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Solan News: नारद प्रसंग सुनाकर अहंकार त्यागने का दिया संदेश
Sun, 02 Aug 2026 11:36 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Sun, 02 Aug 2026 11:36 PM IST
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कुनिहार में आयोजित शिव महापुराण कथा के दौरान मौजूद भक्तगण। स्रोत : आयोजक
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हर-हर गंगे कांवड़ सेवा संघ करवा रहा शिव महापुराण कथा का आयोजन
संवाद न्यूज एजेंसी
कुनिहार(सोलन)। हर-हर गंगे कांवड़ सेवा संघ हाटकोट, कुनिहार के तत्वावधान में राजदरबार परिसर में आयोजित 11 दिवसीय शिव महापुराण कथा के द्वितीय दिवस कथा व्यास एवं राष्ट्रीय प्रचारक गो रक्षा दल शशांक कौशल ने भगवान शिव की महिमा का गुणगान करते हुए कहा कि शिव महापुराण का श्रवण मनुष्य के पापों का नाश कर उसे धर्म अर्थ काम और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग दिखाता है।
उन्होंने शिव महापुराण की महत्ता सृष्टि की उत्पत्ति तथा भगवान शिव की अनंत करुणा का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति सेवा सदाचार और विनम्रता का संदेश दिया। कथा के दौरान देवर्षि नारद के प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि कठोर तपस्या के बाद कामदेव पर विजय प्राप्त करने से नारद जी के मन में सूक्ष्म अहंकार उत्पन्न हो गया। भगवान शिव ने उन्हें अपनी उपलब्धि का प्रदर्शन न करने की सलाह दी। लेकिन उन्होंने भगवान विष्णु के समक्ष भी इसका उल्लेख कर दिया।
कथा व्यास ने बताया कि भगवान विष्णु ने अपने भक्त का अहंकार दूर करने के लिए माया रची। स्वयंवर में नारद जी को वानर मुख मिलने और राजकुमारी द्वारा भगवान विष्णु को वरमाला पहनाने की घटना से उनका अहंकार टूट गया। बाद में उन्हें अपनी भूल का एहसास हुआ और उन्होंने भगवान विष्णु से क्षमा याचना की। कथा के माध्यम से संदेश दिया गया कि ज्ञान तप और भक्ति के साथ विनम्रता भी आवश्यक है और अहंकार मनुष्य के पतन का कारण बनता है।
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कथा से पूर्व वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना की गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर भगवान शिव का गुणगान किया। आयोजकों ने बताया कि कथा प्रतिदिन एक बजे से चार बजे तक एवं सायंकाल आरती व भजन कीर्तन आयोजित की जा रहा है। तथा समापन अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन होगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कुनिहार(सोलन)। हर-हर गंगे कांवड़ सेवा संघ हाटकोट, कुनिहार के तत्वावधान में राजदरबार परिसर में आयोजित 11 दिवसीय शिव महापुराण कथा के द्वितीय दिवस कथा व्यास एवं राष्ट्रीय प्रचारक गो रक्षा दल शशांक कौशल ने भगवान शिव की महिमा का गुणगान करते हुए कहा कि शिव महापुराण का श्रवण मनुष्य के पापों का नाश कर उसे धर्म अर्थ काम और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग दिखाता है।
उन्होंने शिव महापुराण की महत्ता सृष्टि की उत्पत्ति तथा भगवान शिव की अनंत करुणा का वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भक्ति सेवा सदाचार और विनम्रता का संदेश दिया। कथा के दौरान देवर्षि नारद के प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि कठोर तपस्या के बाद कामदेव पर विजय प्राप्त करने से नारद जी के मन में सूक्ष्म अहंकार उत्पन्न हो गया। भगवान शिव ने उन्हें अपनी उपलब्धि का प्रदर्शन न करने की सलाह दी। लेकिन उन्होंने भगवान विष्णु के समक्ष भी इसका उल्लेख कर दिया।
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कथा व्यास ने बताया कि भगवान विष्णु ने अपने भक्त का अहंकार दूर करने के लिए माया रची। स्वयंवर में नारद जी को वानर मुख मिलने और राजकुमारी द्वारा भगवान विष्णु को वरमाला पहनाने की घटना से उनका अहंकार टूट गया। बाद में उन्हें अपनी भूल का एहसास हुआ और उन्होंने भगवान विष्णु से क्षमा याचना की। कथा के माध्यम से संदेश दिया गया कि ज्ञान तप और भक्ति के साथ विनम्रता भी आवश्यक है और अहंकार मनुष्य के पतन का कारण बनता है।
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कथा से पूर्व वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना की गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर भगवान शिव का गुणगान किया। आयोजकों ने बताया कि कथा प्रतिदिन एक बजे से चार बजे तक एवं सायंकाल आरती व भजन कीर्तन आयोजित की जा रहा है। तथा समापन अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन होगा।