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Una News: बाबा जी के जयकारों से गूंज उठा मैड़ी मेला स्थल
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
Updated Wed, 04 Mar 2026 06:51 AM IST
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:डेरा बाबा वडभाग सिंह जी मैड़ी में होली के मौके पर धार्मिक स्थलों पर दर्शन के लिए जाते श्रद्धाल
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अंब (ऊना)। डेरा बाबा बड़भाग सिंह जी मैड़ी में मंगलवार को होली का पर्व पूरे पारंपरिक उल्लास और श्रद्धा के साथ मनाया गया। मेले के मुख्य दिन क्षेत्र के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों डेरा बाबा बड़भाग सिंह जी बेरी साहिब, गुरुद्वारा मंजी साहिब, कुज्जासर और चरणगंगा में पवित्र निशान साहिब चढ़ाए गए। इस दौरान पूरा मेला क्षेत्र बाबा जी के जयकारों और जो बोले सो निहाल के उद्घोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने इस विशेष अवसर पर जमकर गुलाल उड़ाया और एक-दूसरे को होली की बधाई दी।
सुबह के समय संगत ने पुराने निशान साहिब को उतारकर उसे पवित्र जल और दूध से स्नान करवाया। इसके बाद पूरी विधि-विधान के साथ नया चोला पहनाया गया। मेले में आए श्रद्धालुओं ने अपनी मन्नतों के अनुसार निशान साहिब पर रुमाले, खिलौने और गुब्बारे बांधे। भारी संख्या में उपस्थित भक्तों ने बड़े रस्सों की मदद से जब निशान साहिब को ऊपर चढ़ाया तो वहां मौजूद हर व्यक्ति इस पावन दृश्य का साक्षी बना। जैसे-जैसे निशान साहिब शिखर की ओर बढ़ा, भक्तों की आस्था और उत्साह बढ़ता गया। लोगों ने गुब्बारे उड़ाकर अपनी खुशी व्यक्त की और ''आओ संगतों खेडो बाबे दियां होलियां'' भजनों पर झूमते हुए बाबा जी के चरणों में शीश नवाया।
ऐसी मान्यता है कि होली के दिन बाबा बड़भाग सिंह जी साक्षात रूप में मैड़ी में उपस्थित रहकर भक्तों को आशीर्वाद देते हैं। इस दिन विभिन्न धार्मिक स्थलों पर देसी घी से तैयार प्रसाद को बंद कमरों में सुरक्षित रख दिया जाता है। श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास है कि दो दिन बाद जब इन कमरों को खोला जाएगा, तो प्रसाद पर बाबा जी के पंजे का निशान मिलता है, जिसे ''पंजे का प्रसाद'' कहा जाता है। दावा किया जाता है कि यह प्रसाद लंबे समय तक रखने के बाद भी खराब नहीं होता। हालांकि होली के मुख्य समारोह के बाद कई श्रद्धालु अपने घरों की ओर लौट गए हैं, लेकिन बड़ी संख्या में संगत अब भी मैड़ी में ही डटी हुई है ताकि वे दो दिन बाद आधी रात को मिलने वाले इस विशेष प्रसाद को ग्रहण कर सकें। प्रशासन और मंदिर कमेटियों ने प्रसाद वितरण के लिए व्यापक प्रबंध किए हैं।
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सुबह के समय संगत ने पुराने निशान साहिब को उतारकर उसे पवित्र जल और दूध से स्नान करवाया। इसके बाद पूरी विधि-विधान के साथ नया चोला पहनाया गया। मेले में आए श्रद्धालुओं ने अपनी मन्नतों के अनुसार निशान साहिब पर रुमाले, खिलौने और गुब्बारे बांधे। भारी संख्या में उपस्थित भक्तों ने बड़े रस्सों की मदद से जब निशान साहिब को ऊपर चढ़ाया तो वहां मौजूद हर व्यक्ति इस पावन दृश्य का साक्षी बना। जैसे-जैसे निशान साहिब शिखर की ओर बढ़ा, भक्तों की आस्था और उत्साह बढ़ता गया। लोगों ने गुब्बारे उड़ाकर अपनी खुशी व्यक्त की और ''आओ संगतों खेडो बाबे दियां होलियां'' भजनों पर झूमते हुए बाबा जी के चरणों में शीश नवाया।
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ऐसी मान्यता है कि होली के दिन बाबा बड़भाग सिंह जी साक्षात रूप में मैड़ी में उपस्थित रहकर भक्तों को आशीर्वाद देते हैं। इस दिन विभिन्न धार्मिक स्थलों पर देसी घी से तैयार प्रसाद को बंद कमरों में सुरक्षित रख दिया जाता है। श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास है कि दो दिन बाद जब इन कमरों को खोला जाएगा, तो प्रसाद पर बाबा जी के पंजे का निशान मिलता है, जिसे ''पंजे का प्रसाद'' कहा जाता है। दावा किया जाता है कि यह प्रसाद लंबे समय तक रखने के बाद भी खराब नहीं होता। हालांकि होली के मुख्य समारोह के बाद कई श्रद्धालु अपने घरों की ओर लौट गए हैं, लेकिन बड़ी संख्या में संगत अब भी मैड़ी में ही डटी हुई है ताकि वे दो दिन बाद आधी रात को मिलने वाले इस विशेष प्रसाद को ग्रहण कर सकें। प्रशासन और मंदिर कमेटियों ने प्रसाद वितरण के लिए व्यापक प्रबंध किए हैं।