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खेती पर संकट : दाड़लाघाट में किसानों को नहीं मिल रहा बोतल में पेट्रोल
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तनु गौतम, दाड़लाघाट में पेट्रोल वाली खबर के साथ फोटो
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पावर टिलर के लिए पेट्रोल को लेकर किसानों की मुश्किलें बढ़ीं, टंकी छोटी होने के चलते बार-बार लगाने पड़ रहे पंप के चक्कर
छोटे कृषि यंत्रों के लिए सीमित पेट्रोल उपलब्ध कराने की मांग, समाधान न होने पर आंदोलन की चेतावनी
राजेश गुप्ता,
संवाद न्यूज एजेंसी
दाड़लाघाट(सोलन)। दाड़लाघाट क्षेत्र के तहत आने वाले किसानों ने पेट्रोल पंपों पर बोतल या छोटे कैन में पेट्रोल न दिए जाने को लेकर नाराजगी जताई है। किसानों का कहना है कि पाॅवर टिलर और छोटे कृषि यंत्रों के लिए सीमित मात्रा में पेट्रोल की आवश्यकता होती है, लेकिन पंप संचालक नियमों का हवाला देकर पेट्रोल देने से मना कर रहे हैं, जिससे खेती-किसानी प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। किसानों के अनुसार पाॅवर टिलर की टंकियों की क्षमता 3 से 4 लीटर तक होती है, ऐसे में उन्हें बार-बार पंप तक ले जाना व्यावहारिक नहीं है। उनका कहना है कि सुरक्षित कैन में पेट्रोल ले जाना उनकी मजबूरी है, न कि कोई गलत कार्य। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो कृषि कार्यों पर असर पड़ेगा और किसान आंदोलन करने को मजबूर होंगे। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि कृषि कार्यों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षित कंटेनरों में सीमित मात्रा में पेट्रोल उपलब्ध कराने की स्पष्ट व्यवस्था की जाए, ताकि खेती-किसानी प्रभावित न हो। मानसून के आगमन के साथ खेतों में जुताई और बुआई का कार्य तेज होने वाला है। ऐसे में पेट्रोल की उपलब्धता को लेकर उत्पन्न समस्या किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ तो खरीफ सीजन की तैयारियां प्रभावित हो सकती हैं।
किसानों बोतल में दिया जाए पेट्रोल
पाॅवर टिलर और छोटे यंत्रों की टंकी बहुत छोटी होती है। हर बार पंप तक जाना संभव नहीं है। बोतल में पेट्रोल लेना मजबूरी है। सरकार को चाहिए कि वह पेट्रोल पंपों पर आदेश दें कि वह किसानों को पेट्रोल बोतलों में दिया जाए।
विजय कुमार, प्रधान कृषि सलाहकार समिति,कुनिहार
खेतों की जुताई और बुआई पर असर
पेट्रोल व डीजल को लेकर अगर यही स्थिति रही तो खेतों की जुताई और बुआई समय पर नहीं हो पाएगी। प्रशासन को तुरंत किसानों के लिए व्यावहारिक व्यवस्था करनी चाहिए।
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नरेश शर्मा (किसान) निवासी गवाह
व्यावहारिक समाधान निकाला जाए
किसानों की यह समस्या गंभीर है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। प्रशासन से मांग है कि किसानों के हित में जल्द से जल्द स्पष्ट और व्यावहारिक समाधान निकाला जाए, ताकि कृषि कार्य प्रभावित न हों और फसलाें को उगाने में परेशानी न हो।
श्याम सिंह चौधरी, पंचायत प्रधान दाड़लाघाट
समय और पैसा दोनों की बर्बादी
अगर हमें 2-3 लीटर पेट्रोल के लिए भी पाॅवर टिलर लेकर पंप जाना पड़ेगा, तो समय और पैसा दोनों की बर्बादी होगी। इन दिनों किसानों को फसलों की बुआई के लिए पेट्रोल की जरूरत है, ऐसे में किसान कहां पेट्रोल पंपों के चक्कर काटेंगे। प्रशासन को इस पर ध्यान देना चाहिए।
कमल लाल (किसान ) आसलू (चाखड़)
किसानों को होगा नुकसान
किसानों के लिए यह बहुत बड़ी दिक्कत बन गई है। खेती का समय नजदीक है, अगर यही स्थिति रही तो काम रुक जाएगा और नुकसान होगा और वह पूरी तरह से फसल भी नहीं लगा पाएंगे।
गीता राम (किसान) आसलू (चाखड़)
किसान कृषि के छोटे यंत्रों पर निर्भर
हमारे इलाके में अधिकतर किसान छोटे यंत्रों पर निर्भर हैं। पेट्रोल पंप पर बार-बार मना करने से सबसे ज्यादा परेशानी खेतों के काम में हो रही है। सरकार ने बिना सोचे समझे यह दिक्कत खड़ी की है। इसका समाधान होना चाहिए।
किशोरी शास्त्री (किसान),भराड़ीघाट
कोट
किसानों की समस्या गंभीर है। इस मामले को प्रशासन के स्तर पर उठाया जाएगा, ताकि कोई बीच का समाधान निकल सके और किसानों को परेशानी न हो।
तनु गौतम, पंचायत प्रधान,नवगांव
छोटे कृषि यंत्रों के लिए सीमित पेट्रोल उपलब्ध कराने की मांग, समाधान न होने पर आंदोलन की चेतावनी
राजेश गुप्ता,
संवाद न्यूज एजेंसी
दाड़लाघाट(सोलन)। दाड़लाघाट क्षेत्र के तहत आने वाले किसानों ने पेट्रोल पंपों पर बोतल या छोटे कैन में पेट्रोल न दिए जाने को लेकर नाराजगी जताई है। किसानों का कहना है कि पाॅवर टिलर और छोटे कृषि यंत्रों के लिए सीमित मात्रा में पेट्रोल की आवश्यकता होती है, लेकिन पंप संचालक नियमों का हवाला देकर पेट्रोल देने से मना कर रहे हैं, जिससे खेती-किसानी प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। किसानों के अनुसार पाॅवर टिलर की टंकियों की क्षमता 3 से 4 लीटर तक होती है, ऐसे में उन्हें बार-बार पंप तक ले जाना व्यावहारिक नहीं है। उनका कहना है कि सुरक्षित कैन में पेट्रोल ले जाना उनकी मजबूरी है, न कि कोई गलत कार्य। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो कृषि कार्यों पर असर पड़ेगा और किसान आंदोलन करने को मजबूर होंगे। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि कृषि कार्यों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षित कंटेनरों में सीमित मात्रा में पेट्रोल उपलब्ध कराने की स्पष्ट व्यवस्था की जाए, ताकि खेती-किसानी प्रभावित न हो। मानसून के आगमन के साथ खेतों में जुताई और बुआई का कार्य तेज होने वाला है। ऐसे में पेट्रोल की उपलब्धता को लेकर उत्पन्न समस्या किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते समाधान नहीं हुआ तो खरीफ सीजन की तैयारियां प्रभावित हो सकती हैं।
किसानों बोतल में दिया जाए पेट्रोल
पाॅवर टिलर और छोटे यंत्रों की टंकी बहुत छोटी होती है। हर बार पंप तक जाना संभव नहीं है। बोतल में पेट्रोल लेना मजबूरी है। सरकार को चाहिए कि वह पेट्रोल पंपों पर आदेश दें कि वह किसानों को पेट्रोल बोतलों में दिया जाए।
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विजय कुमार, प्रधान कृषि सलाहकार समिति,कुनिहार
खेतों की जुताई और बुआई पर असर
पेट्रोल व डीजल को लेकर अगर यही स्थिति रही तो खेतों की जुताई और बुआई समय पर नहीं हो पाएगी। प्रशासन को तुरंत किसानों के लिए व्यावहारिक व्यवस्था करनी चाहिए।
नरेश शर्मा (किसान) निवासी गवाह
व्यावहारिक समाधान निकाला जाए
किसानों की यह समस्या गंभीर है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। प्रशासन से मांग है कि किसानों के हित में जल्द से जल्द स्पष्ट और व्यावहारिक समाधान निकाला जाए, ताकि कृषि कार्य प्रभावित न हों और फसलाें को उगाने में परेशानी न हो।
श्याम सिंह चौधरी, पंचायत प्रधान दाड़लाघाट
समय और पैसा दोनों की बर्बादी
अगर हमें 2-3 लीटर पेट्रोल के लिए भी पाॅवर टिलर लेकर पंप जाना पड़ेगा, तो समय और पैसा दोनों की बर्बादी होगी। इन दिनों किसानों को फसलों की बुआई के लिए पेट्रोल की जरूरत है, ऐसे में किसान कहां पेट्रोल पंपों के चक्कर काटेंगे। प्रशासन को इस पर ध्यान देना चाहिए।
कमल लाल (किसान ) आसलू (चाखड़)
किसानों को होगा नुकसान
किसानों के लिए यह बहुत बड़ी दिक्कत बन गई है। खेती का समय नजदीक है, अगर यही स्थिति रही तो काम रुक जाएगा और नुकसान होगा और वह पूरी तरह से फसल भी नहीं लगा पाएंगे।
गीता राम (किसान) आसलू (चाखड़)
किसान कृषि के छोटे यंत्रों पर निर्भर
हमारे इलाके में अधिकतर किसान छोटे यंत्रों पर निर्भर हैं। पेट्रोल पंप पर बार-बार मना करने से सबसे ज्यादा परेशानी खेतों के काम में हो रही है। सरकार ने बिना सोचे समझे यह दिक्कत खड़ी की है। इसका समाधान होना चाहिए।
किशोरी शास्त्री (किसान),भराड़ीघाट
कोट
किसानों की समस्या गंभीर है। इस मामले को प्रशासन के स्तर पर उठाया जाएगा, ताकि कोई बीच का समाधान निकल सके और किसानों को परेशानी न हो।
तनु गौतम, पंचायत प्रधान,नवगांव

तनु गौतम, दाड़लाघाट में पेट्रोल वाली खबर के साथ फोटो

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