{"_id":"6a5768dfb2338f6dbc084b62","slug":"mathura-case-sc-defers-hearing-talks-underway-between-hindu-litigants-2026-07-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"श्रीकृष्ण जन्मभूमि-ईदगाह विवाद: शीर्ष कोर्ट में क्यों टली सुनवाई? हिंदू पक्षों में किस बात पर चल रही है चर्चा","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
श्रीकृष्ण जन्मभूमि-ईदगाह विवाद: शीर्ष कोर्ट में क्यों टली सुनवाई? हिंदू पक्षों में किस बात पर चल रही है चर्चा
Wed, 15 Jul 2026 04:33 PM IST
निर्मल कांत
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Wed, 15 Jul 2026 04:33 PM IST
सार
मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई 12 अगस्त तक टाल दी है। कोर्ट को बताया गया कि हिंदू पक्ष आपस में इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि किसकी याचिका को मुख्य मामला बनाया जाए। पढ़िए रिपोर्ट-
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई टाल दी। कोर्ट को बताया गया कि हिंदू पक्ष आपस में बातचीत कर रहे हैं कि इस मामले में किसकी याचिका को मुख्य मामला माना जाए।
शीर्ष कोर्ट हिंदू पक्ष की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें 2025 के इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है। इस आदेश में एक दूसरे मुकदमे में शामिल हिंदू पक्ष को भगवान कृष्ण के सभी भक्तों का प्रतिनिधि माना गया था।
जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त के लिए तय की। हिंदू पक्षकारों के एक वकील ने कोर्ट को बताया था कि याचिका दायर करने वाले पक्षों (वादियों) के बीच कुछ अनौपचारिक बातचीत (ऑफ-द-रिकॉर्ड) चल रही है।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: अभिषेक की बढ़ेगी मुश्किल या मिलेगी राहत: आवाज का नमूना देने कोर्ट पहुंचे TMC नेता, जानें क्या है मामला?
कोर्ट में क्या हुआ?
सुनवाई की शुरुआत में पीठ ने कुछ हिंदू पक्षों की ओर से पेश हुए वकील विष्णु शंकर जैन और दूसरे हिंदू पक्ष की ओर से पेश हुए वकील पीवी योगेश्वरन से पूछा कि क्या उनके बीच कोई बातचीत चल रही है।
जस्टिस संजय कुमार ने कहा, 'अगर पक्षों के बीच कुछ बातचीत चल रही है, तो हम मामले की सुनवाई टाल देंगे।' इस पर योगेश्वरन ने कहा कि वे नहीं चाहते कि इस बातचीत का कोर्ट के आदेश में कोई जिक्र हो, क्योंकि यह बातचीत केवल याचिकाकर्ताओं के बीच हो रही है और अदालत के रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं है।
जस्टिस संजय कुमार ने कहा कि इस मामले की सुनवाई पहले भी कई बार टाली जा चुकी है। इस बार भी सुनवाई तभी टाली जाएगी, अगर पक्षों के बीच वास्तव में कोई बातचीत चल रही हो।
पीठ ने कहा, हम किसी भी पक्ष को इस बातचीत के लिए बाध्य नहीं कर रहे हैं। अगर बातचीत चल रही है, तो इसका उल्लेख आदेश में भी किया जा सकता है। इसमें क्या दिक्कत है? खैर। इसके बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई अगस्त तक के लिए टाल दी।
अब तक क्या-क्या हुआ है?
सुप्रीम कोर्ट में पहले से ही मस्जिद समिति और हिंदू पक्षों की ओर से दायर कई याचिकाएं लंबित हैं। इनमें 26 मई 2023 के इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को भी चुनौती दी गई है, जिसमें मथुरा की अदालत में लंबित इस विवाद से जुड़े सभी मामलों को हाईकोर्ट में स्थानांतरित कर लिया गया था।
पिछले साल 18 जुलाई को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक दूसरे हिंदू पक्ष की मांग स्वीकार कर ली थी। इस पक्ष ने अलग से मुकदमा दायर कर शाही ईदगाह मस्जिद को विवादित स्थल से हटाने की मांग की है। हाईकोर्ट ने उसे भगवान श्रीकृष्ण के सभी भक्तों का प्रतिनिधि मानने की अनुमति दी थी।
इससे पहले न्यायमूर्ति संजय कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा था कि यह मामला विस्तार से सुनवाई की मांग करता है। अदालत ने सभी पक्षों से कहा था कि वे पूरी तैयारी के साथ अपनी दलीलें रखें।
विवाद क्या कहा?
यह विवाद शाही ईदगाह मस्जिद से जुड़ा है। हिंदू पक्ष का दावा है कि मुगल शासक औरंगजेब ने मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली पर बने मंदिर को गिराकर वहां शाही ईदगाह मस्जिद बनवाई थी।
इस विवाद से जुड़े 20 से अधिक दीवानी मुकदमे पहले मथुरा की अदालत में दायर किए गए थे। बाद में इन्हें इलाहाबाद हाई कोर्ट में भेज दिया गया, जहां इन पर अभी सुनवाई चल रही है।
हिंदू पक्ष ने हाईकोर्ट से यह भी मांग की थी कि वह इस मामले की मूल सुनवाई उसी तरह करे, जैसे बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि स्वामित्व विवाद की सुनवाई की गई थी।
16 जनवरी 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के 14 दिसंबर 2023 के उस आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसमें अदालत की निगरानी में शाही ईदगाह मस्जिद परिसर का सर्वे कराने और उसके लिए अदालत के आयुक्त की नियुक्ति की अनुमति दी गई थी।
हिंदू पक्ष का दावा है कि मस्जिद परिसर में ऐसे निशान मौजूद हैं, जिनसे पता चलता है कि वहां पहले एक मंदिर था। यह परिसर श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर के बिल्कुल पास स्थित है, जिसे हिंदुओं के लिए बहुत अहम धार्मिक स्थल माना जाता है।
विज्ञापन
शीर्ष कोर्ट हिंदू पक्ष की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें 2025 के इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है। इस आदेश में एक दूसरे मुकदमे में शामिल हिंदू पक्ष को भगवान कृष्ण के सभी भक्तों का प्रतिनिधि माना गया था।
विज्ञापन
जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ ने मामले की अगली सुनवाई 12 अगस्त के लिए तय की। हिंदू पक्षकारों के एक वकील ने कोर्ट को बताया था कि याचिका दायर करने वाले पक्षों (वादियों) के बीच कुछ अनौपचारिक बातचीत (ऑफ-द-रिकॉर्ड) चल रही है।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: अभिषेक की बढ़ेगी मुश्किल या मिलेगी राहत: आवाज का नमूना देने कोर्ट पहुंचे TMC नेता, जानें क्या है मामला?
कोर्ट में क्या हुआ?
सुनवाई की शुरुआत में पीठ ने कुछ हिंदू पक्षों की ओर से पेश हुए वकील विष्णु शंकर जैन और दूसरे हिंदू पक्ष की ओर से पेश हुए वकील पीवी योगेश्वरन से पूछा कि क्या उनके बीच कोई बातचीत चल रही है।
जस्टिस संजय कुमार ने कहा, 'अगर पक्षों के बीच कुछ बातचीत चल रही है, तो हम मामले की सुनवाई टाल देंगे।' इस पर योगेश्वरन ने कहा कि वे नहीं चाहते कि इस बातचीत का कोर्ट के आदेश में कोई जिक्र हो, क्योंकि यह बातचीत केवल याचिकाकर्ताओं के बीच हो रही है और अदालत के रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं है।
जस्टिस संजय कुमार ने कहा कि इस मामले की सुनवाई पहले भी कई बार टाली जा चुकी है। इस बार भी सुनवाई तभी टाली जाएगी, अगर पक्षों के बीच वास्तव में कोई बातचीत चल रही हो।
पीठ ने कहा, हम किसी भी पक्ष को इस बातचीत के लिए बाध्य नहीं कर रहे हैं। अगर बातचीत चल रही है, तो इसका उल्लेख आदेश में भी किया जा सकता है। इसमें क्या दिक्कत है? खैर। इसके बाद अदालत ने मामले की अगली सुनवाई अगस्त तक के लिए टाल दी।
अब तक क्या-क्या हुआ है?
सुप्रीम कोर्ट में पहले से ही मस्जिद समिति और हिंदू पक्षों की ओर से दायर कई याचिकाएं लंबित हैं। इनमें 26 मई 2023 के इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को भी चुनौती दी गई है, जिसमें मथुरा की अदालत में लंबित इस विवाद से जुड़े सभी मामलों को हाईकोर्ट में स्थानांतरित कर लिया गया था।
पिछले साल 18 जुलाई को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक दूसरे हिंदू पक्ष की मांग स्वीकार कर ली थी। इस पक्ष ने अलग से मुकदमा दायर कर शाही ईदगाह मस्जिद को विवादित स्थल से हटाने की मांग की है। हाईकोर्ट ने उसे भगवान श्रीकृष्ण के सभी भक्तों का प्रतिनिधि मानने की अनुमति दी थी।
इससे पहले न्यायमूर्ति संजय कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा था कि यह मामला विस्तार से सुनवाई की मांग करता है। अदालत ने सभी पक्षों से कहा था कि वे पूरी तैयारी के साथ अपनी दलीलें रखें।
विवाद क्या कहा?
यह विवाद शाही ईदगाह मस्जिद से जुड़ा है। हिंदू पक्ष का दावा है कि मुगल शासक औरंगजेब ने मथुरा में भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली पर बने मंदिर को गिराकर वहां शाही ईदगाह मस्जिद बनवाई थी।
इस विवाद से जुड़े 20 से अधिक दीवानी मुकदमे पहले मथुरा की अदालत में दायर किए गए थे। बाद में इन्हें इलाहाबाद हाई कोर्ट में भेज दिया गया, जहां इन पर अभी सुनवाई चल रही है।
हिंदू पक्ष ने हाईकोर्ट से यह भी मांग की थी कि वह इस मामले की मूल सुनवाई उसी तरह करे, जैसे बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि स्वामित्व विवाद की सुनवाई की गई थी।
16 जनवरी 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के 14 दिसंबर 2023 के उस आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसमें अदालत की निगरानी में शाही ईदगाह मस्जिद परिसर का सर्वे कराने और उसके लिए अदालत के आयुक्त की नियुक्ति की अनुमति दी गई थी।
हिंदू पक्ष का दावा है कि मस्जिद परिसर में ऐसे निशान मौजूद हैं, जिनसे पता चलता है कि वहां पहले एक मंदिर था। यह परिसर श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर के बिल्कुल पास स्थित है, जिसे हिंदुओं के लिए बहुत अहम धार्मिक स्थल माना जाता है।