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Sirmour News: दुग्ध समर्थन मूल्य से पशुपालकों की आर्थिकी हो रही मजबूत
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दुग्ध अभिशीतन केंद्र में रखा गया दूध।संवाद
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गाय का दूध 51 और भैंस का बिक रहा 61 रुपये प्रति लीटर
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। प्रदेश सरकार की ओर से दुग्ध उत्पादकों को दिए जा रहे समर्थन मूल्य का असर अब जमीनी स्तर पर साफ नजर आने लगा है। बीते करीब तीन वर्षों से लगातार बढ़ाए गए दूध के दामों से पशुपालकों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है। इससे न केवल दुग्ध व्यवसाय को बढ़ावा मिला है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिला है।
दुग्ध उत्पादक दिलीप सिंह ने बताया कि वह लंबे समय से पशुपालन से जुड़े हुए हैं। पहले दूध के कम दाम मिलने के कारण यह व्यवसाय सीमित स्तर पर ही किया जाता था, लेकिन पिछले दो वर्षों में दूध की दरों में हुई बढ़ोतरी से उनका उत्साह बढ़ा है। अब वह पशुपालन को व्यावसायिक तौर पर कर रहे हैं।
दुग्ध उत्पादक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि उनके पास वर्तमान में दो गाय हैं। उनके क्षेत्र की दुग्ध सहकारी समिति काफी समय से बंद पड़ी थी, जिससे कई पशुपालक इस व्यवसाय से पीछे हटने लगे थे। सरकार की ओर से दूध के दाम बढ़ाए जाने के बाद समिति को फिर से शुरू किया गया है। अब दूध उत्पादकों को उचित मूल्य मिल रहा है और लोगों में फिर से पशुपालन के प्रति रुचि बढ़ी है।
सहकारी समिति डिंगरी मणीघाट के सचिव प्रवीण ठाकुर ने बताया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस पद पर कार्यरत हैं। इस दौरान दूध के दामों में कई उतार-चढ़ाव देख चुके हैं। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में दूध के समर्थन मूल्य में हुई बढ़ोतरी से पशुपालकों को बड़ा लाभ हुआ है। वर्तमान में गाय के दूध का समर्थन मूल्य 51 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध का 61 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया है। दाम बढ़ने के बाद पशुपालकों का उत्साह बढ़ा है और दूध की आपूर्ति में भी उल्लेखनीय इजाफा हुआ है। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। प्रदेश सरकार की ओर से दुग्ध उत्पादकों को दिए जा रहे समर्थन मूल्य का असर अब जमीनी स्तर पर साफ नजर आने लगा है। बीते करीब तीन वर्षों से लगातार बढ़ाए गए दूध के दामों से पशुपालकों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई है। इससे न केवल दुग्ध व्यवसाय को बढ़ावा मिला है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिला है।
दुग्ध उत्पादक दिलीप सिंह ने बताया कि वह लंबे समय से पशुपालन से जुड़े हुए हैं। पहले दूध के कम दाम मिलने के कारण यह व्यवसाय सीमित स्तर पर ही किया जाता था, लेकिन पिछले दो वर्षों में दूध की दरों में हुई बढ़ोतरी से उनका उत्साह बढ़ा है। अब वह पशुपालन को व्यावसायिक तौर पर कर रहे हैं।
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दुग्ध उत्पादक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि उनके पास वर्तमान में दो गाय हैं। उनके क्षेत्र की दुग्ध सहकारी समिति काफी समय से बंद पड़ी थी, जिससे कई पशुपालक इस व्यवसाय से पीछे हटने लगे थे। सरकार की ओर से दूध के दाम बढ़ाए जाने के बाद समिति को फिर से शुरू किया गया है। अब दूध उत्पादकों को उचित मूल्य मिल रहा है और लोगों में फिर से पशुपालन के प्रति रुचि बढ़ी है।
सहकारी समिति डिंगरी मणीघाट के सचिव प्रवीण ठाकुर ने बताया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस पद पर कार्यरत हैं। इस दौरान दूध के दामों में कई उतार-चढ़ाव देख चुके हैं। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में दूध के समर्थन मूल्य में हुई बढ़ोतरी से पशुपालकों को बड़ा लाभ हुआ है। वर्तमान में गाय के दूध का समर्थन मूल्य 51 रुपये प्रति लीटर और भैंस के दूध का 61 रुपये प्रति लीटर निर्धारित किया गया है। दाम बढ़ने के बाद पशुपालकों का उत्साह बढ़ा है और दूध की आपूर्ति में भी उल्लेखनीय इजाफा हुआ है। संवाद

दुग्ध अभिशीतन केंद्र में रखा गया दूध।संवाद

दुग्ध अभिशीतन केंद्र में रखा गया दूध।संवाद
