{"_id":"6a3832cd8e9a109a4a0f9bf4","slug":"banned-timber-was-being-transported-to-punjab-via-amb-una-news-c-93-1-una1002-195901-2026-06-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Una News: अंब के रास्ते पंजाब पहुंच रही थी प्रतिबंधित लकड़ी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Una News: अंब के रास्ते पंजाब पहुंच रही थी प्रतिबंधित लकड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Tue, 23 Jun 2026 12:13 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
अंब (ऊना)। अंब और भरवाईं क्षेत्र में शुक्रवार रात को वन विभाग की नाके के दौरान पकड़ी गई अवैध लकड़ी के मामले में एक बड़ा पहलू सामने आया है।
कार्रवाई से यह साफ हो गया है कि अंब का क्षेत्र केवल एक ट्रांजिट रूट यानी ऐसा रास्ता बन चुका है, जिसका इस्तेमाल वन माफिया पड़ोसी जिलों से काटी गई प्रतिबंधित लकड़ी को पंजाब की मंडियों तक पहुंचाने के लिए कर रहा है।
रात के अंधेरे में देहरा और हमीरपुर मंडल से आ रही गाड़ियों का अंब में पकड़ा जाना इस बात की ओर इशारा करता है कि तस्करों का नेटवर्क प्रदेश के अन्य हिस्सों में सक्रिय है और वे सुरक्षित निकासी के लिए इस मार्ग को चुन रहे हैं।
भौगोलिक दृष्टि से अंब और इसके आसपास के रास्ते पंजाब की सीमा से सीधे जुड़ते हैं। यही वजह है कि प्रदेश के अलग-अलग जिलों में अवैध रूप से काटे गए खैर और अन्य प्रतिबंधित प्रजातियों के पेड़ों को गाड़ियों में लादकर तस्कर इसी रास्ते से पंजाब ले जाने की फिराक में रहते हैं।
विज्ञापन
स्थानीय स्तर पर भले ही बड़े पैमाने पर कटान न हो रहा हो लेकिन बाहरी क्षेत्रों से आने वाले इन वाहनों की लगातार आवाजाही ने स्थानीय वन विभाग और पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। मुख्य रास्तों पर सघन चेकिंग न होने का फायदा उठाकर माफिया अकसर इस रूट से निकल जाता था, लेकिन ताजा कार्रवाई ने उनके इस सुरक्षित गलियारे को बेनकाब कर दिया है।
इस पूरी स्थिति से यह भी स्पष्ट होता है कि जब तक अंतर-जिला स्तर पर वन विभाग की टीमें आपस में समन्वय बनाकर काम नहीं करेंगी तब तक इस अवैध कारोबार को रोकना मुमकिन नहीं होगा।
अन्य जिलों से लकड़ी कटकर पंजाब की सीमाओं तक पहुंच जाना यह दर्शाता है कि शुरुआत से लेकर रास्ते के अन्य पड़ावों तक कहीं न कहीं निगरानी में कमी रह जाती है जिसका खामियाजा पूरे क्षेत्र की कानून व्यवस्था को भुगतना पड़ता है।
अब देखना होगा कि वन विभाग इस रूट पर मुस्तैदी बढ़ाते हुए भविष्य में तस्करों के इस नेटवर्क को पूरी तरह तोड़ने में कितना कामयाब हो पाता है।
उधर, अंब के रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर राहुल ठाकुर ने बताया कि वन माफिया के खिलाफ विभाग पूरी तरह सतर्क है और किसी भी सूरत में अवैध कटान या तस्करी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कार्रवाई से यह साफ हो गया है कि अंब का क्षेत्र केवल एक ट्रांजिट रूट यानी ऐसा रास्ता बन चुका है, जिसका इस्तेमाल वन माफिया पड़ोसी जिलों से काटी गई प्रतिबंधित लकड़ी को पंजाब की मंडियों तक पहुंचाने के लिए कर रहा है।
रात के अंधेरे में देहरा और हमीरपुर मंडल से आ रही गाड़ियों का अंब में पकड़ा जाना इस बात की ओर इशारा करता है कि तस्करों का नेटवर्क प्रदेश के अन्य हिस्सों में सक्रिय है और वे सुरक्षित निकासी के लिए इस मार्ग को चुन रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
भौगोलिक दृष्टि से अंब और इसके आसपास के रास्ते पंजाब की सीमा से सीधे जुड़ते हैं। यही वजह है कि प्रदेश के अलग-अलग जिलों में अवैध रूप से काटे गए खैर और अन्य प्रतिबंधित प्रजातियों के पेड़ों को गाड़ियों में लादकर तस्कर इसी रास्ते से पंजाब ले जाने की फिराक में रहते हैं।
स्थानीय स्तर पर भले ही बड़े पैमाने पर कटान न हो रहा हो लेकिन बाहरी क्षेत्रों से आने वाले इन वाहनों की लगातार आवाजाही ने स्थानीय वन विभाग और पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। मुख्य रास्तों पर सघन चेकिंग न होने का फायदा उठाकर माफिया अकसर इस रूट से निकल जाता था, लेकिन ताजा कार्रवाई ने उनके इस सुरक्षित गलियारे को बेनकाब कर दिया है।
इस पूरी स्थिति से यह भी स्पष्ट होता है कि जब तक अंतर-जिला स्तर पर वन विभाग की टीमें आपस में समन्वय बनाकर काम नहीं करेंगी तब तक इस अवैध कारोबार को रोकना मुमकिन नहीं होगा।
अन्य जिलों से लकड़ी कटकर पंजाब की सीमाओं तक पहुंच जाना यह दर्शाता है कि शुरुआत से लेकर रास्ते के अन्य पड़ावों तक कहीं न कहीं निगरानी में कमी रह जाती है जिसका खामियाजा पूरे क्षेत्र की कानून व्यवस्था को भुगतना पड़ता है।
अब देखना होगा कि वन विभाग इस रूट पर मुस्तैदी बढ़ाते हुए भविष्य में तस्करों के इस नेटवर्क को पूरी तरह तोड़ने में कितना कामयाब हो पाता है।
उधर, अंब के रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर राहुल ठाकुर ने बताया कि वन माफिया के खिलाफ विभाग पूरी तरह सतर्क है और किसी भी सूरत में अवैध कटान या तस्करी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।