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Sirmaur House Collapse: मां-बेटी की चिता जली; अजन्मी बच्ची भी दफन, मां के प्यार से महरूम हुई ईरा
Fri, 14 Aug 2026 12:06 PM IST
Ankesh Dogra
संवाद न्यूज एजेंसी, राजगढ़/हरिपुरधार (सिरमौर)।
संवाद न्यूज एजेंसी, राजगढ़/हरिपुरधार (सिरमौर)।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Fri, 14 Aug 2026 12:06 PM IST
सार
सिरमौर के छिछड़ियाधार में तीन मंजिला मकान गिरने से जान गंवाने वाली पूजा, उसकी सात माह की अजन्मी बच्ची और निर्मला को गुरुवार को अंतिम विदाई दी गई। पूजा का अंतिम संस्कार भवाई में, जबकि अजन्मी बच्ची को दफनाया गया। निर्मला का अंतिम संस्कार किट्टा लालचेता में हुआ। हादसे के बाद डेढ़ साल की ईरा ने मां को खो दिया। ग्रामीणों ने राहत कार्य में भी बढ़-चढ़कर मदद की।
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सिरमौर के राजगढ़ के छिछड़ियाधार गांव में दर्दनाक हादसा (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
एक मां चली गई, उसके साथ गर्भ में पल रही सात माह की बच्ची भी दुनिया देखने से पहले ही दफन हो गई और डेढ़ साल की मासूम ईरा मां की ममता से हमेशा के लिए महरूम हो गई। छिछड़ियाधार में बुधवार को तीन मंजिला मकान गिरने की घटना ने दो परिवारों को ऐसा दर्द दिया है, जिसकी भरपाई शायद कभी नहीं हो सकेगी।
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गुरुवार को पूजा और उसकी अजन्मी बच्ची तथा भीम सिंह की पत्नी निर्मला को नम आंखों से अंतिम विदाई दी गई। पूजा के पति अमित राणा का रो-रोकर बुरा हाल था। पत्नी और अजन्मी बेटी को खोने के बाद अब उनके सामने डेढ़ वर्षीय बेटी ईरा के पालन-पोषण की जिम्मेदारी भी आ गई है। हादसे ने मासूम ईरा से उसकी मां की ममता छीन ली।
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पूजा का अंतिम संस्कार गुरुवार को भवाई में किया गया, जबकि उसके गर्भ में पल रही सात माह की अजन्मी बच्ची को दफनाया गया। वहीं, निर्मला का अंतिम संस्कार किट्टा लालचेता में किया गया। अलग-अलग स्थानों पर सैकड़ों लोगों ने नम आंखों से तीनों को अंतिम विदाई दी।
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हादसे में उजड़ गए दो परिवार
बुधवार दोपहर करीब 12:05 बजे छिछड़ियाधार निवासी भीम सिंह का तीन मंजिला मकान अचानक भरभराकर गिर गया था। हादसे में भीम सिंह की पत्नी निर्मला और उनकी विवाहित बेटी पूजा की मौत हो गई। पूजा गर्भवती थी और उसके गर्भ में सात माह की बच्ची पल रही थी। अचानक हुए इस हादसे से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
ग्रामीणों ने दिखाई इंसानियत
हादसे के बाद गांव के लोगों ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया। समीप के होटल में मौजूद युवाओं सहित ग्रामीण मलबे को हटाने में जुट गए। करीब 15 मिनट के भीतर सनियों, दीदग और जेलग खनोटियों से दर्जनों ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और मलबे में दबे लोगों को बाहर निकालने में मदद की।
राहत कार्य के साथ ग्रामीणों ने हादसे में क्षतिग्रस्त मकान का सामान भी मलबे से निकालकर पुराने मकान में सुरक्षित पहुंचाया। टूटी अलमारी से मिले जेवरात और नकदी को पुलिस और पंचायत की मौजूदगी में सुरक्षित परिवार को सौंपा गया।
हादसे ने दो परिवारों को गहरे दुख में डुबो दिया, लेकिन संकट की इस घड़ी में दीदग पंचायत के ग्रामीणों ने जिस तरह एकजुट होकर पीड़ित परिवारों की मदद की, वह इंसानियत और भाईचारे की मिसाल बन गई। त्रासदी के बीच ग्रामीणों की इस संवेदनशीलता ने पीड़ित परिवारों को मुश्किल समय में सहारा दिया।
हादसे के बाद गांव के लोगों ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया। समीप के होटल में मौजूद युवाओं सहित ग्रामीण मलबे को हटाने में जुट गए। करीब 15 मिनट के भीतर सनियों, दीदग और जेलग खनोटियों से दर्जनों ग्रामीण मौके पर पहुंच गए और मलबे में दबे लोगों को बाहर निकालने में मदद की।
राहत कार्य के साथ ग्रामीणों ने हादसे में क्षतिग्रस्त मकान का सामान भी मलबे से निकालकर पुराने मकान में सुरक्षित पहुंचाया। टूटी अलमारी से मिले जेवरात और नकदी को पुलिस और पंचायत की मौजूदगी में सुरक्षित परिवार को सौंपा गया।
हादसे ने दो परिवारों को गहरे दुख में डुबो दिया, लेकिन संकट की इस घड़ी में दीदग पंचायत के ग्रामीणों ने जिस तरह एकजुट होकर पीड़ित परिवारों की मदद की, वह इंसानियत और भाईचारे की मिसाल बन गई। त्रासदी के बीच ग्रामीणों की इस संवेदनशीलता ने पीड़ित परिवारों को मुश्किल समय में सहारा दिया।