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Sirmour News: पर्याप्त शिक्षक नहीं होंगे तो कैसे मिलेगी बच्चों को अच्छी पढ़ाई
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राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला जरवा-जुनेली।
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सचित्र--
संवाद न्यूज एजेंसी
शिलाई (सिरमौर) शिलाई क्षेत्र की राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला जरवा-जुनेली में शिक्षकों के कई पद लंबे समय से रिक्त हैं। इसके चलते यहां शिक्षा ग्रहण कर रहे छात्र-छात्राओं का भविष्य अंधकारमय बना हुआ है। स्कूल प्रबंधन समिति और क्षेत्र की जनता लंबे समय से सरकार व शिक्षा विभाग से इन रिक्त पदों को भरने की मांग करती आ रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे अभिभावकों और स्थानीय लोगों में भारी रोष व्याप्त है।
जानकारी के अनुसार, पिछले करीब पांच वर्षों से स्कूल में प्रधानाचार्य का पद भी खाली चल रहा है। एक बार एक अध्यापक को प्रधानाचार्य के रूप में नियुक्त किया गया, लेकिन कार्यभार संभालने से पहले ही उनके स्थानांतरण के आदेश जारी हो गए, जिससे स्थिति जस की तस बनी हुई है। इसके अलावा अन्य विषयों के अध्यापकों के पद भी लंबे समय से रिक्त पड़े हैं।
स्कूल के कार्यवाहक प्रधानाचार्य यशपाल शर्मा ने बताया कि यहां प्रधानाचार्य के साथ-साथ लेक्चरर हिंदी, भूगोल, कला अध्यापक और डीपी (शारीरिक शिक्षा) के पद भी खाली हैं। इतना ही नहीं, अधीक्षक और लिपिक के पद भी रिक्त होने के कारण प्रशासनिक कार्यों का अतिरिक्त बोझ शिक्षकों को ही उठाना पड़ रहा है।
स्कूल प्रबंधन समिति की अध्यक्ष सीमा शर्मा ने बताया कि समिति द्वारा कई बार प्रस्ताव भेजे जाने के बावजूद सरकार और विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि स्कूल में करीब 140 छात्र-छात्राएं आसपास के गांवों से पढ़ने आते हैं, लेकिन शिक्षकों की कमी के कारण वे अपने भविष्य को लेकर असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
अभिभावकों का कहना है कि जब स्कूल में पर्याप्त शिक्षक ही नहीं होंगे, तो बच्चों की पढ़ाई कैसे संभव होगी। उन्होंने शिलाई क्षेत्र के विधायक एवं उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान, शिक्षा मंत्री और प्रदेश सरकार से जल्द से जल्द सभी रिक्त पदों पर नियुक्तियां करने की मांग की है, ताकि छात्रों का भविष्य सुरक्षित हो सके।
कार्यवाहक उच्च शिक्षा उपनिदेशक विजय रावत ने बताया कि स्कूलों में रिक्त पदों की सूचना समय-समय पर उच्चाधिकारियों को भेजी जा रही है।
-- -- संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
शिलाई (सिरमौर) शिलाई क्षेत्र की राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला जरवा-जुनेली में शिक्षकों के कई पद लंबे समय से रिक्त हैं। इसके चलते यहां शिक्षा ग्रहण कर रहे छात्र-छात्राओं का भविष्य अंधकारमय बना हुआ है। स्कूल प्रबंधन समिति और क्षेत्र की जनता लंबे समय से सरकार व शिक्षा विभाग से इन रिक्त पदों को भरने की मांग करती आ रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे अभिभावकों और स्थानीय लोगों में भारी रोष व्याप्त है।
जानकारी के अनुसार, पिछले करीब पांच वर्षों से स्कूल में प्रधानाचार्य का पद भी खाली चल रहा है। एक बार एक अध्यापक को प्रधानाचार्य के रूप में नियुक्त किया गया, लेकिन कार्यभार संभालने से पहले ही उनके स्थानांतरण के आदेश जारी हो गए, जिससे स्थिति जस की तस बनी हुई है। इसके अलावा अन्य विषयों के अध्यापकों के पद भी लंबे समय से रिक्त पड़े हैं।
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स्कूल के कार्यवाहक प्रधानाचार्य यशपाल शर्मा ने बताया कि यहां प्रधानाचार्य के साथ-साथ लेक्चरर हिंदी, भूगोल, कला अध्यापक और डीपी (शारीरिक शिक्षा) के पद भी खाली हैं। इतना ही नहीं, अधीक्षक और लिपिक के पद भी रिक्त होने के कारण प्रशासनिक कार्यों का अतिरिक्त बोझ शिक्षकों को ही उठाना पड़ रहा है।
स्कूल प्रबंधन समिति की अध्यक्ष सीमा शर्मा ने बताया कि समिति द्वारा कई बार प्रस्ताव भेजे जाने के बावजूद सरकार और विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि स्कूल में करीब 140 छात्र-छात्राएं आसपास के गांवों से पढ़ने आते हैं, लेकिन शिक्षकों की कमी के कारण वे अपने भविष्य को लेकर असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
अभिभावकों का कहना है कि जब स्कूल में पर्याप्त शिक्षक ही नहीं होंगे, तो बच्चों की पढ़ाई कैसे संभव होगी। उन्होंने शिलाई क्षेत्र के विधायक एवं उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान, शिक्षा मंत्री और प्रदेश सरकार से जल्द से जल्द सभी रिक्त पदों पर नियुक्तियां करने की मांग की है, ताकि छात्रों का भविष्य सुरक्षित हो सके।
कार्यवाहक उच्च शिक्षा उपनिदेशक विजय रावत ने बताया कि स्कूलों में रिक्त पदों की सूचना समय-समय पर उच्चाधिकारियों को भेजी जा रही है।

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