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Explainer: चार साल बाद ज्यादा अग्निवीरों को रोकना चाहती है सेना, अग्निपथ योजना में बदलाव की जरूरत क्यों?
Mon, 06 Jul 2026 11:24 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Mon, 06 Jul 2026 11:24 AM IST
सार
अग्निपथ योजना के तहत भर्ती हुए पहले अग्निवीर इस साल अपना चार साल का कार्यकाल पूरा करने वाले हैं। इसी बीच एक रिपोर्ट में पता चला है कि तीनों सेनाएं अब पहले से ज्यादा अग्निवीरों को स्थायी सेवा में रखने पर विचार कर रही हैं। आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? सेना को अचानक ज्यादा प्रशिक्षित अग्निवीरों की जरूरत क्यों महसूस हुई और इससे योजना में क्या बदलाव आ सकते हैं? इन सभी सवालों के जवाबों को विस्तार से जानेंगे...
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चार साल बाद ज्यादा अग्निवीरों को रोकना चाहती है सेना
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
भारत सरकार ने वर्ष 2022 में अग्निपथ योजना शुरू की थी। इसका उद्देश्य सेना को युवा, तकनीक से लैस और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार बनाना था। योजना के तहत भर्ती होने वाले अग्निवीरों को चार साल तक सेना में सेवा देने का मौका मिलता है। अभी तक नियम यह है कि चार साल पूरे होने के बाद अधिकतम 25 प्रतिशत अग्निवीरों को नियमित सैनिक के रूप में रखा जाएगा, जबकि बाकी 75 प्रतिशत सेवा से मुक्त हो जाएंगे। लेकिन अब इस व्यवस्था में बदलाव की चर्चा तेज हो गई है।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना चार साल का कार्यकाल पूरा करने वाले अग्निवीरों में से पहले से अधिक संख्या को नियमित सेवा में रखने की मांग कर रही हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि नौसेना लगभग 75 प्रतिशत अग्निवीरों को रखने का प्रस्ताव रख सकती है, जबकि सेना और वायुसेना इस संख्या को मौजूदा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर करीब 50 प्रतिशत करने के पक्ष में हैं। हालांकि, अभी सरकार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया गया है और वर्तमान नियम के अनुसार तीनों सेनाओं में 25 प्रतिशत तक ही स्थायी नियुक्ति का प्रावधान है।
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सेना में सेवा देने वाले जवानों की मांग सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में रहती है। बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), रेलवे सुरक्षा बल, राज्य पुलिस, आपदा प्रबंधन बल, निजी सुरक्षा कंपनियों, हवाई अड्डों, बंदरगाहों, औद्योगिक इकाइयों, बैंक सुरक्षा सेवाओं और सार्वजनिक उपक्रमों में काम करते हैं। कई सैनिक रक्षा उत्पादन, लॉजिस्टिक्स, प्रशिक्षण संस्थानों और कॉरपोरेट सुरक्षा विभागों में भी रोजगार हासिल करते हैं। अग्निवीरों के लिए भी इसी तरह के अवसर बढ़ाने पर लगातार काम किया जा रहा है।
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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना चार साल का कार्यकाल पूरा करने वाले अग्निवीरों में से पहले से अधिक संख्या को नियमित सेवा में रखने की मांग कर रही हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि नौसेना लगभग 75 प्रतिशत अग्निवीरों को रखने का प्रस्ताव रख सकती है, जबकि सेना और वायुसेना इस संख्या को मौजूदा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर करीब 50 प्रतिशत करने के पक्ष में हैं। हालांकि, अभी सरकार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया गया है और वर्तमान नियम के अनुसार तीनों सेनाओं में 25 प्रतिशत तक ही स्थायी नियुक्ति का प्रावधान है।
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सेना अब ज्यादा अग्निवीरों को क्यों रखना चाहती है?
- चार साल में अग्निवीरों ने प्रशिक्षण के साथ कई सैन्य अभियानों और अभ्यासों में हिस्सा लिया।
- आधुनिक हथियारों और नई सैन्य तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव हासिल किया।
- ड्रोन, निगरानी प्रणाली और डिजिटल युद्ध प्रणाली चलाने में दक्षता विकसित की।
- सेना का मानना है कि प्रशिक्षित जवानों को चार साल बाद पूरी तरह बाहर करना व्यावहारिक नहीं होगा।
- अधिक अग्निवीरों को नियमित सेवा में रखने से अनुभवी सैनिकों का बड़ा समूह तैयार रहेगा।
- नए सैनिकों के प्रशिक्षण में लगने वाला समय और संसाधन भी बच सकेंगे।
- इससे सेना की ऑपरेशनल क्षमता और युद्धक तैयारी मजबूत होगी।
क्या तीनों सेनाओं की जरूरत अलग-अलग है?
रिपोर्ट के अनुसार, तीनों सेनाओं की जरूरत एक जैसी नहीं है। नौसेना में अत्याधुनिक जहाज, पनडुब्बियां और जटिल तकनीकी प्रणालियां होती हैं, जिन्हें संचालित करने के लिए लंबे समय तक प्रशिक्षित और अनुभवी कर्मियों की जरूरत पड़ती है। इसी कारण नौसेना सबसे ज्यादा यानी करीब 75 प्रतिशत अग्निवीरों को बनाए रखने की मांग कर सकती है। वहीं सेना और वायुसेना भी मौजूदा व्यवस्था में बदलाव चाहती हैं और लगभग 50 प्रतिशत तक रिटेंशन बढ़ाने के विकल्प पर विचार कर रही हैं। हालांकि अंतिम निर्णय रक्षा मंत्रालय और सैन्य मामलों के विभाग के स्तर पर चर्चा के बाद ही लिया जाएगा।
क्या मौजूदा नियमों में बदलाव तय है?
फिलहाल ऐसा नहीं है। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार चार साल की सेवा पूरी करने के बाद केवल 25 प्रतिशत अग्निवीरों को ही मेरिट और आवश्यकता के आधार पर नियमित सेवा में शामिल किया जा सकता है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस विषय पर पहले भी एक प्रस्ताव सैन्य मामलों के विभाग (DMA) को भेजा गया था, लेकिन उसे दोबारा समीक्षा के लिए वापस भेज दिया गया था। माना जा रहा है कि पहले बैच के चार साल पूरे होने के साथ इस मुद्दे पर फिर से गंभीरता से विचार किया जा रहा है। ऐसे में आने वाले समय में रिटेंशन नीति को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सामने आ सकता है।क्या पहली बार सेवा पूरी करेंगे अग्निवीर?
अग्निपथ योजना के तहत भर्ती होने वाले पहले अग्निवीरों ने वर्ष 2023 की शुरुआत में प्रशिक्षण शुरू किया था। यही पहला बैच अब वर्ष 2026 में अपना चार साल का कार्यकाल पूरा करने जा रहा है। नियमों के अनुसार पहले सभी अग्निवीर सेवा से मुक्त होंगे। इसके बाद जो अग्निवीर नियमित सेना में शामिल रहने के इच्छुक होंगे, उनमें से मेरिट, मेडिकल फिटनेस, प्रदर्शन और सेना की आवश्यकता के आधार पर चयन किया जाएगा। मौजूदा नियमों में अधिकतम 25 प्रतिशत अग्निवीरों को ही नियमित सैनिक के रूप में दोबारा भर्ती किया जा सकता है।क्या सेना को अनुभवी सैनिकों की जरूरत बढ़ गई है?
रिपोर्ट के में बताया गया कि पिछले चार वर्षों में अग्निवीरों ने कई सैन्य अभ्यासों और परिचालन गतिविधियों में हिस्सा लिया है। इस दौरान उन्होंने आधुनिक हथियारों, ड्रोन, निगरानी प्रणाली, संचार तकनीक और नई सैन्य तकनीकों के साथ काम करने का अनुभव हासिल किया है। सेना का मानना है कि ऐसे प्रशिक्षित जवानों को बनाए रखने से नई भर्ती पर होने वाला समय और संसाधन दोनों बचेंगे। साथ ही ऑपरेशनल यूनिट्स में पहले से प्रशिक्षित सैनिक उपलब्ध रहेंगे, जिससे युद्ध क्षमता और तेजी से बढ़ सकती है।क्या कुछ विशेष यूनिटों में ज्यादा अग्निवीर रखे जा सकते हैं?
रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर कुल रिटेंशन प्रतिशत नहीं भी बढ़ता है, तब भी कुछ विशेष सैन्य इकाइयों में नियमित बनाए जाने वाले अग्निवीरों की संख्या अधिक हो सकती है। उदाहरण के तौर पर सेना की नई 'भैरव बटालियन' जैसी विशेष इकाइयों में अधिक अनुभवी अग्निवीरों को शामिल किया जा सकता है। वहीं सामान्य इन्फैंट्री यूनिटों में चार साल के कार्यकाल वाले अग्निवीरों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक रह सकती है। इस तरह कुल 25 प्रतिशत रिटेंशन नियम बरकरार रखते हुए भी अलग-अलग यूनिटों में सैनिकों का संतुलन बनाया जा सकता है।
क्या सेना में अग्निवीरों की भर्ती भी बढ़ाई जा रही?
- आने वाले वर्षों में अग्निवीरों की भर्ती बढ़ाने की तैयारी है।
- पिछले प्रशिक्षण चक्र में करीब 70 हजार अग्निवीर प्रशिक्षण ले रहे थे।
- अगले प्रशिक्षण वर्ष में लगभग 90 हजार रिक्तियां निकाले जाने की संभावना है।
- लक्ष्य सेना में करीब 1.8 लाख जवानों की कमी को धीरे-धीरे पूरा करना है।
- भर्ती बढ़ाने के साथ प्रशिक्षित अग्निवीरों को अधिक संख्या में नियमित सेवा में रखने पर भी विचार किया जा रहा है।
- अंतिम निर्णय सरकार और सैन्य मामलों के विभाग की मंजूरी के बाद होगा।
क्या अग्निपथ योजना में अन्य सुविधाएं भी बढ़ी हैं?
पिछले चार वर्षों में अग्निवीरों के लिए कई नई व्यवस्थाएं की गई हैं। विभिन्न बैंकों के साथ समझौते किए गए हैं, ताकि सेवा के दौरान और उसके बाद उन्हें वित्तीय सुविधाएं मिल सकें। सेना के अनुसार, अग्निवीरों को छुट्टी सहित कई सेवा संबंधी भत्ते नियमित सैनिकों के समान दिए जा रहे हैं। इसके अलावा प्रशिक्षण व्यवस्था को भी लगातार मजबूत किया गया है, ताकि चार वर्षों के भीतर अग्निवीर आधुनिक सैन्य जरूरतों के अनुरूप पूरी तरह तैयार हो सकें। यही वजह है कि अब तीनों सेनाएं इन प्रशिक्षित जवानों के अधिक उपयोग की संभावनाओं पर विचार कर रही हैं।अग्निवीरों को चार साल बाद क्या-क्या मिलेगा?
चार साल की सेवा पूरी होने के बाद जो अग्निवीर नियमित सेवा के लिए चयनित नहीं होंगे, उन्हें सरकार की ओर से सेवा निधि (सेवा निधि पैकेज) दी जाएगी। इस राशि में अग्निवीर के वेतन से जमा हिस्सा और सरकार का समान योगदान शामिल होता है। इसके साथ उस पर मिलने वाला ब्याज भी जोड़ा जाता है। सरकार के अनुसार, यह पूरी राशि आयकर मुक्त होगी। इसके अलावा अग्निवीरों को कौशल प्रमाणपत्र (स्किल सर्टिफिकेट) और अनुभव प्रमाणपत्र भी दिया जाएगा, ताकि उन्हें दूसरी नौकरियों में आवेदन करने में सुविधा मिले।- सेवा निधि पैकेज में वेतन से जमा राशि और सरकार का समान योगदान के तहत करीब ₹11.71 लाख, आयकर मुक्त) मिलते हैं।
- जमा राशि पर मिलने वाला ब्याज भी मिलेगा।
- स्किल सर्टिफिकेट (कौशल प्रमाणपत्र) दिया जाएगा।
- अनुभव प्रमाणपत्र मिलेगा, जिससे दूसरी नौकरियों में मदद होगी।
- नियमित सेवा में चयन नहीं होने पर भी कैंपस प्लेसमेंट और रोजगार सहायता का लाभ मिलेगा।
- सीएपीएफ और असम राइफल्स की भर्ती में 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान।
- पहले बैच के अग्निवीरों को आयु सीमा में पांच वर्ष और बाद के बैचों को तीन वर्ष की छूट।
- कई राज्य सरकारों ने पुलिस भर्ती और अन्य सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता देने की घोषणा की है।
- विभिन्न सार्वजनिक उपक्रमों और निजी कंपनियों में रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
- सेवा के दौरान अर्जित कौशल के आधार पर ब्रिज कोर्स और उच्च शिक्षा के अवसर भी मिल सकते हैं।
- यदि ड्यूटी के दौरान मृत्यु होती है, तो निर्धारित नियमों के अनुसार बीमा और अनुग्रह राशि का लाभ परिवार को मिलता है।
- सेवा के दौरान दिव्यांग होने पर नियमों के अनुसार आर्थिक सहायता और मुआवजा दिया जाता है।
- नियमित सेवा के लिए चयनित होने वाले अग्निवीर भारतीय सेना, नौसेना या वायुसेना में स्थायी सैनिक के रूप में आगे सेवा जारी रख सकते हैं।
सरकारी नौकरियों में अग्निवीरों को कितनी छूट?
अग्निपथ योजना लागू होने के बाद केंद्र सरकार ने घोषणा की थी कि चार साल की सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों को कई सरकारी भर्तियों में प्राथमिकता दी जाएगी। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) और असम राइफल्स की भर्ती में अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। पहले बैच के अग्निवीरों को आयु सीमा में पांच वर्ष और उसके बाद के बैचों को तीन वर्ष की छूट मिलेगी। इसके अलावा कई राज्यों ने भी पुलिस भर्ती और अन्य सरकारी सेवाओं में अग्निवीरों को प्राथमिकता देने की घोषणा की है। हालांकि अलग-अलग राज्यों के नियम अलग हो सकते हैं। ऐसे में ये भी जान लेते हैं कि सेना से रिटायर होने वाले जवानों को कहां-कहां नौकरी मिलती हैं।सेना में सेवा देने वाले जवानों की मांग सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में रहती है। बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), रेलवे सुरक्षा बल, राज्य पुलिस, आपदा प्रबंधन बल, निजी सुरक्षा कंपनियों, हवाई अड्डों, बंदरगाहों, औद्योगिक इकाइयों, बैंक सुरक्षा सेवाओं और सार्वजनिक उपक्रमों में काम करते हैं। कई सैनिक रक्षा उत्पादन, लॉजिस्टिक्स, प्रशिक्षण संस्थानों और कॉरपोरेट सुरक्षा विभागों में भी रोजगार हासिल करते हैं। अग्निवीरों के लिए भी इसी तरह के अवसर बढ़ाने पर लगातार काम किया जा रहा है।
25 प्रतिशत अग्निवीरों का चयन कैसे होगा?
- मेरिट सबसे बड़ा आधार होगा
- मेडिकल फिटनेस जरूरी होगी
- सेवा के दौरान प्रदर्शन का मूल्यांकन होगा।
- सेना की आवश्यकता भी अहम होगी।