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खुशवंत सिंह लिटफेस्ट: प्रोबल दासगुप्ता बोले- ऑपरेशन ब्लू स्टार राजनीतिक विफलता, जरूरी था सैन्य हस्तक्षेप

Mon, 26 Oct 2026 09:10 AM IST
Ankesh Dogra सोमदत्त शर्मा, सोलन।
सोमदत्त शर्मा, सोलन। Published by: Ankesh Dogra Updated Mon, 26 Oct 2026 09:10 AM IST
सार

कसौली में खुशवंत सिंह साहित्य उत्सव के अंतिम दिन ऑपरेशन ब्लू स्टार पर चर्चा हुई। पूर्व सैन्य अधिकारी और लेखक प्रोबल दासगुप्ता ने इसे राजनीतिक विफलता बताते हुए कहा कि परिस्थितियां सैन्य हस्तक्षेप तक पहुंच गई थीं। उत्सव में इतिहास, कला, साहित्य, उद्यमिता और पर्यावरण सहित कई विषयों पर चर्चा हुई और तीन दिवसीय आयोजन संपन्न हो गया।

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Operation Blue Star Political Failure Probal Dasgupta Khushwant Singh Litfest Kasauli
खुशवंत सिंह लिटफेस्ट के समापन पर मौजूद हस्तियां व अन्य। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

खुशवंत सिंह लिटफेस्ट के अंतिम दिन ऑपरेशन ब्लू स्टार पर चर्चा हुई। अंतिम दिन के पहले सत्र में पूर्व सैन्य अधिकारी और लेखक प्रोबल दासगुप्ता ने अपनी किताब जनरल सुंदरजी : सेलिब्रेटेड एंड डिबेटेड पर लेखक सुनेत्रा चौधरी के साथ चर्चा करते हुए कहा कि ऑपरेशन ब्लू स्टार  ऐसी घटना थी, जिसने अंततः सैन्य हस्तक्षेप को अनिवार्य बना दिया।

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उन्होंने कहा कि 1970 के दशक के मध्य में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, ज्ञानी जैल सिंह और संजय गांधी पंजाब में एक नए नेता को उभारने का प्रयास कर रहे थे। दासगुप्ता के अनुसार इसी प्रयास के तहत मोगा में जरनैल सिंह भिंडरांवाले नामक एक युवा धार्मिक नेता को आगे बढ़ाया गया। वह बड़ी भीड़ जुटाने और प्रभावशाली भाषण देने में सक्षम था।  उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने भिंडरांवाले को बढ़ावा दिया, लेकिन वह ऐसे बदल गया, जिसकी उन्होंने कल्पना नहीं की थी। यह स्थिति सैन्य विफलता से अधिक राजनीतिक विफलता थी। भिंडरांवाले ने स्वर्ण मंदिर परिसर में शरण लेने से पहले विभिन्न गुरुद्वारों पर कब्जा कर लिया था। 
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सरकार के लिए उसे वहां से हटाना या उसके प्रभाव को समाप्त करना मुश्किल साबित हो रहा था। 1983 को इतिहास का एक महत्वपूर्ण मोड़ बताते हुए उन्होंने कहा कि इसी वर्ष पंजाब पुलिस के उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) अवतार सिंह अटवाल की स्वर्ण मंदिर की सीढ़ियों पर  गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उनका शव करीब छह घंटे तक वहीं पड़ा रहा और उसे वहां से हटाया नहीं जा सका।
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दासगुप्ता ने कहा कि ऑपरेशन का नेतृत्व करने वाले जनरल कुलदीप सिंह बरार ने बताया था कि उन्हें खुफिया जानकारी मिली थी कि 9 जून को भिंडरांवाले के समर्थक खालिस्तान की घोषणा कर सकते हैं। उन्हें आशंका थी कि घेराबंदी किए जाने की स्थिति में भिंडरांवाले के समर्थक अमृतसर की ओर कूच कर सकते हैं, जिससे हालात को संभालना बेहद मुश्किल हो जाता। 

लेखकों ने फिर मिलने का किया वादा
ऐतिहासिक कसौली क्लब में आयोजित तीन दिवसीय खुशवंत सिंह साहित्य उत्सव रविवार को संपन्न हो गया। देश-विदेश से आए नवोन्मेषी लेखकों ने अगले आयोजन में फिर मिलने का वादा किया। उत्सव के आयोजक राहुल सिंह ने नई वेबसाइट भी लॉन्च की। दिन की शुरुआत संदीप सिंह की प्रस्तुति ए मेलोडियस प्रेफेस: डिवाइन स्ट्रिंग्स से हुई, जिसका संचालन निरुपमा दत्त ने किया। फिरोज गुजराल और अमान नाथ ने ए ब्रश विद लाइफ: सतीश गुजराल @100 पर अपने विचार साझा किए। ब्रिगेडियर अरविंद लाल (पद्म श्री) ने कॉरपोरेट योगी: फ्रॉम सीकर टू मुख्य कार्यकारी अधिकारी विषय पर बात की। खुशवंत सिंह साहित्य उत्सव में सतीश गुजराल के शताब्दी समारोह और डॉ. अरविंद लाल व श्रेया जानी जैसे वक्ताओं ने अंतिम दिन कला, साहित्य, उद्यमिता और पर्यावरण जैसे विविध विषयों पर गहन चर्चा की।
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