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Una News: खरयालता, डीहर पंचायतों में मक्की की फसल पर सुंडी का कहर
Fri, 10 Jul 2026 01:27 AM IST
शिमला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Fri, 10 Jul 2026 01:27 AM IST
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खरयालता पंचायत में सुंडी के प्रकोप से प्रभावित मक्की की फसल का दृश्य। संवाद
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जोल (ऊना)। खरयालता और डीहर पंचायतों में इन दिनों मक्की की फसल पर सुंडी के प्रकोप ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। किसानों का कहना है कि हर वर्ष मक्की की फसल इसी समस्या से प्रभावित होती है लेकिन आज तक इसका कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। किसानों ने सरकार और कृषि विभाग से मांग की है कि मक्की की फसल को हर साल नुकसान पहुंचाने वाली इस समस्या का वैज्ञानिक एवं स्थायी समाधान खोजा जाए ताकि उन्हें बार-बार होने वाले आर्थिक नुकसान से राहत मिल सके।
किसान कर्नल रघवीर सिंह, रणजीत सिंह, रोहन शर्मा, ओंकार दास, अजय कुमार, बलदेव सिंह, मदनलाल सहित अन्य किसानों ने बताया कि उनके खेतों में मक्की की फसल तेजी से सुंडी की चपेट में आ रही है, जिससे फसल को भारी नुकसान हो रहा है। किसानों का आरोप है कि कृषि विभाग के विशेषज्ञों द्वारा सुझाई गई दवाइयों का भी अपेक्षित असर नहीं हो रहा है। जिस कारण उनकी मेहनत और लागत दोनों पर पानी फिर रहा है।
इस संबंध में पौध संरक्षण विशेषज्ञ बंगाणा सतपाल धीमान ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर किसानों को सुंडी की पहचान, नियंत्रण के उपाय तथा दवाइयों के सही एवं समय पर प्रयोग की जानकारी दी जाएगी। उन्होंने किसानों से नियमित रूप से फसल का निरीक्षण करने और शुरुआती अवस्था में ही कीट नियंत्रण के उपाय अपनाने की अपील की।
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धीमान ने बताया कि मक्की की फसल में सुंडी के प्रभावी नियंत्रण के लिए कोराजिन की पांच मिलीलीटर मात्रा एक पंप (लगभग 15 लीटर पानी) में मिलाकर छिड़काव करें तथा 20 दिन बाद दोबारा स्प्रे करें। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि हर वर्ष लगातार मक्की की खेती करने के बजाय फसल चक्र अपनाते हुए अन्य फसलों की भी बुवाई करें। इससे सुंडी का प्रकोप कम करने में मदद मिलेगी।
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किसान कर्नल रघवीर सिंह, रणजीत सिंह, रोहन शर्मा, ओंकार दास, अजय कुमार, बलदेव सिंह, मदनलाल सहित अन्य किसानों ने बताया कि उनके खेतों में मक्की की फसल तेजी से सुंडी की चपेट में आ रही है, जिससे फसल को भारी नुकसान हो रहा है। किसानों का आरोप है कि कृषि विभाग के विशेषज्ञों द्वारा सुझाई गई दवाइयों का भी अपेक्षित असर नहीं हो रहा है। जिस कारण उनकी मेहनत और लागत दोनों पर पानी फिर रहा है।
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इस संबंध में पौध संरक्षण विशेषज्ञ बंगाणा सतपाल धीमान ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर किसानों को सुंडी की पहचान, नियंत्रण के उपाय तथा दवाइयों के सही एवं समय पर प्रयोग की जानकारी दी जाएगी। उन्होंने किसानों से नियमित रूप से फसल का निरीक्षण करने और शुरुआती अवस्था में ही कीट नियंत्रण के उपाय अपनाने की अपील की।
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धीमान ने बताया कि मक्की की फसल में सुंडी के प्रभावी नियंत्रण के लिए कोराजिन की पांच मिलीलीटर मात्रा एक पंप (लगभग 15 लीटर पानी) में मिलाकर छिड़काव करें तथा 20 दिन बाद दोबारा स्प्रे करें। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि हर वर्ष लगातार मक्की की खेती करने के बजाय फसल चक्र अपनाते हुए अन्य फसलों की भी बुवाई करें। इससे सुंडी का प्रकोप कम करने में मदद मिलेगी।