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Solan News: उद्घाटन के डेढ़ साल बाद भी शुरू नहीं हुआ ब्लड सेपरेशन सेंटर
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नालागढ़ अस्पताल में करोड़ों की मशीनें फांक रहीं धूल, स्टाफ न होने के चलते लटका काम
दिसंबर 2024 में तत्कालीन राज्यपाल ने किया था इस यूनिट का शुभारंभ
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़(सोलन)। नालागढ़ अस्पताल के ब्लड सेपरेशन सेंटर में स्टाफ के अभाव के कारण करोड़ों रुपये की मशीनें धूल फांक रही हैं। नतीजतन उद्घाटन के डेढ़ वर्ष बाद भी स्थानीय लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा। राज्यपाल ने दिसंबर 2024 में इस सेंटर का शुभारंभ किया था, लेकिन करीब 18 महीने (डेढ़ साल) बीत जाने के बाद भी यहां स्टाफ की तैनाती नहीं हो पाई है। इसके चलते सेंटर पूरी तरह ठप पड़ा है और आज भी मरीजों को ब्लड सेपरेशन से संबंधित जांच और इलाज के लिए दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ रहा है।
इस सेंटर में रक्त से प्लेटलेट्स, रेड ब्लड सेल्स और प्लाज्मा को अलग-अलग करने की आधुनिक मशीनें स्थापित की जा चुकी हैं। प्रदेश में आईजीएमसी शिमला के बाद यह ऐसा दूसरा सेंटर है, जहां खून से अलग-अलग कंपोनेंट्स निकाले जा सकते हैं। इस सुविधा के चालू न होने से गंभीर मरीजों को मजबूरी में पीजीआई चंडीगढ़ या आईजीएमसी शिमला जाना पड़ रहा है।
सीएसआर के तहत बना था भवन
नालागढ़ अस्पताल में पूर्व सरकार के कार्यकाल के दौरान रेडक्रॉस सोसायटी के सहयोग से ब्लड बैंक खोला गया था। उसी समय इस ब्लड बैंक के विस्तारीकरण की योजना भी तैयार कर ली गई थी, जिसके तहत यहां करोड़ों रुपये की मशीनें पहुंचा दी गई थीं। हालांकि, कई महीनों तक ये मशीनें खुले में पड़ी रहीं। इसके बाद नालागढ़ की एक निजी कंपनी ने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी के तहत यहां एक भवन का निर्माण करवाया, जिसमें इन मशीनों को फिट किया गया।
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17 महीने बाद भी नहीं मिला स्टाफ
13 दिसंबर 2024 को नालागढ़ में रेडक्रॉस मेले का आयोजन किया गया था। मेले का शुभारंभ करने पहुंचे राज्यपाल ने इस ब्लड सेपरेशन सेंटर का भी उद्घाटन किया था। उस दौरान जिला उपायुक्त (डीसी) के माध्यम से आउटसोर्स पर स्टाफ मुहैया कराने की बात कही गई थी, लेकिन 17 महीने बीत जाने के बाद भी यहां स्टाफ नहीं पहुंच सका। अधिकारियों के मुताबिक, इस सेंटर को सुचारू रूप से चलाने के लिए कम से कम चार लैब टेक्नीशियनों (प्रयोगशाला तकनीशियन) की आवश्यकता है, जबकि ब्लड बैंक में वर्तमान में केवल एक चिकित्सक ही तैनात है।
ब्ट
नालागढ़ अस्पताल के ब्लड सेपरेशन सेंटर में स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए उच्चाधिकारियों के साथ लगातार पत्राचार और चर्चा की जा रही है। जैसे ही आवश्यक स्टाफ उपलब्ध होगा, सेंटर को तुरंत चालू कर दिया जाएगा।
डॉ. अजय पाठक, सीएमओ
दिसंबर 2024 में तत्कालीन राज्यपाल ने किया था इस यूनिट का शुभारंभ
संवाद न्यूज एजेंसी
नालागढ़(सोलन)। नालागढ़ अस्पताल के ब्लड सेपरेशन सेंटर में स्टाफ के अभाव के कारण करोड़ों रुपये की मशीनें धूल फांक रही हैं। नतीजतन उद्घाटन के डेढ़ वर्ष बाद भी स्थानीय लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा। राज्यपाल ने दिसंबर 2024 में इस सेंटर का शुभारंभ किया था, लेकिन करीब 18 महीने (डेढ़ साल) बीत जाने के बाद भी यहां स्टाफ की तैनाती नहीं हो पाई है। इसके चलते सेंटर पूरी तरह ठप पड़ा है और आज भी मरीजों को ब्लड सेपरेशन से संबंधित जांच और इलाज के लिए दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ रहा है।
इस सेंटर में रक्त से प्लेटलेट्स, रेड ब्लड सेल्स और प्लाज्मा को अलग-अलग करने की आधुनिक मशीनें स्थापित की जा चुकी हैं। प्रदेश में आईजीएमसी शिमला के बाद यह ऐसा दूसरा सेंटर है, जहां खून से अलग-अलग कंपोनेंट्स निकाले जा सकते हैं। इस सुविधा के चालू न होने से गंभीर मरीजों को मजबूरी में पीजीआई चंडीगढ़ या आईजीएमसी शिमला जाना पड़ रहा है।
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सीएसआर के तहत बना था भवन
नालागढ़ अस्पताल में पूर्व सरकार के कार्यकाल के दौरान रेडक्रॉस सोसायटी के सहयोग से ब्लड बैंक खोला गया था। उसी समय इस ब्लड बैंक के विस्तारीकरण की योजना भी तैयार कर ली गई थी, जिसके तहत यहां करोड़ों रुपये की मशीनें पहुंचा दी गई थीं। हालांकि, कई महीनों तक ये मशीनें खुले में पड़ी रहीं। इसके बाद नालागढ़ की एक निजी कंपनी ने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी के तहत यहां एक भवन का निर्माण करवाया, जिसमें इन मशीनों को फिट किया गया।
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13 दिसंबर 2024 को नालागढ़ में रेडक्रॉस मेले का आयोजन किया गया था। मेले का शुभारंभ करने पहुंचे राज्यपाल ने इस ब्लड सेपरेशन सेंटर का भी उद्घाटन किया था। उस दौरान जिला उपायुक्त (डीसी) के माध्यम से आउटसोर्स पर स्टाफ मुहैया कराने की बात कही गई थी, लेकिन 17 महीने बीत जाने के बाद भी यहां स्टाफ नहीं पहुंच सका। अधिकारियों के मुताबिक, इस सेंटर को सुचारू रूप से चलाने के लिए कम से कम चार लैब टेक्नीशियनों (प्रयोगशाला तकनीशियन) की आवश्यकता है, जबकि ब्लड बैंक में वर्तमान में केवल एक चिकित्सक ही तैनात है।
ब्ट
नालागढ़ अस्पताल के ब्लड सेपरेशन सेंटर में स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए उच्चाधिकारियों के साथ लगातार पत्राचार और चर्चा की जा रही है। जैसे ही आवश्यक स्टाफ उपलब्ध होगा, सेंटर को तुरंत चालू कर दिया जाएगा।
डॉ. अजय पाठक, सीएमओ