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Una News: बारिश और खाद के छिड़काव से आलू की फसल ने पकड़ी रफ्तार
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ऊना में इस बार 1000 हेक्टेयर में तैयार किया जा रहा आलू
गेहूं के समानांतर चार महीने में तैयार होगी फसल, किसान को अच्छे लाभ की उम्मीद
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले में इस समय करीब 1000 हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू की खेती की जा रही है। हालिया बारिश और किसानों की ओर से किए गए खाद के छिड़काव से आलू की फसल की वृद्धि में तेजी आई है, जिससे खेतों में फिर से हरियाली लौट आई है। किसानों का कहना है कि पिछले कुछ समय तक फसल को केवल सिंचाई के सहारे आगे बढ़ाया जा रहा था। पर्याप्त नमी और पोषक तत्वों की कमी के कारण पौधों की वृद्धि प्रभावित हो रही थी। बारिश के बाद मिट्टी में नमी का स्तर बेहतर हुआ है और खाद के छिड़काव से पौधों को आवश्यक पोषण मिला है। इसके चलते अब फसल तेजी से बढ़ रही है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इस समय आलू की फसल के लिए नमी और पोषक तत्व बेहद आवश्यक होते हैं। बारिश के साथ खाद मिलने से पौधों की जड़ें मजबूत हो रही हैं और कंदों के विकास में भी सुधार देखने को मिल रहा है। आलू की खेती से जुड़े किसानों को अब बेहतर पैदावार की उम्मीद है। यदि आने वाले दिनों में मौसम अनुकूल बना रहा तो इस बार आलू उत्पादन में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है, जिससे किसानों को आर्थिक रूप से राहत मिल सकती है।
हालांकि बीते दो माह की आलू की फसल में किसानों को नुकसान उठाना पड़ा था। इसी कारण इस बार चार माह वाली आलू की फसल कम किसानों की ओर से तैयार की गई है। पिछले वर्ष यह फसल 1500 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में उगाई गई थी, लेकिन इस बार कम दाम मिलने के कारण किसानों का रुझान घटा है। इसके स्थान पर किसानों ने हरी सब्जियों और गेहूं की खेती को प्राथमिकता दी है।
उपनिदेशक जिला कृषि विभाग डॉ. कुलभूषण धीमान ने बताया कि बारिश के बाद फसलों के लिए मौसम की परिस्थितियां बेहद अनुकूल बनी हुई हैं। वर्तमान में सभी फसलें अच्छी स्थिति में हैं और किसानों की ओर से खाद व कीटनाशकों का छिड़काव किया जा चुका है। डॉ. धीमान के अनुसार चार माह वाली आलू की फसल की पैदावार बेहतर होती है और उम्मीद है कि इस बार बाजार में आलू को अच्छी कीमत मिलेगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले में इस समय करीब 1000 हेक्टेयर क्षेत्रफल में आलू की खेती की जा रही है। हालिया बारिश और किसानों की ओर से किए गए खाद के छिड़काव से आलू की फसल की वृद्धि में तेजी आई है, जिससे खेतों में फिर से हरियाली लौट आई है। किसानों का कहना है कि पिछले कुछ समय तक फसल को केवल सिंचाई के सहारे आगे बढ़ाया जा रहा था। पर्याप्त नमी और पोषक तत्वों की कमी के कारण पौधों की वृद्धि प्रभावित हो रही थी। बारिश के बाद मिट्टी में नमी का स्तर बेहतर हुआ है और खाद के छिड़काव से पौधों को आवश्यक पोषण मिला है। इसके चलते अब फसल तेजी से बढ़ रही है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इस समय आलू की फसल के लिए नमी और पोषक तत्व बेहद आवश्यक होते हैं। बारिश के साथ खाद मिलने से पौधों की जड़ें मजबूत हो रही हैं और कंदों के विकास में भी सुधार देखने को मिल रहा है। आलू की खेती से जुड़े किसानों को अब बेहतर पैदावार की उम्मीद है। यदि आने वाले दिनों में मौसम अनुकूल बना रहा तो इस बार आलू उत्पादन में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है, जिससे किसानों को आर्थिक रूप से राहत मिल सकती है।
हालांकि बीते दो माह की आलू की फसल में किसानों को नुकसान उठाना पड़ा था। इसी कारण इस बार चार माह वाली आलू की फसल कम किसानों की ओर से तैयार की गई है। पिछले वर्ष यह फसल 1500 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में उगाई गई थी, लेकिन इस बार कम दाम मिलने के कारण किसानों का रुझान घटा है। इसके स्थान पर किसानों ने हरी सब्जियों और गेहूं की खेती को प्राथमिकता दी है।
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उपनिदेशक जिला कृषि विभाग डॉ. कुलभूषण धीमान ने बताया कि बारिश के बाद फसलों के लिए मौसम की परिस्थितियां बेहद अनुकूल बनी हुई हैं। वर्तमान में सभी फसलें अच्छी स्थिति में हैं और किसानों की ओर से खाद व कीटनाशकों का छिड़काव किया जा चुका है। डॉ. धीमान के अनुसार चार माह वाली आलू की फसल की पैदावार बेहतर होती है और उम्मीद है कि इस बार बाजार में आलू को अच्छी कीमत मिलेगी।
