DeepFake: डीप फेक का शिकार एक्ट्रेस रश्मिका और कैटरीना, इन विपक्षी सांसदों को भी सता रहा चेहरा बदलने का खतरा
निरंतर एक्सेस के लिए सब्सक्राइब करें
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ रजिस्टर्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
अमर उजाला प्रीमियम लेख सिर्फ सब्सक्राइब्ड पाठकों के लिए ही उपलब्ध हैं
विस्तार
ऑर्टिफिशयल इंटेलिजेंस के जरिए 'डीपफेक' यानी किसी फोटो या वीडियो में चेहरा बदल कर उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर देना, अब यह खतरा बढ़ता जा रहा है। साउथ अभिनेत्री रश्मिका मंदाना के बाद बॉलीवुड अदाकारा कैटरीना कैफ भी डीपफेक का शिकार हो गई हैं। अगस्त में संसद सत्र के दौरान विपक्षी दलों के कई सांसद, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं, उन्होंने चेहरा बदलने के खतरे पर चिंता जताई थी। राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान केंद्रीय गृह मंत्रालय से पूछा था कि डीप फेक के खतरों को लेकर मंत्रालय ने क्या कदम उठाया है।
साउथ अभिनेत्री रश्मिका मंदाना का एक वीडियो वायरल हुआ था। हालांकि वह वायरल वीडियो सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर जारा पटेल का था। वीडियो को एडिट कर जारा पटेल के चेहरे की जगह पर रश्मिका मंदाना का चेहरा लगा दिया। इससे मंदाना को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा, तकनीक का जिस तरह से गलत इस्तेमाल किया जा रहा है, वो मेरे लिए ही नहीं, बल्कि हर किसी के लिए डरावना है। इसके बाद बॉलीवुड अभिनेत्री कैटरीना कैफ भी डीपफेक का शिकार हो गईं। कैटरीना कैफ ने टाइगर-3 के टॉवल फाइट सीन वाली तस्वीर इंस्टाग्राम पर शेयर की थी। उस तस्वीर को एडिट कर सोशल मीडिया पर डाल दिया गया। डीपफेक तस्वीर में कैटरीना के कपड़ों के साथ छेड़छाड़ की गई। इस मामले में अमिताभ बच्चन सहित कई बॉलीवुड सितारों की तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा, डीपफेक वीडियो गलत सूचना का सबसे खतरनाक रूप है। ऐसे वीडियोज पर सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही तय होनी चाहिए। गलत सूचनाओं के इन खतरनाक और हानिकारक रूपों से सोशल मीडिया प्लेटफार्मों को निपटने की जरूरत है। उन्होंने एक्स पर लिखा, मोदी सरकार इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले सभी नागरिकों की डिजिटल सुरक्षा और विश्वास सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
क्या सरकार 'डीप फेक' के खतरों से अवगत है
संसद के मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह, प्रमोद तिवारी, प्रियंका चतुर्वेदी, डॉ. एल हनुमंतय्या, डॉ. अमी याज्ञिक और रंजीत रंजन ने 'डीप फेक' का मामला उठाया था। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्रालय से पूछा था, क्या सरकार इस तथ्य से अवगत है कि देश में डीप फेक के मामले आ रहे हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय के तहत आने वाली विभिन्न एजेंसियों ने डीप फेक के मामलों में क्या कार्रवाई की है। क्या सरकार चुनाव में 'डीप फेक' के खतरों से अवगत है। सरकार द्वारा डीप फेक का पता लगाने के लिए क्या उपाय किए गए हैं। ऐसा करने के लिए किस प्रकार की एजेंसियों को नियोजित किया गया है।
फौरी तौर पर पहुंच सकता है भारी नुकसान
केंद्र सरकार के सूत्रों के मुताबिक, सियासतदानों की यह चिंता वाजिब है। आजकल सोशल मीडिया पर इस तरह के मामले देखने को मिल रहे हैं। पहले ऐसे मामलों में विशेष तकनीकी जानकारी हासिल करनी पड़ती थी। उसके बाद ही कोई व्यक्ति किसी दूसरे के फोटो के साथ छेड़छाड़ कर सकता था। अब 'ऑर्टिफिशयल इंटेलिजेंस' ने सभी लोगों को यह अवसर दे दिया है। इस माध्यम से जो सूचनाएं फैलाई जाती हैं, भले ही उसका आधार फेक ही क्यों न हो, लेकिन वे फौरी तौर पर भारी नुकसान पहुंचाने के लिए काफी हैं। वह नुकसान, किसी दंगे के रूप में हो सकता है, बड़े राजनेता की छवि खराब कर चुनावी नतीजों को बदला जा सकता है। अगर वैश्विक स्तर के नेताओं का चेहरा लेकर कोई फेक वीडियो वायरल किया जाता है तो दो देशों के बीच में संबंध खराब हो सकते हैं। लड़ाई की नौबत आ सकती है। डीप फेक के माध्यम से दुष्प्रचार और अफवाहें फैलाई जाती हैं। आतंकी एवं चरमपंथी संगठन या साइबर हैकर, डीप फेक का गलत इस्तेमाल करते हैं। डीप फेक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए डिजिटल मीडिया में हेरफेर की जाती है। ऑडियो, वीडियो या फोटो में चेहरा बदल दिया जाता है।
डीप फेक का सबसे बड़ा जोखिम है पोर्नोग्राफी
चुनाव में इसका ज्यादा इस्तेमाल होने की संभावना है। वजह, उसमें लोगों के पास सोचने या सच को पहचानने का वक्त नहीं होता। आरोप प्रत्यारोप का दौर चलता है। कई बार बड़े नेता, पार्टी या अन्य किसी मशहूर हस्ती को नुकसान पहुंचाने के लिए डीप फेक की मदद ली जाती है। वीडियो, फोटो लेखन सामग्री और आवाज, इन सभी को बदला जा सकता है। इसके माध्यम से झूठे सबूत भी तैयार किए जा सकते हैं। डीप फेक का सबसे बड़ा जोखिम पोर्नोग्राफी है। चेहरों में बदलाव कर सामग्री को अश्लील वेबसाइटों पर डाला जा सकता है। इसके माध्यम से छवि खराब करने का प्रयास होता है। सरकार और विपक्ष के बीच जो खींचतान चलती है, अब उसे भी डीप फेक के जरिए नया रूप दे दिया जाता है। लोकतंत्र को कमजोर करने का प्रयास होता है। लोगों में अराजकता पैदा करने की कोशिश की जाती है।
डीपफेक की फ्लैगिंग करने व नियंत्रित करने का प्रयास
गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा ने सांसदों द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब में बताया था, राज्य/संघ राज्य क्षेत्र अपनी विधि प्रवर्तन एजेंसियों 'एलईए' के माध्यम से डीप फेक के मामलों समेत अपराधों की रोकथाम करने, उनका पता लगाने, जांच करने और अभियोजन चलाने के लिए प्राथमिक रूप से जिम्मेदार हैं। विधि प्रवर्तन एजेंसियां, साइबर क्राइम में संलिप्त व्यक्तियों के विरूद्ध कानून के प्रावधानों के अनुसार, विधिक कार्यवाही करती हैं। केंद्र सरकार, एडवाइजरी और विभिन्न स्कीमों के अंतर्गत वित्तीय सहायता के माध्यम से राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को उनकी क्षमता संवर्धन के प्रयासों में सहायता प्रदान करती है। केंद्र सरकार ने साइबर अपराधों से व्यापक और समन्वित ढंग से निपटने के लिए तंत्र को सुदृढ़ बनाने के उपाय किए हैं। विधि प्रवर्तन एजेंसियों के लिए एक फ्रेमवर्क और ईको सिस्टम उपलब्ध कराने के लिए भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र 'आई4सी' का गठन किया गया है। सभी राज्यों को डीप फेक की अग्रिम पहचान करने, उनका पता लगाने, उनकी फ्लैगिंग करने और उन्हें नियंत्रित करने की आवश्यकता के बारे में जानकारी प्रदान की गई है।