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Solan News: मौसम की मार से सेब का उत्पादन और आवक घटी, दामों में उछाल
Sun, 02 Aug 2026 11:36 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Sun, 02 Aug 2026 11:36 PM IST
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सेब मंडी में बाहरी राज्यों के लिए सेब की लोडिंग करते हुए। संवाद
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ग्राउंड रिपोर्ट
2000 पेटी देने वाले बगीचों में इस बार 200 पेटी रहा उत्पादन
आकार छोटा रहने से कारोबारी, बागवान चिंतित
महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, आंध्रा समेत अन्य राज्यों से पहुंच रहे व्यापारी
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। प्रदेश में इस बार मौसम के बदले मिजाज और मार ने सेब उत्पादन की कमर तोड़ दी है। शिमला जिले से सोलन सेब मंडी पहुंच रहे बागवानों के चेहरों पर पैदावार में भारी गिरावट की चिंता साफ झलक रही है। जिन बगीचों से पिछले वर्षों में हजारों पेटी सेब निकलता था, वहां इस बार सैकड़े में ही पैदावार सिमट कर रह गई है।
हालांकि, मंडी में आवक कम होने के कारण बागवानों को सेब के दाम अच्छे मिल रहे हैं, जिससे थोड़ी राहत जरूर है। मौसम के कारण सेब के आकार पर भी काफी बुरा असर पड़ा है। इसके बावजूद महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश समेत देश के विभिन्न राज्यों से व्यापारी सोलन मंडी पहुंच रहे हैं।
इनसेट
लागत बढ़ी, उत्पादन 70 से 80 फीसदी तक गिरा
जुब्बल से सोलन मंडी पहुंचे बागवान सुरेंद्र रांटा ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि मौसम की मार के कारण इस बार सेब का उत्पादन 70 से 80 प्रतिशत तक गिर गया है। उन्होंने कहा, जिस बगीचे से हर साल करीब 2,000 पेटी सेब निकलता था, वहां इस बार मुश्किल से 200 पेटी ही निकल पाई है। फसल कम होने के साथ-साथ सेब का आकार भी छोटा रह गया है। मंडी में रेट अच्छे हैं लेकिन उच्च गुणवत्ता और बड़े साइज का सेब बहुत कम है। इसके अलावा, कीटनाशक और स्प्रे के दाम बढ़ने से लागत काफी बढ़ गई है, जो स्प्रे का डिब्बा पिछले साल 350 का था, वह इस बार 470 तक पहुंच गया है।
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इनसेट
यूनिवर्सल कार्टन से राहत, 20 अगस्त से शुरू होगा तुड़ान
कोटखाई के बागवान कृष्ण ने बताया कि उनके क्षेत्र में निचले इलाकों में भले असर पड़ा हो लेकिन उनके क्षेत्रों में फसल ठीक है। उनके क्षेत्र में सेब का तुड़ान 20 अगस्त के बाद शुरू होगा। उन्होंने सरकार द्वारा लागू किए गए यूनिवर्सल कार्टन की सराहना करते हुए कहा कि इससे बागवानों को काफी फायदा हो रहा है। इस कार्टन में आसानी से 20 किलो सेब आ रहा है, जबकि अच्छी क्वालिटी और जूसी (रसीले) सेब का वजन 25 किलो तक भी बैठ रहा है।
इनसेट
20 सालों में पहली बार इतना छोटा साइज
तमिलनाडु के मदुरै से आए व्यापारी नारायण ने बताया कि वे पिछले 20 वर्षों से सोलन मंडी से सेब का कारोबार कर रहे हैं। उन्होंने कहा अपने 20 साल के अनुभव में पहली बार देख रहा हूं कि सेब का साइज इतना छोटा रह गया है। दक्षिण भारत के राज्यों में बड़े आकार के सेब की ज्यादा मांग रहती है, जो इस बार काफी मुश्किल से मिल पा रहा है। हालांकि, आवक कम होने से इस बार दाम मजबूत बने रहने की उम्मीद है।
इनसेट
मंडी में 11 लाख की जगह पहुंचे सिर्फ 1.50 लाख बॉक्स
सोलन सेब मंडी के आढ़ती मनीष चौहान ने आंकड़ों के जरिये स्थिति की गंभीरता बताई। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष इस अवधि तक मंडी में करीब 11 लाख सेब के बॉक्स पहुंच चुके थे, जबकि इस बार यह आंकड़ा घटकर महज 1.50 लाख बॉक्स के आसपास ही सिमट गया है। उन्होंने कहा कि सेब की रंगत और क्वालिटी तो सही है लेकिन साइज छोटा होने से बागवान और व्यापारी दोनों चिंतित हैं। हालांकि, गुणवत्ता के हिसाब से बागवानों को मंडी में उचित और अच्छे दाम दिए जा रहे हैं।
इनसेट
मंडी समिति सोलन के सचिव राघव सूद ने बताया कि बागवानों को सेब की गुणवत्ता के आधार पर दाम मिल रहे है। इसमें रॉयल सेब का बॉक्स 1500 से 3000 और गाला किस्म का सेब 1500 से 2200 तक बिक रहा है। आने वाले समय भी दाम स्थिर रहने की संभावना है। मंडी में बागवानों, आढ़तियों और व्यापारियों के लिए उचित व्यवस्था की गई है।
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2000 पेटी देने वाले बगीचों में इस बार 200 पेटी रहा उत्पादन
आकार छोटा रहने से कारोबारी, बागवान चिंतित
महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, आंध्रा समेत अन्य राज्यों से पहुंच रहे व्यापारी
संवाद न्यूज एजेंसी
सोलन। प्रदेश में इस बार मौसम के बदले मिजाज और मार ने सेब उत्पादन की कमर तोड़ दी है। शिमला जिले से सोलन सेब मंडी पहुंच रहे बागवानों के चेहरों पर पैदावार में भारी गिरावट की चिंता साफ झलक रही है। जिन बगीचों से पिछले वर्षों में हजारों पेटी सेब निकलता था, वहां इस बार सैकड़े में ही पैदावार सिमट कर रह गई है।
हालांकि, मंडी में आवक कम होने के कारण बागवानों को सेब के दाम अच्छे मिल रहे हैं, जिससे थोड़ी राहत जरूर है। मौसम के कारण सेब के आकार पर भी काफी बुरा असर पड़ा है। इसके बावजूद महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश समेत देश के विभिन्न राज्यों से व्यापारी सोलन मंडी पहुंच रहे हैं।
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इनसेट
लागत बढ़ी, उत्पादन 70 से 80 फीसदी तक गिरा
जुब्बल से सोलन मंडी पहुंचे बागवान सुरेंद्र रांटा ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि मौसम की मार के कारण इस बार सेब का उत्पादन 70 से 80 प्रतिशत तक गिर गया है। उन्होंने कहा, जिस बगीचे से हर साल करीब 2,000 पेटी सेब निकलता था, वहां इस बार मुश्किल से 200 पेटी ही निकल पाई है। फसल कम होने के साथ-साथ सेब का आकार भी छोटा रह गया है। मंडी में रेट अच्छे हैं लेकिन उच्च गुणवत्ता और बड़े साइज का सेब बहुत कम है। इसके अलावा, कीटनाशक और स्प्रे के दाम बढ़ने से लागत काफी बढ़ गई है, जो स्प्रे का डिब्बा पिछले साल 350 का था, वह इस बार 470 तक पहुंच गया है।
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यूनिवर्सल कार्टन से राहत, 20 अगस्त से शुरू होगा तुड़ान
कोटखाई के बागवान कृष्ण ने बताया कि उनके क्षेत्र में निचले इलाकों में भले असर पड़ा हो लेकिन उनके क्षेत्रों में फसल ठीक है। उनके क्षेत्र में सेब का तुड़ान 20 अगस्त के बाद शुरू होगा। उन्होंने सरकार द्वारा लागू किए गए यूनिवर्सल कार्टन की सराहना करते हुए कहा कि इससे बागवानों को काफी फायदा हो रहा है। इस कार्टन में आसानी से 20 किलो सेब आ रहा है, जबकि अच्छी क्वालिटी और जूसी (रसीले) सेब का वजन 25 किलो तक भी बैठ रहा है।
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20 सालों में पहली बार इतना छोटा साइज
तमिलनाडु के मदुरै से आए व्यापारी नारायण ने बताया कि वे पिछले 20 वर्षों से सोलन मंडी से सेब का कारोबार कर रहे हैं। उन्होंने कहा अपने 20 साल के अनुभव में पहली बार देख रहा हूं कि सेब का साइज इतना छोटा रह गया है। दक्षिण भारत के राज्यों में बड़े आकार के सेब की ज्यादा मांग रहती है, जो इस बार काफी मुश्किल से मिल पा रहा है। हालांकि, आवक कम होने से इस बार दाम मजबूत बने रहने की उम्मीद है।
इनसेट
मंडी में 11 लाख की जगह पहुंचे सिर्फ 1.50 लाख बॉक्स
सोलन सेब मंडी के आढ़ती मनीष चौहान ने आंकड़ों के जरिये स्थिति की गंभीरता बताई। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष इस अवधि तक मंडी में करीब 11 लाख सेब के बॉक्स पहुंच चुके थे, जबकि इस बार यह आंकड़ा घटकर महज 1.50 लाख बॉक्स के आसपास ही सिमट गया है। उन्होंने कहा कि सेब की रंगत और क्वालिटी तो सही है लेकिन साइज छोटा होने से बागवान और व्यापारी दोनों चिंतित हैं। हालांकि, गुणवत्ता के हिसाब से बागवानों को मंडी में उचित और अच्छे दाम दिए जा रहे हैं।
इनसेट
मंडी समिति सोलन के सचिव राघव सूद ने बताया कि बागवानों को सेब की गुणवत्ता के आधार पर दाम मिल रहे है। इसमें रॉयल सेब का बॉक्स 1500 से 3000 और गाला किस्म का सेब 1500 से 2200 तक बिक रहा है। आने वाले समय भी दाम स्थिर रहने की संभावना है। मंडी में बागवानों, आढ़तियों और व्यापारियों के लिए उचित व्यवस्था की गई है।

सेब मंडी में बाहरी राज्यों के लिए सेब की लोडिंग करते हुए। संवाद

सेब मंडी में बाहरी राज्यों के लिए सेब की लोडिंग करते हुए। संवाद

सेब मंडी में बाहरी राज्यों के लिए सेब की लोडिंग करते हुए। संवाद

सेब मंडी में बाहरी राज्यों के लिए सेब की लोडिंग करते हुए। संवाद

सेब मंडी में बाहरी राज्यों के लिए सेब की लोडिंग करते हुए। संवाद