सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Sirmour News ›   Difficulties mount due to the ban on dispensing petrol and diesel in bottles and cans at petrol pumps.

Sirmour News: पेट्रोल पंपों पर बोतल व कैन में पेट्रोल-डीजल देने पर प्रतिबंध से बढ़ी मुश्किलें

Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Sun, 14 Jun 2026 11:55 PM IST
विज्ञापन
Difficulties mount due to the ban on dispensing petrol and diesel in bottles and cans at petrol pumps.
किसान अजय ठाकुर।
विज्ञापन
फसल बुआई का समय सिर पर, पेट्रोल-डीजल के लिए भटक रहे किसान

ग्रामीण क्षेत्रों के किसान प्रभावित, वाहन चालकों से कर रहे तेल के लिए मिन्नतें


चंद्र ठाकुर

नाहन (सिरमौर)। केंद्र सरकार की ओर से पेट्रोल और डीजल की राशनिंग व पाबंदी को लेकर जारी नए निर्देशों ने जिला सिरमौर के किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी है। केंद्र के इन कड़े नियमों को प्रदेश में भी लागू कर दिया गया है। इसके तहत अब स्थानीय पेट्रोल पंपों पर खुली बोतल, कैन या ड्रम में तेल देने पर रोक लगा दी गई है। सरकार के इस फैसले से सिरमौर के ग्रामीण क्षेत्रों में फसल संबंधी कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

आज के आधुनिक युग में पहाड़ी क्षेत्रों के किसान पूरी तरह से यंत्रीकृत खेती पर निर्भर हैं। खेतों की जुताई के लिए इस्तेमाल होने वाले पावर टिलर, पशुओं के चारे के लिए घास काटने की मशीनें और बागवानी व ईंधन के लिए इस्तेमाल होने वाली लकड़ी काटने वाली मशीनें पूरी तरह से पेट्रोल और डीजल से संचालित होती हैं। इन छोटे कृषि उपकरणों को ईंधन भरवाने के लिए मुख्य सड़कों पर स्थित पेट्रोल पंपों तक ले जाना व्यावहारिक रूप से असंभव है। ऐसे में कृषि कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे है। लोग अब तेल भरवाने के लिए वाहन चालकों तक की मिन्नतें करते नजर आ रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


महीपुर के अजय ठाकुर ने बताया कि खेतों में फसल बुआई और घास की कटाई का काम जोरों पर है। हमारे पास ब्रश कटर और पावर टिल्लर है जो पेट्रोल से चलती हैं। अब पंप वाले बोतल या गैलन में पेट्रोल देने से साफ मना कर रहे हैं। ऐसे में क्या हम इन मशीनों को अपनी पीठ पर लादकर 10 किलोमीटर दूर पेट्रोल पंप पर ले जाएं?
विज्ञापन

किसान कमलेश कुमार ने बताया कि उन्हें मक्की की बुआई करनी है। पावर टिलर के लिए तेल लेने पंप पर पहुंचे तो पंप कर्मी ने उन्हें पेट्रोल देने से मना कर दिया। ऐसे में उन्हें बैरंग ही लौटना पड़ा। सरकार को इस निर्णय को तुरंत वापस लेना चाहिए।

प्रगतिशील किसान हुनर सिंह ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों में बैल खत्म हो चुके हैं और पूरी खेती पावर टिलर के भरोसे है। जून के इस सीजन में खेतों की जुताई बेहद जरूरी होती है। पावर टिलर को सड़क पर चलाकर पेट्रोल पंप तक नहीं ले जाया जा सकता, क्योंकि इससे मशीन खराब हो जाएगी और यह ट्रैफिक नियमों के भी खिलाफ है। कैन में डीजल नहीं मिलने से हमारे टिलर खेतों में ही शोपीस बनकर खड़े हो गए हैं।

किसान संदीप ठाकुर ने बताया कि केंद्र सरकार के इस फैसले से पशुपालकों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। हम लोग घास काटने वाली मशीन (घास कटर) के लिए दो लीटर पेट्रोल बोतल में लाते थे। अब पंपों पर सख्त पहरा है। अगर मशीनों को तेल नहीं मिला, तो आने वाले दिनों में मवेशियों के लिए सूखा चारा जुटाना मुश्किल हो जाएगा।

किसान अजय ठाकुर।

किसान अजय ठाकुर।

किसान अजय ठाकुर।

किसान अजय ठाकुर।

किसान अजय ठाकुर।

किसान अजय ठाकुर।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed