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Sirmour News: वादियों में जहर बो रहे लोग, आरटीओ सोना चंदेल ने बटोरा 150 कट्टों का जहर
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नाहन के मंझोली गांव में सड़क किनारे पड़े फेंके गए प्लास्टिक के कट्टे। संवाद
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पर्यावरण विशेष--
सचित्र--
पंकज तन्हा
नाहन। शहर की फिजाओं में घुला कूड़ा और सड़कों किनारे पड़े मलबे के कट्टे केवल शहर की सुंदरता को ग्रहण नहीं लगा रहे, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को भी मलबे में दफन कर रहे हैं। इस गंभीर चुनौती के बीच नाहन की आरटीओ सोना चंदेल एक मूक प्रहरी बनकर उभरी हैं।
लंबे अर्से से पर्यावरण संरक्षण के लिए महिला अधिकारी ने खुद मोर्चा संभाल रखा है और पर्यावरण संरक्षण के लिए मूक प्रहरी बनी हैं। आरटीओ सोना चंदेल लंबे अर्से से सड़कों के किनारे पड़े मलबे के कट्टों को खुद अपने पैसे से हटवाकर कर उचित जगहों पर ठिकाने पर लगा रही हैं।
अबकी दफा महिला अधिकारी ने खुद मोर्चा संभाला और मंझोली गांव की झाड़ियों व सड़कों से प्लास्टिक के 150 कट्टे खुद अपने हाथों उठाकर उन्हें सही ठिकाने लगवाया। बता दें कि नाहन-कालाअंब और नाहन-मंझौली मार्ग इन दिनों डंपिंग यार्ड में तब्दील होते जा रहे हैं। लोग अपने घरों की मरम्मत और निर्माण से निकला मलबा प्लास्टिक के कट्टों में भरकर बेखौफ होकर सड़क किनारे फेंक रहे हैं। ये कट्टे न केवल आंखों को चुभते हैं, बल्कि मिट्टी की उर्वरा शक्ति को भी निगल रहे हैं।
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आरटीओ सोना चंदेल की कार्यप्रणाली चर्चाओं से दूर जमीन पर बदलाव लाने वाली है। वे कई बार अपनी जेब से पैसे खर्च कर इन कट्टों को हटवाती रही हैं, ताकि धरती को सांस लेने की जगह मिल सके। मंझोली गांव में उनके द्वारा उठाए गए 150 कट्टे इस बात का प्रमाण हैं कि पर्यावरण के प्रति उनकी संवेदनशीलता महज कागजी नहीं है। उनका मानना है कि ये प्लास्टिक सालों-साल धरती का गला घोटता रहेगा।
सोना चंदेल का कहना है कि हर नागरिक को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। अगर हम आज नहीं चेते, तो आने वाली पीढ़ियों को हम विरासत में सिर्फ कचरा और बीमार धरती देंगे। उन्होंने लोक निर्माण विभाग, जिला प्रशासन और नगर परिषद से भी इस दिशा में सख्त कार्रवाई की अपील की है ताकि सड़कों को मलबे की मार से बचाया जा सके।
उन्होंने लोगों से भी थोड़े से पैसे बचाने के लालच में धरती को बर्बाद न करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सभी लोग अपना फर्ज निभाए और मलबे को तय स्थानों पर ही डालें।
-- -- संवाद
सचित्र
पंकज तन्हा
नाहन। शहर की फिजाओं में घुला कूड़ा और सड़कों किनारे पड़े मलबे के कट्टे केवल शहर की सुंदरता को ग्रहण नहीं लगा रहे, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को भी मलबे में दफन कर रहे हैं। इस गंभीर चुनौती के बीच नाहन की आरटीओ सोना चंदेल एक मूक प्रहरी बनकर उभरी हैं।
लंबे अर्से से पर्यावरण संरक्षण के लिए महिला अधिकारी ने खुद मोर्चा संभाल रखा है और पर्यावरण संरक्षण के लिए मूक प्रहरी बनी हैं। आरटीओ सोना चंदेल लंबे अर्से से सड़कों के किनारे पड़े मलबे के कट्टों को खुद अपने पैसे से हटवाकर कर उचित जगहों पर ठिकाने पर लगा रही हैं।
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अबकी दफा महिला अधिकारी ने खुद मोर्चा संभाला और मंझोली गांव की झाड़ियों व सड़कों से प्लास्टिक के 150 कट्टे खुद अपने हाथों उठाकर उन्हें सही ठिकाने लगवाया। बता दें कि नाहन-कालाअंब और नाहन-मंझौली मार्ग इन दिनों डंपिंग यार्ड में तब्दील होते जा रहे हैं। लोग अपने घरों की मरम्मत और निर्माण से निकला मलबा प्लास्टिक के कट्टों में भरकर बेखौफ होकर सड़क किनारे फेंक रहे हैं। ये कट्टे न केवल आंखों को चुभते हैं, बल्कि मिट्टी की उर्वरा शक्ति को भी निगल रहे हैं।
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सोना चंदेल का कहना है कि हर नागरिक को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। अगर हम आज नहीं चेते, तो आने वाली पीढ़ियों को हम विरासत में सिर्फ कचरा और बीमार धरती देंगे। उन्होंने लोक निर्माण विभाग, जिला प्रशासन और नगर परिषद से भी इस दिशा में सख्त कार्रवाई की अपील की है ताकि सड़कों को मलबे की मार से बचाया जा सके।
उन्होंने लोगों से भी थोड़े से पैसे बचाने के लालच में धरती को बर्बाद न करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सभी लोग अपना फर्ज निभाए और मलबे को तय स्थानों पर ही डालें।

नाहन के मंझोली गांव में सड़क किनारे पड़े फेंके गए प्लास्टिक के कट्टे। संवाद

नाहन के मंझोली गांव में सड़क किनारे पड़े फेंके गए प्लास्टिक के कट्टे। संवाद