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Una News: गेहूं की 40 फीसदी फसल बर्बाद, बारिश न होने से पैदावार गिरना तय
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Tue, 20 Jan 2026 06:10 AM IST
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ऊना। जिले में गेहूं की फसल पर मौसम की मार साफ दिखाई देने लगी है। बीते करीब ढाई माह से अच्छी बारिश न होने के कारण फसल का विकास प्रभावित हो रहा है, जिससे इस बार पैदावार में 40 फीसदी गिरावट की आशंका जताई जा रही है। खासकर गैर सिंचित क्षेत्रों में हालात और भी चिंताजनक बने हुए हैं।
किसानों के अनुसार गेहूं की फसल इस समय बाल निकलने और दाने भरने की अवस्था में है, लेकिन नमी की भारी कमी के चलते पौधों का विकास रुक गया है। खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं और कई जगह फसल पीली पड़ने लगी है। यदि आने वाले दिनों में बारिश नहीं हुई तो नुकसान और बढ़ सकता है। गैर सिंचित इलाकों के किसानों को फसल बचाने के लिए निजी स्तर पर सिंचाई का सहारा लेना पड़ रहा है। इसके लिए उन्हें डीजल पंप या ट्यूबवेल से पानी देना पड़ रहा है, जिससे लागत में भारी इजाफा हो गया है। किसानों का कहना है कि महंगे डीजल और बिजली खर्च के चलते खेती घाटे का सौदा बनती जा रही है।
किसानों में राजीव कुमार, अश्वनी सैनी, रमेश चंद, विजय कुमार, राकेश सैनी, अमित कुमार ने प्रशासन से मांग की है कि स्थिति को देखते हुए जल्द सर्वे करवाया जाए और प्रभावित किसानों को राहत दी जाए। साथ ही, यदि सूखे जैसे हालात बने रहते हैं तो मुआवजा और सिंचाई के वैकल्पिक इंतजाम किए जाएं ताकि किसानों को कुछ राहत मिल सके।
कृषि उपनिदेशक डॉ. कुलभूषण धीमान ने बताया कि यदि फरवरी के अंत या मार्च की शुरुआत में हल्की से मध्यम बारिश हो जाती है तो नुकसान कुछ हद तक कम किया जा सकता है, अन्यथा इस बार गेहूं उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा। 40 फीसदी फसल बर्बाद हो रही है।
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किसानों के अनुसार गेहूं की फसल इस समय बाल निकलने और दाने भरने की अवस्था में है, लेकिन नमी की भारी कमी के चलते पौधों का विकास रुक गया है। खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं और कई जगह फसल पीली पड़ने लगी है। यदि आने वाले दिनों में बारिश नहीं हुई तो नुकसान और बढ़ सकता है। गैर सिंचित इलाकों के किसानों को फसल बचाने के लिए निजी स्तर पर सिंचाई का सहारा लेना पड़ रहा है। इसके लिए उन्हें डीजल पंप या ट्यूबवेल से पानी देना पड़ रहा है, जिससे लागत में भारी इजाफा हो गया है। किसानों का कहना है कि महंगे डीजल और बिजली खर्च के चलते खेती घाटे का सौदा बनती जा रही है।
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किसानों में राजीव कुमार, अश्वनी सैनी, रमेश चंद, विजय कुमार, राकेश सैनी, अमित कुमार ने प्रशासन से मांग की है कि स्थिति को देखते हुए जल्द सर्वे करवाया जाए और प्रभावित किसानों को राहत दी जाए। साथ ही, यदि सूखे जैसे हालात बने रहते हैं तो मुआवजा और सिंचाई के वैकल्पिक इंतजाम किए जाएं ताकि किसानों को कुछ राहत मिल सके।
कृषि उपनिदेशक डॉ. कुलभूषण धीमान ने बताया कि यदि फरवरी के अंत या मार्च की शुरुआत में हल्की से मध्यम बारिश हो जाती है तो नुकसान कुछ हद तक कम किया जा सकता है, अन्यथा इस बार गेहूं उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा। 40 फीसदी फसल बर्बाद हो रही है।