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Una News: गांवों में बढ़ता कचरा संकट, पंचायतों के पास ठोस समाधान नहीं

Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 04 Feb 2026 12:58 AM IST
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The growing garbage crisis in villages, the panchayats have no concrete solution
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पर्यावरण और पशुधन के स्वास्थ्य पर पड़ रहा प्रतिकूल असर
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ग्रामीणों ने कहा- आगामी पंचायत चुनाव में कचरा प्रबंधन रहेगा बड़ा मुद्दा

संजीव पराशर

दौलतपुर चौक (ऊना)। ग्रामीण क्षेत्रों में कूड़े-कचरे की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। गांवों में ठोस कचरा प्रबंधन की समुचित व्यवस्था न होने के कारण खेतों, खाली स्थानों, सड़कों के किनारे तथा खड्ड-नालों में घरेलू कचरा खुलेआम फेंका जा रहा है। इससे न केवल गांवों की स्वच्छता प्रभावित हो रही है, बल्कि पर्यावरण और पशुधन के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर पंचायतों और नगर निगमों की तर्ज पर गांवों में अब तक कोई व्यवस्थित कचरा प्रबंधन प्रणाली लागू नहीं की गई है। न तो डस्टबिन की पर्याप्त व्यवस्था है और न ही नियमित कचरा उठान की। मजबूरी में ग्रामीणों को कचरा नालों या खुली जमीन पर फेंकना पड़ रहा है। खुले में पड़े कचरे को पशु खा रहे हैं, जिससे वे बीमार हो रहे हैं। वहीं, प्लास्टिक व अन्य अपशिष्ट पदार्थ मिट्टी और जल स्रोतों को प्रदूषित कर रहे हैं। बरसात के मौसम में खड्ड-नालों में जमा कचरा जलभराव और बीमारियों का कारण बनता है।
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ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आगामी पंचायत चुनाव में कूड़ा-कचरा प्रबंधन एक बड़ा मुद्दा बनकर उभरेगा।
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पंचायत चुनावों में गूंजेगा कचरा प्रबंधन का मुद्दा
स्थानीय निवासी पिरथी चंद, राम कुमार, विनोद कुमार, नरेंद्र शर्मा और प्रदीप शर्मा ने स्पष्ट किया कि आने वाले पंचायत चुनावों में वे उन्हीं प्रत्याशियों को समर्थन देंगे, जो गांवों में कूड़ा-कचरा प्रबंधन के लिए ठोस और व्यावहारिक योजना प्रस्तुत करेंगे। ग्रामीणों ने प्रशासन से भी मांग की है कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों में कचरा प्रबंधन योजनाओं को शीघ्र प्रभावी रूप से लागू किया जाए।
वहीं, पिरथीपुर के पूर्व प्रधान विजय कुमार ने बताया कि कूड़ा-कचरा प्रबंधन को लेकर विभाग की ओर से पिरथीपुर, डंगोह, खुर्द डंगोह, अभयपुर, वांडू और भद्रकाली पंचायतों को चिह्नित किया गया था। इस दौरान संबंधित पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण भी दिया गया था। भद्रकाली में वेस्ट सेग्रीगेशन (अपशिष्ट पृथक्करण) प्लांट स्थापित करने की योजना बनाई गई थी, जिसके तहत प्रधानों को कचरा प्रबंधन से जुड़ी जानकारी और प्रशिक्षण प्रदान किया गया, लेकिन किसी कारणवश यह परियोजना सिरे नहीं चढ़ पाई।


बीडीओ गगरेट सुरेंद्र जेटली ने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत गांवों को स्वच्छ बनाने के लिए भद्रकाली में वेस्ट सेग्रीगेशन प्लांट लगाया जाएगा। इसके लिए विभाग ने जिले की वेस्ट सेग्रीगेशन कंपनी के साथ एमओयू साइन किया है। यह कंपनी पंचायतों से एकत्रित प्लास्टिक कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निपटान करेगी। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के शुरू होने से पंचायतों को अतिरिक्त राजस्व भी प्राप्त होगा, जो भविष्य में विकास कार्यों में सहायक सिद्ध होगा।
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