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केसीसीबी लोन घोटाला: एसएचओ सदर लाइन हाजिर, धर्मशाला मुख्यालय में दबिश; जानें पूरा मामला विस्तार से

संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना। Published by: अंकेश डोगरा Updated Sat, 17 Jan 2026 05:00 AM IST
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सार

केसीसीबी से जुड़े बहुचर्चित होटल लोन मामले में एसएचओ से मामले की जांच को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है। मामले में एसएचओ थाना सदर ऊना को लाइन हाजिर किया है। पढ़ें पूरी खबर...

KCCB loan scam SHO Sadar transferred to reserve lines raid conducted at Dharamshala headquarters
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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कांगड़ा सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (केसीसीबी) से जुड़े बहुचर्चित होटल लोन मामले में एसपी ऊना ने एसएचओ थाना सदर ऊना को लाइन हाजिर किया है। एसएचओ से मामले की जांच को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया है। हालांकि, मामला शक्तियों के दुरुपयोग का है या जांच में लापरवाही से जुड़ा, इस पर अधिकारी एसएचओ का स्पष्टीकरण आने के बाद ही कुछ कहने की बात कर रहे हैं। मामले में बैंक के पूर्व प्रबंध निदेशक विनोद कुमार समेत आठ अन्य अधिकारियों, कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। मामले की जांच एसएचओ सदर गौरव भारद्वाज की अगुवाई में चल रही थी। इस बीच उन्हें लाइन हाजिर किए जाने के फरमान जारी हुए हैं।

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दूसरी ओर थाना सदर ऊना की विशेष टीम ने शुक्रवार को धर्मशाला स्थित केसीसीबी मुख्यालय में दबिश देकर लोन से जुड़े अहम दस्तावेज और फाइलें कब्जे में ली हैं। थाना सदर ऊना में यह एफआईआर मंडी के गांव भूरा, डाकघर राजगढ़ निवासी युद्ध चंद बैंस की शिकायत पर पंजीकृत की गई है। एफआईआर के अनुसार शिकायतकर्ता एक होटल व्यवसायी है। शिकायतकर्ता ने वर्ष 2016 में कांगड़ा सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड ऊना से होटल प्रोजेक्ट के लिए करीब 12 करोड़ रुपये का टर्म लोन स्वीकृत करवाया। लोन के बदले दोनों होटल प्रॉपर्टियों को बैंक के पास गिरवी रखा गया। लोन स्वीकृत होने के बावजूद समय पर पूरी राशि जारी नहीं की गई और अनियमित तथा देरी से किए गए वितरण के कारण होटल प्रोजेक्ट को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

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आरोप है कि बैंक अधिकारियों ने गिरवी रखी गई प्रॉपर्टी की आरक्षित मूल्य तय करने से जुड़े मूल्यांकन रिकाॅर्ड में हेराफेरी की। शिकायतकर्ता ने एफआईआर में यह भी आरोप लगाया है कि आरबीआई की गाइडलाइन और कोविड-19 के दौरान लागू मोरेटोरियम के बावजूद वर्ष 2021 में लोन को गलत तरीके से एनपीए घोषित कर दिया गया। इसके चलते मामला हाईकोर्ट हिमाचल प्रदेश और डेब्ट रिकवरी ट्रिब्यूनल, चंडीगढ़ तक पहुंच गया। शिकायतकर्ता ने आरटीआई के माध्यम से जानकारी मांगी, जिसमें खुलासा हुआ कि केसीसीबी की रिकवरी शाखा से उसकी लोन फाइल के कई महत्वपूर्ण पेज, विशेषकर रिजर्व प्राइस फिक्सेशन और वैल्यूएशन से संबंधित नोटिंग्स गायब हैं। पुलिस अधीक्षक अमित यादव ने बताया कि मामले में एसएचओ सदर को लाइन हाजिर किया गया है। जांच से जुड़े कुछ अहम पहलुओं पर उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है।

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