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Solan News: वेदव्यास और भीष्म पितामह की कथाओं के प्रसंग सुनाए गए
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धर्मपुर के सनातन धर्म मंदिर में चल रही है देवी भागवत कथा
संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मपुर (सोलन)। श्रावण मास के अवसर पर धर्मपुर के सनातन धर्म मंदिर में नौ दिवसीय श्रीमद् देवी भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। शिव शक्ति महादेव ग्रुप की मातृ शक्ति इस कथा का आयोजन कर रही है। बुधवार को कथा का तीसरे दिन कथावाचक आचार्य तरुण शर्मा ने इस दौरान वेदव्यास और भीष्म पितामह के प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि वेदव्यास का जन्म वेदों को लिखने के विशेष उद्देश्य से हुआ था। उन्होंने राजा शांतनु और गंगा के विवाह की कथा सुनाई। शांतनु और गंगा के आठ पुत्र हुए, जिनमें से सात पुत्रों का निधन हो गया। आठवें पुत्र को बचाया गया, जिसका नाम भीष्म पितामह रखा गया। भीष्म पितामह धनुष विद्या के महान विद्वान थे। कथा में परशुराम की शक्ति का भी वर्णन किया गया। शांतनु ने गंगा को छोड़ने के बाद सत्यवती से विवाह किया, जिनसे चित्रवान और विचित्रवीर्य नामक दो पुत्र हुए।
आचार्य तरुण शर्मा ने जगदंबा भवानी की असीम शक्ति का बखान किया। उन्होंने कहा कि संसार में मां जगदंबा की शक्ति से बढ़कर कोई शक्ति नहीं है। कथा के दौरान दान के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया, जिसे इन्सान के लिए सबसे कठिन बताया गया। शिव शक्ति ग्रुप की महिलाओं ने भजनों पर नृत्य कर कथा का आनंद लिया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
धर्मपुर (सोलन)। श्रावण मास के अवसर पर धर्मपुर के सनातन धर्म मंदिर में नौ दिवसीय श्रीमद् देवी भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। शिव शक्ति महादेव ग्रुप की मातृ शक्ति इस कथा का आयोजन कर रही है। बुधवार को कथा का तीसरे दिन कथावाचक आचार्य तरुण शर्मा ने इस दौरान वेदव्यास और भीष्म पितामह के प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि वेदव्यास का जन्म वेदों को लिखने के विशेष उद्देश्य से हुआ था। उन्होंने राजा शांतनु और गंगा के विवाह की कथा सुनाई। शांतनु और गंगा के आठ पुत्र हुए, जिनमें से सात पुत्रों का निधन हो गया। आठवें पुत्र को बचाया गया, जिसका नाम भीष्म पितामह रखा गया। भीष्म पितामह धनुष विद्या के महान विद्वान थे। कथा में परशुराम की शक्ति का भी वर्णन किया गया। शांतनु ने गंगा को छोड़ने के बाद सत्यवती से विवाह किया, जिनसे चित्रवान और विचित्रवीर्य नामक दो पुत्र हुए।
आचार्य तरुण शर्मा ने जगदंबा भवानी की असीम शक्ति का बखान किया। उन्होंने कहा कि संसार में मां जगदंबा की शक्ति से बढ़कर कोई शक्ति नहीं है। कथा के दौरान दान के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया, जिसे इन्सान के लिए सबसे कठिन बताया गया। शिव शक्ति ग्रुप की महिलाओं ने भजनों पर नृत्य कर कथा का आनंद लिया।
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