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Sirmour News: राज्यव्यापी हड़ताल में सिरमौर से सैकड़ों मिड-डे-मील वर्कर लेंगे भाग
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नाहन में बैठक कर प्रदेश सरकार पर लगाया लगातार शोषण का आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। मिड-डे-मील वर्कर्स यूनियन सुरला ब्लॉक की बैठक नसीम की अध्यक्षता में हुई। सीटू जिला महासचिव आशीष कुमार, मिड-डे-मील सुरला ब्लॉक सचिव अमरनाथ, मोती राम सहित बड़ी संख्या में मिड-डे-मील वर्करों ने बैठक में भाग लिया। सीटू जिला महासचिव आशीष कुमार ने कहा कि 22 जून को होने वाली राज्यव्यापी हड़ताल में जिला सिरमौर से सैकड़ों मिड-डे-मील वर्कर भाग लेंगे और अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करेंगे।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार मिड-डे-मील वर्करों का लगातार शोषण कर रही है। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय की ओर से 10 माह के स्थान पर 12 माह का मानदेय देने के आदेश दिए जाने के बावजूद आज तक इस निर्णय को लागू नहीं किया गया है। इसके लिए पूर्व की भाजपा सरकार तथा वर्तमान कांग्रेस सरकार दोनों जिम्मेदार हैं।
वक्ताओं ने कहा कि मिड-डे-मील वर्करों को समय पर मानदेय नहीं मिलता और बेहद कम है तथा उन्हें सामाजिक सुरक्षा के अधिकारों से भी वंचित रखा गया है। यूनियन ने मांग की कि उच्च न्यायालय के आदेश को तुरंत लागू किया जाए। 12 माह का मानदेय दिया जाए। हरियाणा की तर्ज पर मानदेय बढ़ाया जाए और सभी मिड-डे-मील वर्करों को श्रमिक का दर्जा देकर ईपीएफ, ईएसआई, ग्रेच्युटी एवं अन्य श्रम कानूनों के दायरे में लाया जाए।
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बैठक में रोशनी, तारा, सुरेश, लीला, बबीता, मीरा सहित दर्जनों मिड-डे-मील वर्करों ने भाग लिया।
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। मिड-डे-मील वर्कर्स यूनियन सुरला ब्लॉक की बैठक नसीम की अध्यक्षता में हुई। सीटू जिला महासचिव आशीष कुमार, मिड-डे-मील सुरला ब्लॉक सचिव अमरनाथ, मोती राम सहित बड़ी संख्या में मिड-डे-मील वर्करों ने बैठक में भाग लिया। सीटू जिला महासचिव आशीष कुमार ने कहा कि 22 जून को होने वाली राज्यव्यापी हड़ताल में जिला सिरमौर से सैकड़ों मिड-डे-मील वर्कर भाग लेंगे और अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करेंगे।
उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार मिड-डे-मील वर्करों का लगातार शोषण कर रही है। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय की ओर से 10 माह के स्थान पर 12 माह का मानदेय देने के आदेश दिए जाने के बावजूद आज तक इस निर्णय को लागू नहीं किया गया है। इसके लिए पूर्व की भाजपा सरकार तथा वर्तमान कांग्रेस सरकार दोनों जिम्मेदार हैं।
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वक्ताओं ने कहा कि मिड-डे-मील वर्करों को समय पर मानदेय नहीं मिलता और बेहद कम है तथा उन्हें सामाजिक सुरक्षा के अधिकारों से भी वंचित रखा गया है। यूनियन ने मांग की कि उच्च न्यायालय के आदेश को तुरंत लागू किया जाए। 12 माह का मानदेय दिया जाए। हरियाणा की तर्ज पर मानदेय बढ़ाया जाए और सभी मिड-डे-मील वर्करों को श्रमिक का दर्जा देकर ईपीएफ, ईएसआई, ग्रेच्युटी एवं अन्य श्रम कानूनों के दायरे में लाया जाए।
बैठक में रोशनी, तारा, सुरेश, लीला, बबीता, मीरा सहित दर्जनों मिड-डे-मील वर्करों ने भाग लिया।