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Will NCP-SP support the NDA on the Delimitation Bill? Supriya Sule drops a hint! Monsoon Session | Maharashtra
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परिसीमन बिल पर NDA का साथ देगी NCP-SP? सुप्रिया सुले ने दिया संकेत! Monsoon Session|Maharashtra
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Published by: Adarsh Jha Updated Wed, 15 Jul 2026 05:11 PM IST
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क्या महाराष्ट्र की राजनीति में फिर कोई बड़ा खेल होने वाला है? क्या शरद पवार की पार्टी ने डिलिमिटेशन यानी परिसीमन विधेयक पर अपने रुख में बदलाव के संकेत दे दिए हैं? और क्या संसद के मानसून सत्र से पहले विपक्ष के भीतर नए समीकरण बनते दिखाई दे रहे हैं? सुप्रिया सुले के एक बयान ने सियासी गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
महाराष्ट्र की राजनीति के सबसे अनुभवी नेताओं में गिने जाने वाले शरद पवार की पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब तक परिसीमन विधेयक के मुद्दे पर विपक्ष के साथ खड़ी दिख रही एनसीपी (एसपी) ने अपने रुख को लेकर नए संकेत दिए हैं। पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष और बारामती सांसद सुप्रिया सुले ने साफ किया कि उनकी पार्टी ने अभी तक प्रस्तावित डिलिमिटेशन बिल को न तो खारिज किया है और न ही उसका समर्थन करने का फैसला लिया है।
मुंबई में शरद पवार, जयंत पाटिल और शशिकांत शिंदे के साथ बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए सुप्रिया सुले ने कहा कि जिस विधेयक का मसौदा अभी सामने ही नहीं आया, उस पर समर्थन या विरोध की घोषणा करना जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा कि पहले केंद्र सरकार परिसीमन का पूरा फॉर्मूला और प्रक्रिया सार्वजनिक करे। इसके बाद इंडिया गठबंधन के सभी सहयोगी दलों के साथ चर्चा होगी और फिर सामूहिक रूप से अंतिम फैसला लिया जाएगा।
हालांकि सुप्रिया सुले के एक बयान ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया। उन्होंने कहा कि यदि केंद्र सरकार महिला आरक्षण में 50 प्रतिशत की सीमा पर चर्चा के लिए तैयार होती है, तो एनसीपी (एसपी) भी परिसीमन के मुद्दे पर विचार करने के लिए तैयार है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी दोहराया कि दक्षिण भारत के राज्यों की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनका कहना था कि सरकार को स्पष्ट करना होगा कि परिसीमन का आधार क्या होगा और इससे राज्यों के प्रतिनिधित्व पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
हाल के दिनों में यह अटकलें भी लगाई जा रही थीं कि शरद पवार की पार्टी परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों पर एनडीए सरकार को बाहर से समर्थन दे सकती है। लेकिन सुप्रिया सुले ने इन खबरों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है और निजी बातचीत को पार्टी का रुख बताकर पेश करना गलत है।
जब उनसे पूछा गया कि यदि सरकार उनकी शर्तें मान ले, लेकिन कांग्रेस डिलिमिटेशन बिल का विरोध करे, तब एनसीपी क्या करेगी? इस पर सुप्रिया सुले ने स्पष्ट कहा कि पार्टी अकेले फैसला नहीं करेगी। एनसीपी इंडिया गठबंधन का हिस्सा है और सभी सहयोगी दलों से चर्चा के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि पार्टी का हर बड़ा फैसला शरद पवार के नेतृत्व में सामूहिक रूप से लिया जाता है।
एनसीपी (एसपी) ने भले ही डिलिमिटेशन बिल पर अंतिम फैसला टाल दिया हो, लेकिन सुप्रिया सुले के बयानों ने इतना जरूर साफ कर दिया है कि बातचीत के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं हैं। अब सबकी नजर केंद्र सरकार के अंतिम विधेयक और इंडिया गठबंधन की साझा रणनीति पर टिकी है। आने वाले मानसून सत्र में यह मुद्दा देश की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बन सकता है।
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