{"_id":"6a57700599dbd0b31504c0a6","slug":"ahmedabad-plane-crash-why-is-aaib-opposing-the-release-of-cockpit-recording-in-the-supreme-court-2026-07-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"अहमदाबाद विमान हादसा: सुप्रीम कोर्ट में कॉकपिट रिकॉर्डिंग जारी करने का क्यों विरोध कर रहा AAIB? जानें विरोध की","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
अहमदाबाद विमान हादसा: सुप्रीम कोर्ट में कॉकपिट रिकॉर्डिंग जारी करने का क्यों विरोध कर रहा AAIB? जानें विरोध की
Wed, 15 Jul 2026 05:20 PM IST
राहुल कुमार
आईएएनएस, अहमदाबाद
आईएएनएस, अहमदाबाद
Published by: राहुल कुमार
Updated Wed, 15 Jul 2026 05:20 PM IST
विज्ञापन
अहमदाबाद विमान हादसा
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गुजरात के अहमदादाबाद में हुए विमान हादसे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (एएआईबी) ने सुप्रीम कोर्ट में एयर इंडिया की फ्लाइट एआई-171 दुर्घटना से जुड़ी कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग सार्वजनिक करने और समानांतर जांच कराने की मांग का विरोध किया है।
विरोध की एएआईबी ने बताई वजह
ब्यूरो ने अपने जवाबी हलफनामे में कहा है कि विमान दुर्घटनाओं की जांच से जुड़े कानून के तहत केवल एएआईबी को ही ऐसी दुर्घटनाओं की जांच का अधिकार है और जांच से जुड़ी संरक्षित सामग्री का खुलासा करने की अनुमति नहीं है।
एएआईबी ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया कि उसे उम्मीद है कि एयर इंडिया एआई-171 हादसे की जांच पूरी कर अक्टूबर 2026 तक अंतिम रिपोर्ट सौंप दी जाएगी। ब्यूरो के अनुसार, जांच एयरक्राफ्ट (इन्वेस्टिगेशन ऑफ एक्सीडेंट्स एंड इंसिडेंट्स) रूल्स, 2025 और अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (आईसीएओ) के मानकों के तहत की जा रही है। इसका उद्देश्य भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकना और विमानन सुरक्षा को मजबूत करना है।
विज्ञापन
इन नियम का हवाला दे रहा है एएआईबी
हलफनामे में एएआईबी ने नियम 17 का हवाला देते हुए कहा कि जांच के दौरान दर्ज गवाहों के बयान, विमान संचालन से जुड़े लोगों के बीच हुई बातचीत, मेडिकल और निजी जानकारी, कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग और उसके ट्रांसक्रिप्ट, एयर ट्रैफिक कंट्रोल रिकॉर्डिंग, कॉकपिट इमेज रिकॉर्डिंग और जांच अधिकारियों की राय जैसी सामग्री सार्वजनिक नहीं की जा सकती। केवल तभी इसका खुलासा संभव है, जब केंद्र सरकार यह निर्णय ले कि जांच या भविष्य की जांच पर पड़ने वाले प्रभाव के बावजूद सार्वजनिक हित में इसका खुलासा आवश्यक है। ब्यूरो ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं की ओर से कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग किसी बाहरी समिति को उपलब्ध कराने की मांग मौजूदा कानूनी व्यवस्था के विपरीत है।
हलफनामे में कहा गया है, "2025 के नियमों में जांच सामग्री की गोपनीयता और उसकी निष्पक्षता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण और अनिवार्य प्रावधान किए गए हैं। नियम 17(5) स्पष्ट रूप से कहता है कि कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग की ऑडियो सामग्री को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। यह पूर्ण रूप से वैधानिक प्रतिबंध है।"
एएआईबी ने कहा कि इन प्रावधानों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गवाह बिना किसी डर या दबाव के जांच में सहयोग करें और जांच अधिकारी स्वतंत्र रूप से सुरक्षा संबंधी जांच कर सकें। ब्यूरो ने यह भी स्पष्ट किया कि संरक्षित सामग्री का खुलासा किया जाए या नहीं, इसका निर्णय केवल केंद्र सरकार ही ले सकती है और मौजूदा मामले में ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
हलफनामे में आगे कहा गया है, ये सुरक्षा प्रावधान बेहद महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये गवाहों की स्पष्टवादिता, जांच अधिकारियों की स्वतंत्रता और 'नो-ब्लेम' जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता को बनाए रखते हैं। यदि गवाहों को यह आशंका होगी कि उनके बयान सार्वजनिक किए जा सकते हैं, तो वे खुलकर सहयोग करने से बचेंगे, जिससे सुरक्षा जांच का मूल उद्देश्य ही प्रभावित होगा।
एएआईबी ने यह भी दलील दी कि विमान दुर्घटनाओं की जांच से संबंधित कानूनी ढांचा अपने आप में पूर्ण है और इसमें अदालत द्वारा किसी समानांतर जांच के आदेश की कोई गुंजाइश नहीं है। ब्यूरो ने सुप्रीम कोर्ट से इस रिट याचिका को खारिज करने का अनुरोध किया है।
यह हलफनामा उस याचिका के जवाब में दाखिल किया गया है, जिस पर इस वर्ष फरवरी में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एएआईबी से जांच की प्रगति और अपनाई जा रही प्रक्रिया का ब्योरा मांगा था। उस समय केंद्र सरकार ने अदालत को बताया था कि जांच भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के अनुरूप की जा रही है और इसका उद्देश्य दुर्घटना के कारणों का पता लगाना है, न कि किसी की जिम्मेदारी तय करना।
एएआईबी की जांच टीम की संरचना पर सवाल
यह याचिका सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन ने दायर की है, जिसमें एयर इंडिया एआई-171 विमान दुर्घटना की अदालत की निगरानी में जांच कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि बड़ी संख्या में लोगों की मौत वाले मामलों में अंतरराष्ट्रीय विमान दुर्घटना जांच मानकों के तहत उच्च स्तरीय जांच का प्रावधान है। उन्होंने एएआईबी की जांच टीम की संरचना पर भी सवाल उठाते हुए कहा है कि टीम के कई सदस्य नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) से हैं, जबकि इस हादसे के संदर्भ में डीजीसीए की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
विमान हादसे के बारे में:
विज्ञापन
विरोध की एएआईबी ने बताई वजह
ब्यूरो ने अपने जवाबी हलफनामे में कहा है कि विमान दुर्घटनाओं की जांच से जुड़े कानून के तहत केवल एएआईबी को ही ऐसी दुर्घटनाओं की जांच का अधिकार है और जांच से जुड़ी संरक्षित सामग्री का खुलासा करने की अनुमति नहीं है।
विज्ञापन
एएआईबी ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया कि उसे उम्मीद है कि एयर इंडिया एआई-171 हादसे की जांच पूरी कर अक्टूबर 2026 तक अंतिम रिपोर्ट सौंप दी जाएगी। ब्यूरो के अनुसार, जांच एयरक्राफ्ट (इन्वेस्टिगेशन ऑफ एक्सीडेंट्स एंड इंसिडेंट्स) रूल्स, 2025 और अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (आईसीएओ) के मानकों के तहत की जा रही है। इसका उद्देश्य भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकना और विमानन सुरक्षा को मजबूत करना है।
विज्ञापन
इन नियम का हवाला दे रहा है एएआईबी
हलफनामे में एएआईबी ने नियम 17 का हवाला देते हुए कहा कि जांच के दौरान दर्ज गवाहों के बयान, विमान संचालन से जुड़े लोगों के बीच हुई बातचीत, मेडिकल और निजी जानकारी, कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग और उसके ट्रांसक्रिप्ट, एयर ट्रैफिक कंट्रोल रिकॉर्डिंग, कॉकपिट इमेज रिकॉर्डिंग और जांच अधिकारियों की राय जैसी सामग्री सार्वजनिक नहीं की जा सकती। केवल तभी इसका खुलासा संभव है, जब केंद्र सरकार यह निर्णय ले कि जांच या भविष्य की जांच पर पड़ने वाले प्रभाव के बावजूद सार्वजनिक हित में इसका खुलासा आवश्यक है। ब्यूरो ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं की ओर से कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग किसी बाहरी समिति को उपलब्ध कराने की मांग मौजूदा कानूनी व्यवस्था के विपरीत है।
हलफनामे में कहा गया है, "2025 के नियमों में जांच सामग्री की गोपनीयता और उसकी निष्पक्षता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण और अनिवार्य प्रावधान किए गए हैं। नियम 17(5) स्पष्ट रूप से कहता है कि कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग की ऑडियो सामग्री को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। यह पूर्ण रूप से वैधानिक प्रतिबंध है।"
एएआईबी ने कहा कि इन प्रावधानों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गवाह बिना किसी डर या दबाव के जांच में सहयोग करें और जांच अधिकारी स्वतंत्र रूप से सुरक्षा संबंधी जांच कर सकें। ब्यूरो ने यह भी स्पष्ट किया कि संरक्षित सामग्री का खुलासा किया जाए या नहीं, इसका निर्णय केवल केंद्र सरकार ही ले सकती है और मौजूदा मामले में ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
हलफनामे में आगे कहा गया है, ये सुरक्षा प्रावधान बेहद महत्वपूर्ण हैं क्योंकि ये गवाहों की स्पष्टवादिता, जांच अधिकारियों की स्वतंत्रता और 'नो-ब्लेम' जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता को बनाए रखते हैं। यदि गवाहों को यह आशंका होगी कि उनके बयान सार्वजनिक किए जा सकते हैं, तो वे खुलकर सहयोग करने से बचेंगे, जिससे सुरक्षा जांच का मूल उद्देश्य ही प्रभावित होगा।
एएआईबी ने यह भी दलील दी कि विमान दुर्घटनाओं की जांच से संबंधित कानूनी ढांचा अपने आप में पूर्ण है और इसमें अदालत द्वारा किसी समानांतर जांच के आदेश की कोई गुंजाइश नहीं है। ब्यूरो ने सुप्रीम कोर्ट से इस रिट याचिका को खारिज करने का अनुरोध किया है।
यह हलफनामा उस याचिका के जवाब में दाखिल किया गया है, जिस पर इस वर्ष फरवरी में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एएआईबी से जांच की प्रगति और अपनाई जा रही प्रक्रिया का ब्योरा मांगा था। उस समय केंद्र सरकार ने अदालत को बताया था कि जांच भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के अनुरूप की जा रही है और इसका उद्देश्य दुर्घटना के कारणों का पता लगाना है, न कि किसी की जिम्मेदारी तय करना।
एएआईबी की जांच टीम की संरचना पर सवाल
यह याचिका सेफ्टी मैटर्स फाउंडेशन ने दायर की है, जिसमें एयर इंडिया एआई-171 विमान दुर्घटना की अदालत की निगरानी में जांच कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि बड़ी संख्या में लोगों की मौत वाले मामलों में अंतरराष्ट्रीय विमान दुर्घटना जांच मानकों के तहत उच्च स्तरीय जांच का प्रावधान है। उन्होंने एएआईबी की जांच टीम की संरचना पर भी सवाल उठाते हुए कहा है कि टीम के कई सदस्य नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) से हैं, जबकि इस हादसे के संदर्भ में डीजीसीए की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
विमान हादसे के बारे में:
- 12 जून 2025 को एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 हादसे का शिकार हुई।
- विमान अहमदाबाद से लंदन गैटविक के लिए रवाना हुआ था।
- उड़ान भरने के कुछ ही मिनटों बाद विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
- विमान अहमदाबाद के मेघानीनगर स्थित मेडिकल हॉस्टल कॉम्प्लेक्स से टकराया।
- हादसे में यात्रियों, क्रू सदस्यों और जमीन पर मौजूद लोगों सहित करीब 260 लोगों की मौत हुई।
- यह हाल के वर्षों की सबसे भीषण विमान दुर्घटनाओं में से एक मानी जाती है।