में रामलाल बनाम अत्तर सिंह का है। अदालत में आरोपी ने दलील दी थी कि उसने चेक खाली साइन कर एक व्यक्ति को व्यावसायिक लेनदेन के लिए दिया था। इसका बाद में गलत इस्तेमाल किया गया। आरोपी के अनुसार चेक में तारीख, राशि और नाम उसकी जानकारी के बिना भरे गए। इसलिए फॉरेंसिक जांच जरूरी है, वहीं शिकायतकर्ता ने दलील का विरोध करते हुए कहा कि चेक के अन्य विवरण भरने का मुद्दा अप्रासंगिक है।
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अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद स्पष्ट किया कि आरोपी ने चेक पर अपने हस्ताक्षर कभी नहीं नकारे हैं। कानून के तहत ऐसी स्थिति में आरोपी के खिलाफ देनदारी की धारणा बनती है। अदालत ने कहा कि यदि चेक के अन्य विवरण बाद में भरे भी गए हों, तब भी इससे कर्ज की वैधता पर कोई असर नहीं पड़ता। कोर्ट ने यह भी माना कि फॉरेंसिक जांच से आरोपी की कोई ठोस कानूनी मदद नहीं होगी और इससे मामले के मूल मुद्दे कर्ज और देनदारी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसी आधार पर अदालत ने आवेदन को खारिज करते हुए मामले को 29 अप्रैल 2026 के लिए सूचीबद्ध किया है। अदालत ने साफ किया कि अगली तारीख पर साक्ष्य न देने पर अवसर समाप्त कर दिया जाएगा।

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