Agneepath: सेना भर्ती के लिए कड़ाके की ठंड में सड़कों पर भटक रहे 1.5 लाख युवा, अग्निपथ योजना ने बिगाड़ी थी बात
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कांग्रेस पार्टी के 'पूर्व सैनिक विभाग' के राष्ट्रीय अध्यक्ष कर्नल रोहित चौधरी ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा, केंद्र सरकार ने डेढ़ लाख से ज्यादा युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है। अग्निपथ योजना लागू होने से पहले, करीब डेढ़ लाख युवा, जिन्होंने आर्मी, एयरफोर्स और नेवी में भर्ती के लिए आवेदन दिया था, केंद्र सरकार ने उन युवाओं के 'नाम-नमक-निशान' के सपने को चूर-चूर कर दिया है...
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देश के विभिन्न हिस्सों से ताल्लुक रखने वाले डेढ़ लाख युवाओं ने, सेना और वायुसेना में भर्ती होकर देश सेवा करने का सुनहरा सपना देखा था। ऐसा भी नहीं था कि इन युवाओं ने केवल सपना ही देखा। उन्होंने अपने सपने को साकार करने के लिए जीतोड़ मेहनत की। भर्ती के दो पड़ाव भी पार कर लिए थे। केंद्र सरकार ने उसी वक्त 'अग्निपथ' योजना लागू कर दी। नतीजा, नियुक्ति पत्र लेने का इंतजार कर रहे डेढ़ लाख युवाओं के सपने चूर-चूर हो गए। तब से लेकर अब तक वे युवा, सड़कों की खाक छान रहे हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर कड़ाके की ठंड में इन युवाओं ने अपने हक के लिए हुंकार भरी। कांग्रेस पार्टी के 'पूर्व सैनिक विभाग' के राष्ट्रीय अध्यक्ष कर्नल रोहित चौधरी ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा, केंद्र सरकार ने डेढ़ लाख से ज्यादा युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है।
कर्नल रोहित चौधरी ने कहा, ये सभी युवा, सेना में भर्ती होने के काबिल थे। इन्होंने भर्ती के दो पड़ाव भी पार कर लिए थे। सरकार, अब इन युवाओं को तुरंत ज्वाइनिंग दे। अग्निपथ योजना लागू होने से पहले, करीब डेढ़ लाख युवा, जिन्होंने आर्मी, एयरफोर्स और नेवी में भर्ती के लिए आवेदन दिया था, केंद्र सरकार ने उन युवाओं के 'नाम-नमक-निशान' के सपने को चूर-चूर कर दिया है। कांग्रेस पार्टी के पूर्व सैनिक विभाग ने आर्मी की भर्तियों में चयनित हुए युवाओं को मोदी सरकार द्वारा जॉइनिंग न देने के विरोध में जंतर मंतर पर विशाल धरना दिया है।
चौधरी ने कहा, मोदी सरकार ने अग्निपथ योजना की आड़ में डेढ़ लाख से ज्यादा युवाओं का भविष्य बर्बाद कर दिया है। जंतर मंतर पर हजारों युवाओं की आवाज बुलंद करने के लिए राज्यसभा सांसद दीपेंद्र हुड्डा और यूथ कांग्रेस अध्यक्ष श्रीनिवासन बीवी भी पहुंचे। चौधरी ने कहा, अग्निपथ योजना आने से पहले इन युवाओं का आर्मी और वायुसेना में निकली भर्तियों में चयन हो चुका था। इन्हें सिर्फ नियुक्ति पत्र मिलने का इंतजार था। सेना भर्ती में चयनित होने के बावजूद, डेढ़ लाख से ज्यादा युवा मोदी सरकार की गलत नीतियों के कारण आज बेरोजगार हैं। देश सेवा का जुनून पाले ये युवा दर दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं।
कर्नल रोहित चौधरी ने कहा, सेना में वर्ष 2019, 2020 व 2021 में हुई तकरीबन 97 भर्तियों में 50 लाख से ज्यादा युवाओं ने भाग लिया था। अलग-अलग भर्तियों में करीब डेढ़ लाख युवा चयनित हुए थे। इन युवाओं को ज्वॉइनिंग नहीं दी गई। कुछ भर्तियों की प्रक्रिया को पूरा नहीं किया गया। मोदी सरकार ने अग्निपथ योजना की आड़ में सेना में चयनित डेढ़ लाख से ज्यादा युवाओं का भविष्य बर्बाद कर दिया है। युवाओं का कहना था कि वे कई तरह की मुश्किलों का सामना करते हुए जब परीक्षा सेंटर पर पहुंचे तो वहां पता चला कि परीक्षा रद्द कर दी गई है। करीब डेढ़ लाख युवाओं को निराश होकर अपने घर लौटना पड़ा।
युवाओं ने कहा, हम इस आस में बैठे थे कि हमने शारीरिक परीक्षा और मेडिकल जांच का पड़ाव पार कर लिया है। केवल एग्जाम बाकी था। उस बीच अग्निपथ योजना आ गई। हालांकि यह भर्ती तो उससे पहले की थी। इस वजह से हमारी भर्ती को अधर में लटका दिया गया। हमें दर-दर की ठोकरें खाने के लिए छोड़ दिया गया। आयु निकलने के चलते हमारे पास दूसरा चांस नहीं था। कोविड 19 के कारण हमारी परीक्षा टाल दी गई। हमें उम्मीद थी कि देर सवेर परीक्षा होगी। हमें सैनिक बनने का मौका मिलेगा।
गत वर्ष कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने इन युवाओं से मुलाकात की थी। तब राहुल ने कहा था कि सरकार ने 'अग्निपथ' योजना की आड़ में सेना एवं वायुसेना में स्थायी भर्ती के लिए संचालित प्रक्रिया को रद्द कर, इन युवाओं की मेहनत पर पानी फेर दिया। अनेक युवा, बिहार के चंपारण से पैदल चलकर दिल्ली पहुंचे थे। राहुल गांधी ने इन युवाओं से मिलने के बाद एक्स पर लिखा था, 'अस्थायी भर्ती के लिए लाई गई अग्निवीर योजना (अग्निपथ) की आड़ में 2019-21 तक चली सेना एवं वायुसेना की 'स्थायी भर्ती प्रक्रिया' को रद्द कर सरकार ने अनगिनत परिश्रमी एवं स्वप्नदर्शी युवाओं की मेहनत पर पानी फेर दिया।
राहुल ने लिखा, 'दुखद है कि 'सत्याग्रह की भूमि' चंपारण से लगभग 1100 किलोमीटर पैदल चल कर अपना हक मांगने दिल्ली आए इन नौजवानों के संघर्ष को मीडिया के किसी भी कैमरे में जगह नहीं मिली। 'छोटे-छोटे कमरों में रहकर बड़े बड़े लक्ष्यों को साधने वाले इन महत्वाकांक्षी छात्रों की पीड़ा शायद मुख्यधारा के मीडिया के 'प्राइम टाइम' में जगह न बना सके। हम सिर्फ 'रोजगार की बात' कर रहे इन युवाओं के संघर्ष में सड़क से लेकर संसद तक उनके साथ हैं।