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Solan News: एयरफोर्स, सेना और दमकल कर्मियों ने तंग रास्तों पर दिखाया दम, जान-माल, वन संपदा की सुरक्षा के लिए परखी तैयारियां
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धर्मपुर के सनावर के नैचर केम्प में आयोजित कसौली उप मंडल की मेगा मोकड्रील के दौरान अभयास करते पद
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सनावर के नेचर कैंप में राज्यस्तरीय मेगा मॉकड्रिल का आयोजन
कसौली तहसीलदार की अध्यक्षता में में जुटे 22 विभाग
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मपुर(सोलन)। हिमाचल प्रदेश में आपदा प्रबंधन की तैयारियों को परखने के लिए राज्यस्तरीय दसवीं मेगा मॉकड्रिल का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में सोमवार देर रात को सुक्कीजोहड़ी-गढ़खल वाया सनावर स्कूल के समीप स्थित नेचर कैंप में जंगलों में आग लगने की स्थिति से निपटने के लिए एक व्यापक मेगा मॉकड्रिल का अभ्यास किया गया। यह पूरी कवायद तहसीलदार कसौली जगपाल सिंह के नेतृत्व में संपन्न हुई। इस मेगा मॉकड्रिल में वन विभाग, लोक निर्माण विभाग, जलशक्ति विभाग, कसौली कैंट, एयरफोर्स, सेना और होमगार्ड के अधिकारी व जवान विशेष रूप से शामिल रहे। एसडीएम कसौली की ओर से उपमंडल के तहत आने वाले सभी 22 विभागों को इस मेगा मॉकड्रिल में अनिवार्य रूप से शामिल होने के लिए कार्यालय आदेश जारी किए गए थे। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य जंगलों में अचानक आग लगने की स्थिति में घायल लोगों को प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित बाहर निकालना और उन्हें जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना था। मॉकड्रिल के दौरान रेंज अधिकारी धर्मपुर नीलम ठाकुर की अगुवाई में वन विभाग के कर्मचारियों ने बेहतरीन समन्वय दिखाया। उन्होंने जंगल की आग के बीच फंसे और घायल लोगों तक पहुंचकर उन्हें तुरंत एंबुलेंस तक पहुंचाया और प्राथमिक उपचार दिया। वहीं, अग्निशमन विभाग परवाणू के फायर अधिकारी अनिल कुमार के नेतृत्व में दमकल कर्मियों ने तंग रास्तों से होते हुए अग्निशमन गाड़ी को जंगल की आग तक पहुंचाने और उसे बुझाने का कड़ा अभ्यास किया। इस मौके पर वन विभाग की एसीएफ सोलन चंद्रिका शर्मा ने चिंता जताते हुए कहा कि कई बार बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटक सड़क किनारे कूड़ा जलाकर उसे ऐसे ही छोड़ देते हैं, जिससे जंगलों में भयानक आग लग जाती है।
सफल रहा आपदा राहत का पूर्वाभ्यास
तहसीलदार जगपाल सिंह ने मॉकड्रिल की सफलता पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि लगभग सभी प्रमुख विभागों ने इसमें अपनी सक्रिय भागीदारी दिखाई। उन्होंने कहा कि आपदाओं के कारण प्रदेश को हर वर्ष अरबों रुपये का नुकसान झेलना पड़ता है। ऐसे में राहत सामग्री पहुंचाने और घायलों को त्वरित अस्पताल पहुंचाने का यह अभ्यास भविष्य में जीवन और वन संपदा को बचाने में बेहद मददगार साबित होगा।
कसौली तहसीलदार की अध्यक्षता में में जुटे 22 विभाग
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मपुर(सोलन)। हिमाचल प्रदेश में आपदा प्रबंधन की तैयारियों को परखने के लिए राज्यस्तरीय दसवीं मेगा मॉकड्रिल का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में सोमवार देर रात को सुक्कीजोहड़ी-गढ़खल वाया सनावर स्कूल के समीप स्थित नेचर कैंप में जंगलों में आग लगने की स्थिति से निपटने के लिए एक व्यापक मेगा मॉकड्रिल का अभ्यास किया गया। यह पूरी कवायद तहसीलदार कसौली जगपाल सिंह के नेतृत्व में संपन्न हुई। इस मेगा मॉकड्रिल में वन विभाग, लोक निर्माण विभाग, जलशक्ति विभाग, कसौली कैंट, एयरफोर्स, सेना और होमगार्ड के अधिकारी व जवान विशेष रूप से शामिल रहे। एसडीएम कसौली की ओर से उपमंडल के तहत आने वाले सभी 22 विभागों को इस मेगा मॉकड्रिल में अनिवार्य रूप से शामिल होने के लिए कार्यालय आदेश जारी किए गए थे। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य जंगलों में अचानक आग लगने की स्थिति में घायल लोगों को प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित बाहर निकालना और उन्हें जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाना था। मॉकड्रिल के दौरान रेंज अधिकारी धर्मपुर नीलम ठाकुर की अगुवाई में वन विभाग के कर्मचारियों ने बेहतरीन समन्वय दिखाया। उन्होंने जंगल की आग के बीच फंसे और घायल लोगों तक पहुंचकर उन्हें तुरंत एंबुलेंस तक पहुंचाया और प्राथमिक उपचार दिया। वहीं, अग्निशमन विभाग परवाणू के फायर अधिकारी अनिल कुमार के नेतृत्व में दमकल कर्मियों ने तंग रास्तों से होते हुए अग्निशमन गाड़ी को जंगल की आग तक पहुंचाने और उसे बुझाने का कड़ा अभ्यास किया। इस मौके पर वन विभाग की एसीएफ सोलन चंद्रिका शर्मा ने चिंता जताते हुए कहा कि कई बार बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटक सड़क किनारे कूड़ा जलाकर उसे ऐसे ही छोड़ देते हैं, जिससे जंगलों में भयानक आग लग जाती है।
सफल रहा आपदा राहत का पूर्वाभ्यास
तहसीलदार जगपाल सिंह ने मॉकड्रिल की सफलता पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि लगभग सभी प्रमुख विभागों ने इसमें अपनी सक्रिय भागीदारी दिखाई। उन्होंने कहा कि आपदाओं के कारण प्रदेश को हर वर्ष अरबों रुपये का नुकसान झेलना पड़ता है। ऐसे में राहत सामग्री पहुंचाने और घायलों को त्वरित अस्पताल पहुंचाने का यह अभ्यास भविष्य में जीवन और वन संपदा को बचाने में बेहद मददगार साबित होगा।
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