कोरोना महामारी से जूझ रही पूरी दुनिया एक बार फिर से अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के लिए तैयार है, हालांकि हर बार की तुलना में इस बार की स्थिति बिल्कुल अलग है। वैश्विक महामारी से बचाव और रोकथाम के लिए दुनियाभर में इस वक्त स्वास्थ्य गतिविधियों को काफी तवज्जो दी जा रही है। इस वैश्विक महामारी से रोकथाम के लिए स्वास्थ्य संगठन और चिकित्सक लोगों को अपनी शारीरिक और मानसिक स्थिति को मजबूत करने और रोग-प्रतिरोधक क्षमता को विकसित करने के लिए योग जैसे पौराणिक व्यायाम को करने का सुझाव दे रहे हैं।
छठा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस: जानें इस खास दिन के इतिहास, महत्व और थीम के बारे में सबकुछ
कब और कहां-कहां हुआ आयोजन
संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषणा के बाद 21 जून, 2015 को पहली बार अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया था। इस दिन दुनियाभर में विभिन्न योग कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।
- पहले अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम का आयोजन 21 जून, 2015 को दिल्ली के राजपथ पर किया गया था।
- दूसरे एवं तीसरे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रमों का आयोजन क्रमश: 2016 में चंडीगढ़ तथा 2017 में लखनऊ में किया गया था।
- चौथे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन देहरादून में किया गया।
- पांचवें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का आयोजन झारखंड की राजधानी रांची में किया गया था।
- इस बार छठे अंतरराष्ट्रीय दिवस का आयोजन पहली बार ऑनलाइन किया जाएगा।
21 जून को ही क्यों चुना गया?
इस दिवस के लिए 21 जून की तारीख का चयन इसलिए किया गया क्योंकि यह दिन उत्तरी गोलार्द्ध (ग्रीष्मकालीन संक्रांति) का सबसे लंबा दिन होता है जिसका दुनिया के कई हिस्सों में विशेष महत्त्व है, साथ ही आध्यात्मिक कार्यों के लिए भी यह दिन विशेष महत्त्व रखता है। दरअसल भारतीय मान्यता के अनुसार आदि योगी शिव ने इसी दिन मनुष्य जाति को योग विज्ञान की शिक्षा देनी शुरू की थी, जिसके बाद वे आदि गुरू बने। स्मरणीय हो कि विश्व का पहला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (आईवाईडी) 21 जून 2015 को मनाया गया था।
कब और कैसे हुई इसकी शुरुआत?
11 दिसंबर, 2014 को संयुक्त राष्ट्र में 178 सदस्यों द्वारा 21 जून को ‘अंतरराष्ट्रीय योग दिवस’ के रूप में मनाने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दी गई थी। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा प्रस्तुत इस प्रस्ताव को 90 दिनों के अंदर पूर्ण बहुमत से पारित किया गया, संयुक्त राष्ट्र संघ में किसी दिवस प्रस्ताव को मंज़ूर करने के संदर्भ में लिया गया यह सबसे कम समय है।
योग की महत्ता को विश्व में ख्याति दिलाने के उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को मनाने का विचार सितंबर 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रस्तावित किया गया था। बाद में दिसंबर 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने सर्वसम्मति से 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाए जाने की घोषणा की। यह प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र की ‘वैश्विक स्वास्थ्य और विदेश नीति’ की कार्यसूची के तहत अपनाया गया था। विदित हो कि अमेरिका, कनाडा, चीन एवं मिस्र सहित 178 देशों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया था जोकि यूएनओ के इतिहास में अभूतपूर्व घटना थी। प्रस्ताव को महज 90 दिनों में पारित कर उसे लागू किया गया।
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की बदलती रही है थीम
2015: सद्भाव और शांति के लिए योग
2016: युवाओं को कनेक्ट करें
2017: स्वास्थ्य के लिए योग
2018: शांति के लिए योग
2019: पर्यावरण के लिए योग
2020: घर में रहते हुए अपने परिवार के साथ योग करना
योग का इतिहास
योग शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के ‘युज’ शब्द से हुई है, जिसका मतलब जोड़ना, एकीकरण करना या बांधना होता है। आध्यात्मिक स्तर पर जुड़ने का अर्थ है आत्मा का सार्वभौमिक चेतना से मिलन होना वहीं व्यावहारिक स्तर पर योग को शरीर, मन और भावनाओं को संतुलित करने तथा तालमेल बनाने का एक साधन माना जाता है।
ज्ञातव्य है कि आज से हजारों वर्ष पहले ही योग अस्तित्व में आ गया था। भारत में तो योग की शुरूआत करीब दस हजार साल पहले ही हो गई थी। वैदिक संहिताओं के अनुसार सप्तऋषियों में से एक अगस्त्य मुनि ने भारत में योग को जनजीवन का हिस्सा बनाने की दिशा में काम किया। ईसा पूर्व दूसरी सदी में भारतीय महर्षि पतंजलि ने पतंजलि योग सूत्र पुस्तक लिखी। यह आधुनिक योग विज्ञान की अति महत्वपूर्ण रचना मानी जाती है।
आधुनिक समय की बात करें तो 1893 में अमेरिका के शिकागो में विश्व धर्म संसद को स्वामी विवेकानंद ने संबोधित किया था, जिसमें उन्होंने उस समय के आधुनिक युग में पश्चिमी दुनिया को योग से परिचय करवाया था। वहीं परमहंस योगानंद ने 1920 में बोस्टन में क्रिया योग सिखाया था। उसके बाद कई गुरुओं और योगियों ने दुनियाभर में योग का प्रसार किया और बड़े पैमाने पर लोगों ने इसको स्वीकार करना शुरू किया। यहां तक की योग को एक विषय के रूप में भी अध्ययन किया जाने लगा।
योग के विविध आयाम
हर साल 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने की घोषणा के बाद योग पद्धतियों के बारे में जागरूकता में इजाफा हुआ है। यूरोप, अमेरिका, एशिया आदि महाद्वीपों के विभिन्न देशों में इसकी बढ़ती लोकप्रियता इसे प्रमाणित कर रही है। अगर देखा जाए तो इसकी वजह योग का व्यक्ति से जुड़कर उसे शारीरिक व मानसिक स्तर पर स्वस्थ रखना है। सामान्यतः योग किसी व्यक्ति के शरीर, मन, संवेदना, संवेग के स्तर पर काम करता है।
ऐसे में मोटे तौर पर योग के चार वर्गीकरण हुए हैं-
व्यापक स्तर पर देखें तो प्रचलित योग साधनाएँ निम्न तरह की होती हैं-