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एचआरटीसी परवाणू डिपो में व्यवस्थाएं बेहाल: 26 बसें संभाल रहीं 56 रूटों का जिम्मा
Wed, 05 Aug 2026 11:58 PM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
संवाद न्यूज एजेंसी, सोलन
Updated Wed, 05 Aug 2026 11:58 PM IST
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परवाणू में वर्कशॉप के बाहर खड़ी बसें। संवाद
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परवाणू एचआरटीसी डिपो में 6 रूट बंद, 60 फीसदी मेकेनिक के पद रिक्त
वर्कशॉप की जगह डीजल पंप, स्टोर व ऑफिस में ड्यूटी दे रहे मेकेनिक
खराब बसों से सामान खोलकर की जा रही है बसों की मरम्मत
दिल्ली, चंडीगढ़ समेत हरिद्वार जाने वाली बसों की भी यहीं होती है रिपेयर
संवाद न्यूज एजेंसी
परवाणू। हिमाचल पथ परिवहन निगम के परवाणू डिपो में व्यवस्थाएं बदहाल हैं। यहां मात्र 26 बसें 56 रूटों का जिम्मा संभाल रही हैं। 60 फीसदी से ज्यादा मैकेनिक और तकनीकी कर्मचारियों के पद रिक्त चल रहे हैं।
बसों के खराब होने पर कार्यशाला में खड़ी पुरानी बसों के पूर्जे निकालकर मरम्मत की जाती है। अतिरिक्त पूर्जे पहुंचने तक बसें रूटों पर नहीं जा पातीं। इससे ग्रामीण रूटों पर बसें न चलने से लोग परेशान हैं। कर्मचारी भी लगातार तनाव में काम कर रहे हैं। बसों की कमी के कारण 56 में से अब केवल 40 रूट ही चलाए जा रहे हैं, जबकि 16 रूट लंबे समय से बंद पड़े हैं। डिपो से मनाली, पठानकोट, दिल्ली और पालमपुर जैसे चार लंबे रूट की बसें भी चलती हैं। उच्च न्यायालय के आदेशों पर 12 फुट एनयूआरएम जेनरिक बसें कार्यशाला में खड़ी हैं। नियमित संचालन के दौरान दो से तीन बसें मरम्मत के लिए कार्यशाला में रहती हैं। किसी बस के अचानक खराब होने पर दूसरी बस भेजना मुश्किल हो जाता है।
कर्मचारियों की भारी कमी
डिपो खुलने पर कार्यशाला में 75 से 80 मैकेनिक और तकनीकी कर्मियों के पद स्वीकृत थे, पर आज मात्र दो दर्जन कर्मचारी तैनात हैं। इनमें से कुछ कर्मचारी कार्यालय, डीजल पंप और भंडार का काम भी देख रहे हैं। टायर प्लांट में पहले 24 कर्मचारी होते थे, अब 5-6 से काम लिया जा रहा है। बॉडी प्लांट में पहले 6-7 कर्मचारी तैनात थे, अब केवल एक कर्मी बचा है। पेंटर शाखा में भी कर्मचारियों की कमी है। सेवानिवृत्ति के बाद नए पद भरे ही नहीं गए।
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समाधान के प्रयास
एचआरटीसी परवाणू के क्षेत्रीय प्रबंधक प्रदीप ने बताया कि डिपो के लिए नई इलेक्ट्रिक बसों का प्रस्ताव मुख्यालय भेजा गया है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने पर परवाणू डिपो का परिवहन तंत्र और अधिक मजबूत होगा। कार्यशाला में मैकेनिक के रिक्त पदों के लिए भी आलाधिकारियों को बार-बार याद दिलाया जाता है। - प्रदीप, क्षेत्रीय प्रबंधक,एचआरटीसी परवाणू
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परवाणू एचआरटीसी डिपो में 6 रूट बंद, 60 फीसदी मेकेनिक के पद रिक्त
वर्कशॉप की जगह डीजल पंप, स्टोर व ऑफिस में ड्यूटी दे रहे मेकेनिक
खराब बसों से सामान खोलकर की जा रही है बसों की मरम्मत
दिल्ली, चंडीगढ़ समेत हरिद्वार जाने वाली बसों की भी यहीं होती है रिपेयर
संवाद न्यूज एजेंसी
परवाणू। हिमाचल पथ परिवहन निगम के परवाणू डिपो में व्यवस्थाएं बदहाल हैं। यहां मात्र 26 बसें 56 रूटों का जिम्मा संभाल रही हैं। 60 फीसदी से ज्यादा मैकेनिक और तकनीकी कर्मचारियों के पद रिक्त चल रहे हैं।
बसों के खराब होने पर कार्यशाला में खड़ी पुरानी बसों के पूर्जे निकालकर मरम्मत की जाती है। अतिरिक्त पूर्जे पहुंचने तक बसें रूटों पर नहीं जा पातीं। इससे ग्रामीण रूटों पर बसें न चलने से लोग परेशान हैं। कर्मचारी भी लगातार तनाव में काम कर रहे हैं। बसों की कमी के कारण 56 में से अब केवल 40 रूट ही चलाए जा रहे हैं, जबकि 16 रूट लंबे समय से बंद पड़े हैं। डिपो से मनाली, पठानकोट, दिल्ली और पालमपुर जैसे चार लंबे रूट की बसें भी चलती हैं। उच्च न्यायालय के आदेशों पर 12 फुट एनयूआरएम जेनरिक बसें कार्यशाला में खड़ी हैं। नियमित संचालन के दौरान दो से तीन बसें मरम्मत के लिए कार्यशाला में रहती हैं। किसी बस के अचानक खराब होने पर दूसरी बस भेजना मुश्किल हो जाता है।
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कर्मचारियों की भारी कमी
डिपो खुलने पर कार्यशाला में 75 से 80 मैकेनिक और तकनीकी कर्मियों के पद स्वीकृत थे, पर आज मात्र दो दर्जन कर्मचारी तैनात हैं। इनमें से कुछ कर्मचारी कार्यालय, डीजल पंप और भंडार का काम भी देख रहे हैं। टायर प्लांट में पहले 24 कर्मचारी होते थे, अब 5-6 से काम लिया जा रहा है। बॉडी प्लांट में पहले 6-7 कर्मचारी तैनात थे, अब केवल एक कर्मी बचा है। पेंटर शाखा में भी कर्मचारियों की कमी है। सेवानिवृत्ति के बाद नए पद भरे ही नहीं गए।
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समाधान के प्रयास
एचआरटीसी परवाणू के क्षेत्रीय प्रबंधक प्रदीप ने बताया कि डिपो के लिए नई इलेक्ट्रिक बसों का प्रस्ताव मुख्यालय भेजा गया है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने पर परवाणू डिपो का परिवहन तंत्र और अधिक मजबूत होगा। कार्यशाला में मैकेनिक के रिक्त पदों के लिए भी आलाधिकारियों को बार-बार याद दिलाया जाता है। - प्रदीप, क्षेत्रीय प्रबंधक,एचआरटीसी परवाणू

परवाणू में वर्कशॉप के बाहर खड़ी बसें। संवाद