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सुगम पास प्रकरण का आरोपी अधिकारी मुख्यमंत्री का करीबी : बलबीर
Thu, 30 Jul 2026 12:20 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Thu, 30 Jul 2026 12:20 AM IST
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चिंतपूर्णी (ऊना)। माता चिंतपूर्णी मंदिर में सुगम पास से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले को लेकर भाजपा ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष विधायक बलबीर चौधरी ने आरोप लगाया कि मामले में पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने के बाद भी जांच में कोई ठोस प्रगति नहीं की है। उन्होंने सरकार पर मामले को दबाने का आरोप लगाते हुए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की।
बुधवार को चिंतपूर्णी में आयोजित पत्रकार वार्ता में बलबीर चौधरी ने कहा कि जब मंदिर में सुगम दर्शन प्रणाली लागू की गई थी, तभी भाजपा ने इस व्यवस्था में भ्रष्टाचार की आशंका जताई थी। अब मंदिर प्रशासन की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज होने के बाद भाजपा की आशंकाएं सही साबित होती नजर आ रही हैं। उन्होंने कहा कि मंदिर प्रशासन की जांच के दौरान 19 जून के रिकॉर्ड में डिजिटल भुगतान से जुड़े कई संदिग्ध लेन-देन सामने आए थे। आरोप है कि एक ही ट्रांजेक्शन आईडी और मोबाइल नंबर का बार-बार इस्तेमाल किया गया। बलबीर चौधरी ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में कथित रूप से शामिल अधिकारी मुख्यमंत्री का करीबी है और इसी कारण पुलिस केवल औपचारिक कार्रवाई तक सीमित है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार निष्पक्ष जांच कराना चाहती है तो पिछले तीन वर्षों के सभी रिकॉर्ड की गहन जांच कराई जाए।
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बुधवार को चिंतपूर्णी में आयोजित पत्रकार वार्ता में बलबीर चौधरी ने कहा कि जब मंदिर में सुगम दर्शन प्रणाली लागू की गई थी, तभी भाजपा ने इस व्यवस्था में भ्रष्टाचार की आशंका जताई थी। अब मंदिर प्रशासन की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज होने के बाद भाजपा की आशंकाएं सही साबित होती नजर आ रही हैं। उन्होंने कहा कि मंदिर प्रशासन की जांच के दौरान 19 जून के रिकॉर्ड में डिजिटल भुगतान से जुड़े कई संदिग्ध लेन-देन सामने आए थे। आरोप है कि एक ही ट्रांजेक्शन आईडी और मोबाइल नंबर का बार-बार इस्तेमाल किया गया। बलबीर चौधरी ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में कथित रूप से शामिल अधिकारी मुख्यमंत्री का करीबी है और इसी कारण पुलिस केवल औपचारिक कार्रवाई तक सीमित है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार निष्पक्ष जांच कराना चाहती है तो पिछले तीन वर्षों के सभी रिकॉर्ड की गहन जांच कराई जाए।
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