Himachal: बागवानी की कैंची से पहले भी कट चुकी भ्रष्टाचार की फसल, जानें पूरा मामला
प्रदेश में बगीचों में प्रयोग होने वाली कैंची से पहले भी भ्रष्टाचार की फसल कट चुकी है। हाल ही में किन्नौर के कल्पा ब्लॉक में खरीद प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं।
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हिमाचल प्रदेश में बगीचों में प्रयोग होने वाली कैंची से पहले भी भ्रष्टाचार की फसल कट चुकी है। हाल ही में किन्नौर के कल्पा ब्लॉक में खरीद प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं। इससे पहले भी प्रूनिंग कैंची खरीद गड़बड़झाला सामने आ चुका है। एक दशक पुराने कथित घोटाले से जुड़ी फाइल ही फाड़ दी गई थी। प्रदेश एग्रो इंडस्ट्रीज कॉरपोरेशन में वर्ष 2005 में हुई कैंची खरीद में अनियमितताओं के आरोप थे। विजिलेंस ब्यूरो ने वर्ष 2008 में इस मामले की जांच शुरू की थी। आरोप था कि सेब के पेड़ों की प्रूनिंग के लिए कैंचियां बाजार दर से अधिक कीमत पर खरीदी गईं।
इसकी जांच एक पूर्व मंत्री तक पहुंची थी। उस समय विजिलेंस ब्यूरो ने कॉरपोरेशन को 16 पृष्ठों की प्रश्नावली भेजी थी। जवाब तैयार करते समय एक अधिकारी ने बताया था कि संबंधित फाइल बुरी तरह फटी हुई है। अब किन्नौर के कल्पा ब्लॉक में वाटरशेड योजना के तहत प्रूनिंग कैंची खरीद विवादों में है। अब मामला पंचायतीराज विभाग से संबंधित है। यहां 4,300 रुपये की सबसे कम बोली को रद्द कर दिया गया। बाद में 5,800 रुपये प्रति कैंची की दर से करीब 480 कैंचियों की खरीद को मंजूरी दी गई।
पंचायतीराज विभाग ने शिकायत मिलने के बाद जांच शुरू कर दी है। शिमला के चिड़गांव ब्लॉक में इसी फेल्को-7 मॉडल की कैंची 5,000 रुपये में खरीदी गई। चिड़गांव की जांगला पंचायत ने डेढ़ सौ कैंचियां 5,000 रुपये प्रति कैंची के हिसाब से खरीदीं। रनोल पंचायत में भी 100 कैंचियां इसी दर पर खरीदी गईं। उपप्रधान दयाल सिंह नेगी ने कल्पा में खरीद प्रक्रिया में अनियमितताओं की शिकायत की है। खंड विकास अधिकारी कल्पा हिमांशी ने टेंडर संबंधी शिकायत पर जांच जारी होने की पुष्टि की है। पंचायती राज मंत्री भी बता चुके हैं कि मामले की जांच चल रही है।